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फैक्ट चेक: क्या शिवसेना के मुखपत्र सामना का रंग भगवा से हरा हो गया?

सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों का एक कोलाज वायरल हो रहा है, जिसके साथ दावा किया जा रहा है कि 'सामना' ने अपना मास्टहेड (पहले पन्ने पर अखबार का नाम) भगवा से बदल कर हरे रंग में करके 'सेकुलर' हो गया है और अखबार ने अपनी टैगलाइन भी बदल ली है.

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aajtak.in
विद्या / साहिल जोशी मुंबई, 06 December 2019
फैक्ट चेक: क्या शिवसेना के मुखपत्र सामना का रंग भगवा से हरा हो गया? वायरल तस्वीर

पिछले कुछ हफ्तों में महाराष्ट्र की राजनीति इतने दिलचस्प बदलावों की गवाह बनी कि देश भर के लोग अपने टीवी सेट से चिपके रहे और पल-पल की खबरें लेते रहे. आखिरकार शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोंकते हुए अपने 30 साल पुरानी सहयोगी भाजपा से अलग हो गई और कांग्रेस, एनसीपी जैसी दो विरोधी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बना ली.

इस बीच सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र को लेकर फर्जी खबरों और फर्जी दावों की बाढ़ आ गई. ताजा मामला शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' को लेकर है. सोशल मीडिया पर दो तस्वीरों का एक कोलाज वायरल हो रहा है, जिसके साथ दावा किया जा रहा है कि 'सामना' ने अपना मास्टहेड (पहले पन्ने पर अखबार का नाम) भगवा से बदल कर हरे रंग में करके 'सेकुलर' हो गया है और अखबार ने अपनी टैगलाइन भी बदल ली है. पोस्ट का दावा है कि यह बदलाव उस दिन हुआ जिस दिन उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

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इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रही पोस्ट का दावा पूरी तरह गलत है. न तो सामना का मास्टहेड बदला है और न ही टैगलाइन बदली है.

क्या है दावा

फेसबुक यूजर 'Rajendraprakash Saxena' ने 'सामना' के दो संस्करणों के मास्टहेड को मिलाकर बनाई गई एक तस्वीर शेयर की है. तस्वीर में देखा जा सकता है कि ये दोनों संस्करण क्रमश: 22 नवंबर और 28 नवंबर के हैं. 22 नवंबर वाला मास्टहेड भगवा रंग का है और उसकी टैगलाइन है 'ज्वलंत हिंदुत्वाचा पुरस्कार करणारे एकमेव मराठी दैनिक'. इसका हिंदी अर्थ हुआ, 'हिंदुत्व के ज्वलंत मुद्दों को उठाने वाला एकमात्र मराठी दैनिक'.

28 नवंबर के मास्टहेड का रंग हरा है और इसकी टैगलाइन है, 'सर्वधर्म समभावाचा पुरस्कार करणारे एकमेव मराठी दैनिक'. हिंदी में इसका अर्थ हुआ, 'सर्वधर्म समभाव के मुद्दों को उठाने वाला एकमात्र मराठी दैनिक'. तस्वीर में देखा जा सकता है कि इस संस्करण की तारीख को हाथ से लिखा गया है जबकि गौर से देखने पर पता चलता है कि यह 18 नवंबर का संस्करण है.

राजेंद्रप्रकाश सक्सेना की पोस्ट में कैप्शन में लिखा गया है, 'कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन के बाद सामना सेकुलर हो गया है... भगवा से हरा रंग'. पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां  देखा जा सकता है.

फेसबुक पर इस पोस्ट को कई यूजर्स  ने शेयर किया है और व्हाट्सएप पर भी यह पोस्ट वायरल हो रही है.

AFWA की पड़ताल

हमने इंटरनेट पर सामना का ई-पेपर  सर्च किया और पाया कि इसका मास्टहेड अब भी भगवा रंग में ही है और टैगलाइन भी वही है- 'हिंदुत्व के ज्वलंत मुद्दों को उठाने वाला एकमात्र मराठी दैनिक'.

हमने 'सामना' के आर्काइव से इसका 28 नवंबर का संस्करण  और 18 नवंबर का संस्करण  निकाला और पाया कि न तो इसका मास्टहेड बदला है, न ही टैगलाइन.

'सामना' अखबार की स्थापना बाला साहेब ठाकरे ने 1988 में अपने विचारों के प्रचार प्रसार के लिए की थी. AFWA ने 'सामना' के कार्यकारी संपादक और शिवसेना सांसद संजय राउत से बात की. उन्होंने बताया, 'कुछ लोग हैं जिनके पेट में दर्द हो रहा है कि सरकार कैसे बन गई और इसलिए वे फोटोशॉप के जरिये फर्जी तस्वीरें बना रहे हैं और वायरल करा रहे हैं.'

इस तरह स्पष्ट हुआ कि शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' का मास्टहेड और टैगलाइन पहले जैसा ही है, भले ही उसने अपने विरोधियों के साथ मिलकर सरकार बना ली हो. वायरल हो रही तस्वीर फोटोशॉप के जरिये तैयार की गई है.

फैक्ट चेक
फैक्ट चेक: क्या शिवसेना के मुखपत्र सामना का रंग भगवा से हरा हो गया?
दावा कांग्रेस और शिवसेना के साथ सरकार बनाने के बाद शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' का रंग भगवा से हरा हो गया और टैगलाइन 'सेकुलर' हो गई.निष्कर्ष'सामना' का मास्टहेड और टैगलाइन अब भी पहले जैसा ही है. वायरल तस्वीर फोटोशॉप के जरिये बनाई गई है.
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