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कोरोना ने ऑटो कंपनियों की तोड़ी कमर, हर दिन 2300 करोड़ के नुकसान की आशंका

ऑटो मैन्युफैक्चरर्स कंपनियों की संस्था सियाम के मुताबिक प्लांट बंद होने से कंपनियों को रोजाना 2,300 करोड़ रुपये की आय का नुकसान होगा.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 25 March 2020
कोरोना ने ऑटो कंपनियों की तोड़ी कमर, हर दिन 2300 करोड़ के नुकसान की आशंका कंपनियों के कारखानों को बंद करने से झटका

  • कोरोना को देखते हुए सरकार ने 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया
  • ऑटो कंपनियों को हर दिन 2300 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार ने 21 दिन के लॉकडाउन का ऐलान किया है. इस वजह से ऑटो इंडस्ट्री की अधिकतर कंपनियों ने अपने प्लांट अस्थायी तौर पर बंद कर दिए हैं. ऐसे में कंपनियों को हर दिन 2300 करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जाहिर की जा रही है.

ये आशंका ऑटो मैन्युफैक्चरर्स कंपनियों की संस्था सियाम ने जताई है. सियाम के अध्यक्ष राजन वाढेरा ने कहा है, ‘‘ हमारे द्वारा लगाये गये त्वरित अनुमान के मुताबिक वाहन कंपनियों और कलपुर्जा विनिर्माताओं के कारखानों के बंद होने से प्रत्येक दिन 2,300 करोड़ रुपये के कारोबार का नुकसान होगा.’’

ये पढ़े-मुश्किल में ऑटो इंडस्‍ट्री, सरकार से मांगी मदद

बता दें कि मारुति सुजुकी इंडिया, हुंडई, होंडा, महिन्द्रा, टोयोटा किरलोस्कर मोटर, टाटा मोटर्स, कियामोटर्स और एम जी मोटर इंडिया ने अपने अपने कारखानों को अस्थाई तौर पर बंद करने की घोषणा की है.

इसके साथ ही हीरो मोटो कार्प, होंडा मोटरसाइकिल एण्ड स्कूटर्स इंडिया, टीवीएस मोटर कंपनी, बजाज आटो, यामहा और सुजुकी मोटरसाकिल जैसी दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनियों ने भी उत्पादन कार्य निलंबित किया है. इसके अलावा टायर मैन्युैक्चरर्स और अन्य प्रमुख वाहन कलपुर्जे बनानी वाली कंपनियों ने भी कारोना वायरस की वजह से अपनी गतिविधियां बंद कर दी हैं.

जेके टायर ने लिया ये फैसला

इस बीच, जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज के निदेशक मंडल के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी 25 प्रतिशत तक कम वेतन लेंगे. कंपनी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रघुपति सिंघानिया ने एक बयान में कहा, ‘‘ कोरोना वायरस संकट की वजह से मौजूदा वक्त में हम बिक्री और लाभ दोनों स्तर पर अभूतपूर्व संकट का सामना कर रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि इस मुश्किल वक्त में सहृदयता दिखाते हुए हमारा प्रबंधन और वरिष्ठ अधिकारी आगे आए हैं और उन्होंने अपना 25 प्रतिशत तक कम वेतन लेने का निर्णय किया है.

सिंघानिया ने कहा, ‘‘कंपनी के चेयरमैन और पूर्णकालिक निदेशक अपने वेतन से 25 प्रतिशत कम वेतन लेंगे जबकि वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारी भी अपने वेतन से 15 से 20 प्रतिशत कम वेतन लेंगे.’’

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