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चांद पर पहली बार गया था इंसान, ऐसे की थी वशिष्ठ नारायण ने NASA की मदद

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का निधन हो गया है. जानिए कितना जानते हैं आप उन्हें. किए थे ये बड़े काम

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 15 November 2019
चांद पर पहली बार गया था इंसान, ऐसे की थी वशिष्ठ नारायण ने NASA की मदद वशिष्ट नारायण

जाने-माने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह निधन 14 नवंबर 2019 को हो गया था. वह 40 साल से मानसिक बीमारी सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित थे. गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण महान शख्सियत थे.  उनका दुनिया से चले जाना भारत के लिए क्षति है.  जिसने एक महान व्यक्ति को हमेशा के लिए खो दिया. वह भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन दुनिया उन्हें इन कार्यों के लिए हमेशा याद रखेंगी. वशिष्ठ नारायण में उतार- चढ़ाव रहा. एक वक्त था जहां वह स्पेस एजेंसी नासा में  काम करते थे वहीं एक वक्त ऐसा था जहां उनके कई साल गुमनामी में बीते.  जानिए उनके बारे में

- गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती दी थी.  उनके बारे में मशहूर है कि नासा में अपोलो की  लांचिंग से पहले जब 31 कंप्यूटर कुछ समय के  लिए बंद हो गए तो कंप्यूटर ठीक होने पर उनका  और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही था.

- गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने 1969 में  कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद वह वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बन गए. वशिष्ठ नारायण ने नासा में भी काम किया, लेकिन वह 1971 में  भारत लौट आए. आपको बता दें, बर्केल यूनिवर्सिटी  ने उन्हें 'जीनियसों का जीनयस' कहा है. उन्होंने  नासा में एक गणितज्ञ के रूप में काम किया था, बाद में उनका मन नहीं लगा था. जिसके बाद उन्होंने पहले IIT कानपुर, बॉम्बे, और फिर ISI कोलकाता में नौकरी की.

- वशिष्ठ नारायण सिंह का जन्म बिहार के बसंतपुर गांव में 2 अप्रैल 1942 में हुआ था. वह पढ़ाई में  इतने तेज थे कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के आगे  गरीबी को आड़े नहीं आने दिया था.

- कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री लेने के बाद वशिष्ठ (नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस  एडमिनिस्ट्रेशन) (NASA) में गणितज्ञ के रूप में काम करने लग गए थे. 1969 की बात है. ये वहीं साल था जब नासा का अपोलो मिशन लॉन्च हुआ था. ये वहीं मिशन था जिसमें पहली बार इंसान को चांद पर भेजा गया था. इस  मिशन का एक मशहूर किस्सा है. जब अपोलो मिशन के दौरान कुछ देर के लिए कंप्यूटर बंद हो गए थे तब वशिष्ठ नारायण ने गणित लगाकर हिसाब निकाला. जिसके बाद जब कंप्यूटर चालू हुए जब वशिष्ठ और कंप्यूटर का कैलकुलेशन एक ही  था.

- ये वो वक्त था जब वशिष्ठ नारायण के बारे में पूरे बिहार समेत भारत में चर्चा होने लगी. इसी  दौरान उनके लिए कई रिश्ते आने लगे. वह शादी  नहीं करना चाहते थे, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें  हां करनी पड़ी. उनका विवाह साल 1973 में वंदना रानी सिंह के साथ हुआ. शादी होने के बाद वह अपनी पत्नी की साथ अमेरिका चले गए. अमेरिका जाने के बाद पत्नी को वशिष्ठ की कुछ हरकतें सही नहीं लगी. कुछ समय उन्हें वशिष्ठ की मानसिक बीमारी के बारे में पता चला.

- साल 1974 में दोनों भारत लौट आए और वह IIT कानपूर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर नौकरी करने लग  गए. इसके बाद उन्होंने बॉम्बे, और फिर ISI  कोलकाता में नौकरी की. इसी दौरान उनकी  मानसिक हालात बिगड़ती रही. उनकी हालात इतनी  बिगड़ गई की 1976 में पत्नी ने उन्हें तलाक दे दिया. जिसके बाद वह पूरी तरह से टूट गए. कुछ समय बाद पता चला कि उन्हें सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी है. ये बीमारी ऐसी है जिसमें मरीज असीलियत से नाता खो बैठता है.

जब मिले कूड़े के ढ़ेर के पास

एक बार वशिष्ठ नारायण अपने भाई के साथ रहने के लिए पुणे में जा रहे थे, लेकिन अचानक ट्रेन से गायब हो गए. उन्हें खूब तलाशा लेकिन नहीं मिले. 4 साल के बाद अपनी पूर्व पत्नी के गांव के पास मिले. तब से घरवालों ने इन नजर रख रहे थे और उनके इलाज के लिए अस्तपताल में भर्ती कराया. जिसके बाद वह चर्चा में आए. आपको बता दें, पिछले साल खबर आई थी कि प्रकाश झा वशिष्ठ नारायण पर उनकी बायोपिक फिल्म बनाएंगे.

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