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PM Modi Cabinet 2.0: मोदी के 57 मंत्रियों की पूरी लिस्ट, जानें किसका क्या है X-फैक्टर, क्यों मिला मौका

प्रधानमंत्री का मंत्रिमंडल नया है लेकिन टीम कमोबेश पुरानी है. पीएम मोदी समेत जिन 58 मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें 38 चेहरे मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के ही हैं. बस 20 नए चेहरों पर प्रधानमंत्री मोदी ने इस बार दांव लगाया है.

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aajtak.in
देवांग दुबे गौतम नई दिल्ली, 31 May 2019
PM Modi Cabinet 2.0: मोदी के 57 मंत्रियों की पूरी लिस्ट, जानें किसका क्या है X-फैक्टर, क्यों मिला मौका शपथ लेते पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभाल ली. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री मोदी और उनके साथ 57 मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी. प्रधानमंत्री का मंत्रिमंडल नया है लेकिन टीम कमोबेश पुरानी है. पीएम मोदी समेत जिन मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें 38 चेहरे मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के ही हैं. मोदी कैबिनेट में कुल 25 मंत्री हैं. स्वतंत्र प्रभार वाले 9 मंत्रियों में 8 चेहरे पुराने हैं. वहीं राज्य मंत्रियों में सबसे ज्यादा नए चेहरे हैं . 24 राज्यमंत्रियों में 13 को पहली बार मंत्रिमंडल में जगह मिली हैं.

टीम मोदी, एक नजर-

राजनाथ सिंह ( केंद्रीय मंत्री)

भौतिकी के प्रोफेसर से देश के गृहमंत्री तक का लंबा सफर तय करने वाले राजनाथ सिंह भारतीय जनता पार्टी के ऐसे मजबूत स्तंभ हैं जिनकी पहचान कुशल प्रशासक और राजनीतिक शुचिता का सम्मान करने वाले परिपक्व नेता के रूप में होती है. राजनाथ सिंह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली. वह इससे पहले मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गृह मंत्री थे.

अमित शाह( केंद्रीय मंत्री)

शतरंज खेलने, क्रिकेट देखने एवं संगीत में गहरी रुचि रखने वाले भाजपा के ‘चाणक्य’ अमित शाह ने राज्य दर राज्य भाजपा की सफलता की गाथा लिखते हुए इस बार लोकसभा में पार्टी के सदस्यों की संख्या 303 करने में महती भूमिका निभाई है.

अमित शाह ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मंत्रिमंडल कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली. वर्तमान लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और दक्षिण भारत में पार्टी के बेहतर प्रदर्शन के लिए भाजपा अध्यक्ष शाह की सफल रणनीति को श्रेय दे रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि विचारधारा की दृढ़ता, असीमित कल्पनाशीलता और वास्तविक राजनीतिक लचीलेपन का शानदार समन्वय कर शाह ने चुनावी समर में भाजपा की शानदार जीत का मार्ग प्रशस्त किया.

नितिन गडकरी ( केंद्रीय मंत्री)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में सबसे ज्यादा कर्मठ मंत्री की पहचान बनाने वाले नितिन गडकरी एक बार फिर मोदी सरकार में मंत्री हैं. सड़क निर्माण में अगर मोदी सरकार की वाहवाही होती है तो इसका बड़ा कारण नितिन गडकरी का बुनियादी ढांचे पर किए गए काम हैं.

निर्मला सीतारमन( केंद्रीय मंत्री)

पिछली मोदी सरकार में निर्मला सीतारमन राज्य मंत्री के रूप में आई थीं लेकिन जल्द ही उनकी तरक्की हुई और वो ना सिर्फ कैबिनेट मंत्री बनीं बल्कि वो भी रक्षा मंत्री. रक्षा मंत्री के रूप में राफेल रक्षा सौदे पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हमले का संसद से सड़क तक करारा जवाब दिया. मोदी सरकार की वापसी हुई है तो निर्मला फिर से कैबिनेट मंत्री बनीं.

एस जयशंकर ( केंद्रीय मंत्री)

डिप्लोमेट से राजनेता बने एस जयशंकर पहली बार में ही सीधे कैबिनेट मंत्री बन गए हैं. डोकलाम विवाद से लेकर संयुक्त राष्ट्र में भारत की पैरवी तक एस जयशंकर की जबरदस्त भूमिका रही है. जयशंकर और नरेंद्र मोदी की जान-पहचान उनके पीएम बनने से पहले की है.

