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मोदी सरकार के तीन साल में कितना डिजिटल हुआ इंडिया?

2013-14 में 254.5 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए जबकि 2016-17 में 865.9 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए. मोबाइल बैंकिंग लेनदेन की तादाद में पिछले तीन साल में जबरदस्त इजाफा हुआ है. डिजिटल भुगतान 2013-14 से डिजिटल लेनदेन ने ऊंची उड़ान भरी है.
मोदी सरकार के तीन साल में कितना डिजिटल हुआ इंडिया? पीएम मोदी (फाइल फोटो)
मुन्ज़िर अहमदनई दिल्ली, 26 May 2017

लगभग हर मंच से पीएम मोदी ने डिजिटल इंडिया के बारे में कहा. आए दिन नई स्कीम लॉन्च की गई. दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ डिजिटल इंडिया को लेकर करार किए गए. आधार जोर शोर से बनाया जा रहा है. कैशलेस इंडिया के लिए भीम ऐप जैसी महत्वकांक्षी योजनाएं शुरू की गई हैं. ऐसे ही तमाम सुधारवादी योजनाएं बनाई गई हैं. इनमें काफी तेजी भी देखी गई है. संस्थानों और अस्पतालों को डिजिटल करने की कोशिश की गई है.

ई-कॉमर्स और ई-वॉलेट को बढ़ावा दिया जा रहा है. लोगों को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के लिए कहा जा रहा है. भीम ऐप और डिजिटल वॉलेट यूज पर कैशबैक दिया जा रहा है. भीम ऐप इंस्टॉल कराने पर भी पैसे मिल रहे हैं. आधार को तमाम स्कीम के साथ जोड़ने की कवायद तेज है. देश मे सभी लोगों का आधार कार्ड बन जाए इसके लिए तेजी से काम किया जा रहा है. लेकिन इन सब में इसकी चुनौतियों को दरकिनार भी किया जा रहा है.

डिजिटल ट्रांजैक्शन में इतना हुआ इजाफा
2013-14 में 254.5 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए जबकि 2016-17 में 865.9 करोड़ डिजिटल ट्रांजैक्शन किए गए.

मोबाइल बैंकिंग लेनदेन की तादाद में पिछले तीन साल में जबरदस्त इजाफा हुआ है. डिजिटल भुगतान 2013-14 से डिजिटल लेनदेन ने ऊंची उड़ान भरी है. डिजिटल इंडिया के लिए 78,000 किमी लंबे ऑप्टिक तार बिछाए गए ग्रामीण इलाकों में बीपीओ पर जोर ने नौकरियों का सृजन किया बैंक खातों को आधार कार्ड से जोड़ा गया.

चुनौतियां ज्यादा हैं, साइबर सिक्योरिटी लचर है
सरकार लगातार देश को डिजिटल बनाने में लगी है. खास बात यह है कि लोग इसमें योगदान भी दे रहे हैं. लेकिन इन सब में कुछ चुनौतियों पर शायद ध्यान न दिया जाना भयंकर परिणाम की ओर इशारा करता है. कैशलेस इकॉनॉमी और डिजिटल इंडिया के साइड इफेक्ट्स के कई उदाहरण भी मिल गए.

पाकिस्तानी नागरिकों के भी आधार कार्ड भारत में बन गए. इतना ही नहीं लगातार लाखों लाख आधार नंबर सरकारी वेबसाइट से लीक हो गए. वेबसाइट की सुरक्षा ऐसी की कोई हैकिंग सीखने वाला छात्र इसे हैक कर ले.

एक और उदाहरण हाल ही में देखने को मिला जब कथित पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत के लगभग सभी टॉप यूनिवर्सिटी की वेबसाइट हैक कर ली. इतना ही नहीं इनमें ऐसे संस्थान शामिल रहे जो आर्मी और डिफेंस से जुड़े हैं. इसके अलावा कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्हें देखकर कहा जा सकता है कि साइबर सिक्योरिटी के मामले में सरकार फेल रही है. डिजिटल इंडिया का सपना तबतक पूरा नहीं हो सकता है जबतक साइबर सिक्योरिटी मजबूत न की जाए.

ज्यादातर सरकारी वेबसाइट बेसिक सिक्योरिटी स्टैंडर्ड यानी एचटीटीपीएस से भी सिक्योर नहीं हैं जिनके लिए महीने भर में लगभग 6 हजार रुपये लगते हैं. वेबसाइट की कमजोरी का आलम यह है कि टेलीकॉम मंत्रालयल की वेबसाइट पर रविशंकर प्रसाद के ट्विटर अकाउंट की जगह अश्लील ट्विटर अकाउंट का लिंक पेस्ट कर दिया गया.

ई-शिक्षा के लिए काफी कुछ किया जाना बाकी
ई-शिक्षा के लिए डिजिटल इंडिया का फायदा उठाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं किया गया स्वास्थ्य सेवाओं के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल पर जोर देना अभी बाकी है..

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