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देहरादून में बनेगा रोपवे, DMRC के साथ अनुबंध पर हुए हस्ताक्षर

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून अब भारत का प्रथम शहर होगा जो रोपवे  प्रणाली को अपनाएगा. वर्तमान समय तक भारत में अन्य किसी भी स्थल पर रोपवे प्रणाली को सामान्य जन परिवहन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा रहा है.

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aajtak.in
दिलीप सिंह राठौड़ देहरादून, 24 December 2019
देहरादून में बनेगा रोपवे, DMRC के साथ अनुबंध पर हुए हस्ताक्षर रोपवे प्रणाली होगी विकसित

  • दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन उत्तराखंड में बनाएगा रोपवे
  • रोपवे प्रणाली अपनाने वाला प्रथम शहर बनेगा देहरादून

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून अब भारत का प्रथम शहर होगा जो रोपवे  प्रणाली को अपनाएगा. देहरादून में सामान्य परिवहन प्रणाली के रूप में रोपवे प्रणाली स्थापित किए जाने की जानकारी देते हुए नगर विकास मंत्री मदन कौशिक ने विधानसभा सभाकक्ष में उत्तराखंड रेल परियोजना एवं दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के बीच रोपवे प्रणाली को विकसित करने के लिए अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं.

इस मौके पर उत्तराखंड मेट्रो परियोजना प्रबंध निदेशक जितेंद्र त्यागी, निदेशक उत्तराखंड रेल परियोजना वीके मिश्रा और अरविंद त्यागी, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन निदेशक बिज़नेस डेवलपमेंट एसडी शर्मा एवं दिल्ली मेट्रो रेल कॉरर्पोरेशन, उत्तराखंड मेट्रो परियोजना के अनेक उच्चाधिकारी मौजूद रहे.

उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के बीच देहरादून शहर में स्थापित रोपवे परियोजना हेतु डी.पी.आर. तैयार किए जाने के लिए अनुबंध पर एसडी शर्मा, निदेशक, बिज़नेस डेवलपमेंट, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन और बीके मिश्रा, निदेशक परियोजना, उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरर्पोरेशन नेह हस्ताक्षर किए.

DPR के रूप में पहली किश्त का भुगतान

इस अवसर पर डीपीआर की पहली किस्त के रूप में 43 लाख 30 हजार रुपये का चेक दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को दिया गया है. मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि रोपवे प्रणाली सामान्य परिवहन के रूप में स्थापित होने के बाद देहरादून में पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और ट्रैफिक जाम से निजात पाने में भी मदद मिलेगी.

भारत में वर्तमान समय में नहीं है ये सुविधा

वर्तमान समय तक भारत में अन्य किसी भी स्थल पर रोपवे प्रणाली को सामान्य जन परिवहन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा रहा है. देहरादून, भारत वर्ष का पहला शहर होगा जो इस प्रणाली को अपनाएगा.

2000 से लेकर 2200 करोड़ तक होगा खर्च

20 से 25 किलोमीटर के बीच चलने वाली रोपवे परियोजना पर लगभग 2000 से 2200  करोड़ लागत आएगी. इसकी डीपीआर 5 माह में बनकर तैयार होगी और टैंडर के बाद 18 माह से 2 साल के बीच परियोजना तैयार होगी.

इस योजना के तहत होंगे 2 रूट होंगे

इसके दो रूट होंगे, पहला एफआरआई से घंटाघर होकर रिस्पना, दूसरा आईएसबीटी से घंटाघर होकर कण्डोली, मधुबन होटल के पास. एक रोपवे की परिवहन क्षमता लगभग 10 यात्रियों की होगी. पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन के समय बताया गया कि उत्तराखंड में मेट्रो परियोजना के तहत सुविधा अनुसार देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार में अलग-अलग प्रणालियां विकसित की जाएंगी.

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