2012 में जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में चीन के दौरे पर थे उसी दौरान जयशंकर उनसे मिले थे. दोनों के बीच कुछ ऐसी बातें हुई कि मोदी जयशंकर के मुरीद हो गए. 2015 की जनवरी में विदेश सचिव की कुर्सी से सुजाता सिंह की विदाई. इसके तुरंत बाद पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की एक बैठक में एस जयशंकर को विदेश सचिव बनाने का फैसला लिया गया था. जयशंकर उन राजनयिकों में से हैं, जिन्हें चीन, अमेरिका और रूस तीनों ही मुल्कों में काम करने का अनुभव है.

स्मृति ईरानी( केंद्रीय मंत्री)

पहली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली तो उनके मंत्रियों में सबसे चौंकाने वाला नाम स्मृति ईरानी का था जो उस वक्त अमेठी में राहुल गांधी से चुनाव हारकर आईं थीं, लेकिन सरकार में ना सिर्फ वो कैबिनेट मंत्री बनीं बल्कि सीधे मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा मिला. अबकी बार तो राहुल गांधी को हराकर वो सुर्खियों के शिखर पर आ चुकी हैं और एक बार फिर कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है.

नरेंद्र तोमर( केंद्रीय मंत्री)

मध्य प्रदेश में भाजपा के प्रमुख नेता नरेन्द्र सिंह तोमर को गुरुवार को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में लगातार दूसरी दफा शामिल किया गया है. वर्ष 2014 में ग्वालियर से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद तोमर ने केन्द्र की राजनीति में लम्बा रास्ता तय कर लिया है.

वर्ष 2014 में वह ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद बने और केन्द्र सरकार में कैबिनेट स्तर के मंत्री बनाये गये. उन्होंने कैबिनेट मंत्री के तौर पर खनन, इस्पात, श्रम, रोजगार और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज जैसे मंत्रालयों का दायित्व संभाला. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मुरैना भेजा गया और यहां 1.13 लाख मतों के अंतर से विजय हासिल की.

रविशंकर प्रसाद ( केंद्रीय मंत्री)

पिछली बार जब रविशंकर प्रसाद कानून मंत्री बने तो वे राज्यसभा के सांसद थे. लेकिन इस बार पटना साहिब में शत्रुघ्न सिन्हा को खामोश करके जैसी जीत हासिल की, उसके बाद उनका मंत्री बनना तय माना जा रहा था और वही हुआ. रविशंकर प्रसाद ने मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 26 मई 2014 को संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री के रूप में नियुक्त होने के बाद से भारत के दूरसंचार क्षेत्र को पुनर्जीवित करने में अहम भूमिका निभाई.

पीयूष गोयल( केंद्रीय मंत्री)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में पीयूष गोयल की एंट्री भी राज्यमंत्री के रूप में ही हुई थी लेकिन जल्द ही उनकी तरक्की हो गई थी और वो रेल मंत्री बन गए थे. बीच में अरुण जेटली की बीमारी के साए में ये चर्चा भी तेज हो गई कि गोयल ही वित्त मंत्री बनेंगे. वित्त मंत्री तो नहीं बने लेकिन जेटली की बीमारी के दौरान बजट पेश किया था.

धर्मेंद्र प्रधान( केंद्रीय मंत्री)

धर्मेंद्र प्रधान पिछली मोदी सरकार में राज्य मंत्री के रूप में ही आए लेकिन जल्द ही उनका भी प्रमोशन हुआ और वो पेट्रोलियम मंत्री बन गए. मंत्री के रूप में इनके दौर मे शुरू किया गया उज्ज्वाल गैस कार्यक्रम गरीब तबकों को बीजेपी की तरफ खींचने में कारगर साबित हुआ. साथ ही ओडिशा में बीजेपी को मिली जीत के पीछे भी इनका बड़ा हाथ माना जाता है. तो अबकी बार फिर धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार में शामिल हो चुके हैं.

प्रकाश जावड़ेकर( केंद्रीय मंत्री)

पिछली सरकार में प्रकाश जावड़ेकर भी जूनियर मंत्री के रूप में ही आए लेकिन बीच में ही तरक्की पाकर मानव संसाधन विकास मंत्री बन गए. राज्यसभा से आने वाले जावड़ेकर की दोबारा ताजपोशी बताती है कि प्रधानमंत्री उनपर कितना भरोसा करते हैं.

