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कैसे तय होता है कि लोकसभा में कौन सा सांसद कहां बैठेगा?

aajtak.in [Edited by: अनुग्रह मिश्र]
28 May 2019
कैसे तय होता है कि लोकसभा में कौन सा सांसद कहां बैठेगा?
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लोकसभा चुनाव 2019 खत्म हो चुका है और अब नई सरकार के गठन का इंतजार है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मई को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे. इसके बाद 5 या 6 जून से 17वीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू हो सकता है. सत्र की शुरुआत से पहले हम आपको बताते हैं कि सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसद लोकसभा में कहां बैठेंगे. इसके लिए संसद की एक नियमावली है और फॉर्मूले के जरिए प्रत्येक सांसद की सीट तय की जाती है.
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कैसा है सदन

लोकसभा को 6 ब्लॉक में बांटा गया है जो स्पीकर के आसन के दाएं, बाएं और सामने होते हैं. इन्हीं ब्लॉक में सांसदों की सीट होती है और बीच में गैलरी होती है. हर ब्लॉक में 11 लाइन होती हैं जिनकी हरे रंग से कवर सीटों पर सांसद बैठते हैं. स्पीकर के ठीक नीचे वाली बेंच पर लोकसभा महासचिव समेत सचिवालय के अधिकारी बैठते हैं जो सदन को सुचारू ढंग से चलाने में स्पीकर की मदद करते हैं. इसके साथ ही वह दिन भर की कार्यवाही का रिकॉर्ड भी रखते हैं.
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स्पीकर की दाईं और बाईं ओर जो 2 ब्लॉक हैं उनमें 97-97 सीटें होती हैं, बाकी बचे सामने के 4 ब्लॉक में 89-89 सीटें होती हैं. प्रत्येक सांसद के लिए एक सीट निर्धारित होती है, लेकिन कोई मंत्री अगर लोकसभा का सदस्य नहीं भी है, फिर भी वह चर्चा के दौरान सदन में बैठ सकता है.

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क्या है सीट फॉर्मूला

स्पीकर किसी भी पार्टी के सदस्यों की संख्या के आधार पर उनके बैठने की जगह तय करते हैं. इसके लिए एक फॉर्मूला लगाया जाता है, जिसमें किसी पार्टी या गठबंधन के पास कुल सीटों को उस लाइन की कुल सीटें की संख्या से गुणा किया जाता है. इसके बाद जो संख्या आती है, उसे लोकसभा की कुल संख्या से विभाजित कर दिया जाता है.
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इस फॉर्मूले को हम एनडीए को इस बार मिली 353 सीटें से समझते हैं. इस बार एनडीए को मिली कुल सीटों को अगर पहली लाइन की कुल सीटें से गुणा किया जाए और फिर सदन की कुल संख्या से उसे विभाजित किया जाए तो नतीजा 12.83 आता है. पूर्णांक के लिहाज से इस बार एनडीए के 13 सांसदों को फ्रंट रो यानी आगे की लाइन में जगह मिलेगी.
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वरिष्ठता को तरजीह

यह फॉर्मूला 5 या उससे ज्यादा सीटों वाली पार्टी पर ही लागू होता है. अगर किसी दल के सदस्यों की संख्या 5 से कम है तो स्पीकर और दल के नेता आपसी सहमति से उनके बैठने की सीट तय करते हैं. स्पीकर किसी पार्टी के सदस्य की वरिष्ठता को देखते हुए उसे पहली लाइन में जगह दे सकता है. पिछली बार सपा के मुलायम सिंह यादव और जेडीएस के एचडी देवगौड़ा को आगे की लाइन में जगह दी गई थी, जबकि उनकी पार्टी के पास आगे की लाइन में बैठने लायक संख्याबल नहीं था.

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संसद के निम्न संसद यानी लोकसभा में सांसदों की संख्या अधिकतम 552 तक हो सकती है जिनमें से 530 सदस्य अलग-अलग राज्यों से होते हैं और 20 सदस्य तक भारत के केंद्र शासित प्रदेशों से हो सकते हैं इसके अलावा 2 सदस्य राष्ट्रपति की ओर से नामित किए जा सकते हैं. लोकसभा को हाउस ऑफ द पीपुल्स भी कहा जाता है.
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