अर्जुन मुंडा( केंद्रीय मंत्री)

इन्हें झारखंड में मिली शानदार जीत का इनाम मिला है. अर्जुन मुंडा प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे. अर्जुन मुंडा खूंटी लोकसभा सीट से जीतकर आए हैं. वह पहली बार केंद्रीय मंत्री बन रहे हैं. झारखंड आंदोलन से सियासी सफर शुरु करने वाले अर्जुन मुंडा के जरिए झारखंड में बीजेपी आदिवासी रुख को अपने साथ जोड़े रखना चाहती है.

रमेश पोखरियाल निशंक( केंद्रीय मंत्री)

उत्तराखंड में बीजेपी ने पांच सीटें जीती तो उसका इनाम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को मिला है. उत्तराखंड के हरिद्वार सीट से जीते निशंक के लिए मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री का द्वार खुल गया.

प्रहलाद जोशी( केंद्रीय मंत्री)

कर्नाटक के धारवाड़ सीट से लगातार चौथी बार सांसद बने प्रह्लाद जोशी आरएसएस के बेहद करीबी माने जाते हैं. कर्नाटक बीजेपी के लिए दक्षिण में विजयद्वार है. इसीलिए जोशी का कैबिनेट मंत्री के रूप में ताजपोशी चुनावी गणित को साधने वाला भी हो सकता है.

जोशी ने भगवा दल के गढ़ कहे जाने वाले धारवाड़ इलाके से चौथी बार जीत हासिल की. भाजपा की कर्नाटक इकाई के प्रदेशाध्यक्ष जोशी उस समय चर्चा में आये थे जब पार्टी ने हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने को लेकर आंदोलन चलाया था. उन्हें 1990 की शुरूआत में कश्मीर बचाओ आंदोलन से भी खासी पहचान मिली.

उन्होंने पहली बार 2004 में संसदीय चुनाव जीता और उसके बाद 2009, 2014 और 2019 में लगातार चुनाव जीतने में सफल रहे। वह भाजपा की कर्नाटक इकाई के महासचिव रहे और फिर 2013 में वह प्रदेशाध्यक्ष बने.

रामविलास पासवान( केंद्रीय मंत्री)

बीजेपी ने अपने दम पर ही बहुमत हासिल कर लिया है बावजूद इसके सहयोगियों पर भरोसा ऐसा कि रामविलास पासवान एक बार फिर कैबिनेट मंत्री बने.राम विलास पासवान ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली. पासवान को उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के कोटे से मंत्री बनाया गया है. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में राम विलास पासवान केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री थे.

सदानंद गौड़ा ( केंद्रीय मंत्री)

कर्नाटक के उडुपी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़कर छात्र नेता के रूप में राजनीति का ककहरा सीखने वाले डीवी सदानंद गौड़ा को दूसरी बार मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के तौर पर शामिल किया गया है. पेशे से वकील रहे गौड़ा अब चौथी बार संसद पहुंचे हैं.

उन्होंने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कृष्णा बायरे गौड़ा को पराजित किया. साल 2014 में गौड़ा ने बेंगलुरू उत्तर से लोकसभा चुनाव जीता. उन्हें पहले रेल मंत्रालय सौंपा गया पर छह महीने में ही उनसे यह जिम्मेदारी ले ली गई. इसके बाद उन्होंने न्याय एवं विधि मंत्री के तौर पर डेढ़ वर्ष नवम्बर 2014 से जुलाई 2016 तक कार्य किया. इसके बाद उन्हें सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय का कार्यभार दिया गया. भाजपा नेता अनंत कुमार के निधन के बाद गौड़ा को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.

हरसिमरत कौर बादल( केंद्रीय मंत्री)

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में खाद्य प्रसंस्करण मंत्री के तौर पर अपने उर्जावान तेवरों के लिये जानी जाने वाली शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली. वह किस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगी अभी इसकी घोषणा नहीं की गई है.

थावर चंद गहलोत( केंद्रीय मंत्री)

हरसिमरत कौर बादल के बाद थावर चंद गहलोत ने कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में भी थावर चंद गहलोत मंत्री रहे थे.

डॉ. हर्षवर्धन( केंद्रीय मंत्री)

विनम्रता भरा सहज व्यवहार और सादगीपूर्ण व्यक्तित्व नयी दिल्ली की चांदनी चौक लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाले डॉ हर्षवर्धन की पहचान है. उन्हें दिल्ली सरकार के साथ केन्द्र सरकार में दोबारा कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर मिला है.

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के तौर पर हर्षवर्धन ने साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे पर जोर दिया. आईआईटी कानपुर में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से साइबर सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचा के लिए इंटरडिस्पिलनरी सेंटर तैयार किया गया है. यह भारत का पहला अपने तरह का शोध केंद्र है जिसका उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को तकनीकी युक्त सुरक्षित बनाने से लेकर अनुसंधान, शिक्षा, प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप को प्रोत्साहित करना है.

मुख्तार अब्बास नकवी( केंद्रीय मंत्री)

भारतीय जनता पार्टी का अल्पसंख्यक चेहरा कहलाने वाले मुख्तार अब्बास नकवी ने गुरुवार को दूसरी बार नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री के तौर पर शपथ ली. इस बार नकवी को कैबिनेट मंत्री के तौर पर शामिल किया गया है.नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे मुख्तार अब्बास नकवी ने देश के हज कोटे को बढ़वाने में अहम योगदान दिया.

मंत्रालय के प्रयासों के फलस्वरूप सऊदी अरब ने 2019 के लिए भारत के वार्षिक हज कोटे में 25 हजार की वृद्धि की. 1998 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्यमंत्री रहे नकवी के कार्यकाल में डायरेक्ट टू होम प्रसारण व्यवस्था एवं भारतीय फिल्म क्षेत्र को उद्योग का अधिकृत दर्जा देने जैसे अहम फैसले किये गये. मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मिला.

महेंद्र नाथ पांडेय( केंद्रीय मंत्री)

उत्तर प्रदेश में बीजेपी का कमल खिलाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडे के कंधों पर भी थी. महेंद्र नाथ पांडे यूपी के पूर्वांचल से आते हैं.

यूपी में राजनीतिक समीकरण को बैलेंस बनाए रखने के लिए को ब्राह्मण चेहरे के तौर महेंद्रनाथ को पार्टी की कमान दी गई थी. 2014 के लोकसभा चुनाव मे पार्टी ने इन्हें चंदौली लोकसभा सीट से टिकट देकर मैदान में उतारा. मोदी लहर में उन्होंने बसपा के अनिल मौर्य को करीब ढाई लाख मतों से मात देकर सांसद बने और मोदी सरकार में राज्यमंत्री चुने गए थे.इस बार उन्हें कैबिनेट का जिम्मा मिला है.

अरविंद सावंत( केंद्रीय मंत्री)

अरविंद सावंत शिवसेना दक्षिण मुंबई से जीतकर सांसद बने हैं. उन्होंने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री पद की शपथ ली है. वह 1996 से 2010 के बीच दो बार विधायक चुने गए थे. 2010 में उन्हें शिवसेना के प्रवक्ता पद की जिम्मेदारी मिली थी. 68 वर्षीय सावंत ने कांग्रेस के मिलिंद देवड़ा को 1,00,067 वोट से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी. सावंत शिवसेना के साथ पार्टी के शुरुआती दिनों से जुड़े हैं.

गिरिराज सिंह( केंद्रीय मंत्री)

पीएम नरेंद्र मोदी के विश्वस्त गिरिराज सिंह के राजनीतिक करियर में पिछले एक दशक में बेहद नाटकीय ढंग से उछाल आया है. मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तभी से सिंह उनके करीबी रहे हैं. 66 वर्षीय सिंह ने इस बार लोकसभा चुनाव में बेगूसराय से भाकपा उम्मीदवार कन्हैया कुमार को चार लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया. बेगूसराय इस बार देश के उन चुनिंदा लोकसभा क्षेत्रों में शामिल था जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई थी.

सिंह बिहार के प्रभावशाली भूमिहार समुदाय से आते हैं. यह समुदाय कभी कांग्रेस का समर्थक हुआ करता था लेकिन मंडल के दौर के बाद भाजपा को राज्य में मजबूत करने लगा. 2014 में वह भाजपा के टिकट पर नवादा से चुनाव लड़े और जीत भी गए. मोदी के 2014 में सत्ता संभालने के छह महीने बाद मंत्रिमंडल विस्तार में सिंह को भी जगह दी गई. उन्हें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य मंत्री बनाया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दूसरी बार सरकार बनने पर गुरुवार को गिरिराज सिंह ने भी प्रोन्नित के साथ कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली.

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