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युवाओं का वोट चाहने वाली पार्टियां नहीं देतीं युवा नेताओं को टिकट

इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने अपनी पड़ताल में पाया कि सभी पार्टियां युवाओं को आगे करने में काफी पीछे हैं. चाहे वे सीपीआई के कन्हैया हों या भाजपा के तेजस्वी सूर्या, इस चुनाव में युवा नेताओं की आवाज़ काफी हद तक सुनने को मिली है. लेकिन इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि राजनीति में युवाओं का प्रतिनिधित्व बहुत ही मामूली है.

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aajtak.in
निखिल रामपाल नई दिल्ली, 18 May 2019
युवाओं का वोट चाहने वाली पार्टियां नहीं देतीं युवा नेताओं को टिकट राजनीतिक पार्टियों को युवा नेताओं से परहेज (फाइल फोटो- तेजस्वी सूर्या, रुपाली बिस्वास)

युवा इस देश की धड़कन हैं और मौजूदा लोकसभा चुनाव में युवा पीढ़ी ही देश में वोटों की दिशा निर्धारित करेगी. राजनीतिक पार्टियां युवाओं के वोट तो हासिल करना चाहती हैं, लेकिन वे युवा नेताओं को चुनाव में उतारने से कतराती हैं. इंडिया टुडे की डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने अपनी पड़ताल में पाया कि सभी पार्टियां युवाओं को आगे करने में काफी पीछे हैं. चाहे वे सीपीआई के कन्हैया हों या भाजपा के तेजस्वी सूर्या, इस चुनाव में युवा नेताओं की आवाज़ काफी हद तक सुनने को मिली है. लेकिन इंडिया टुडे डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि राजनीति में युवाओं का प्रतिनिधित्व बहुत ही मामूली है.

इस तथ्य तक पहुंचने के लिए हमने 2019 लोकसभा चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों की उम्र को तीन श्रेणियों में बांटा- 25-40 (युवा) 40-60 (मध्यम उम्र ) और 60 से ऊपर (वृद्ध). आंकड़ों से पता चला कि मात्र 33 प्रतिशत उम्मीदवार ही युवा थे, यानी कि 40 साल की उम्र से कम. लगभग आधे उम्मीदवार (48%) 40-60 वर्ष की श्रेणी में आए और वृद्ध लोगों का आंकड़ा लगभग 19% था.

औसत उम्र

2018 में भारत की औसत उम्र 28 वर्ष बताई गई थी. डेटा इंटेलिजेंस यूनिट ने पाया कि 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ रही पार्टियों में किसी भी बड़ी पार्टी की औसत उम्र राष्ट्रीय औसत के आस पास नहीं है. चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों की औसत उम्र 46 वर्ष है. यानी उम्मीदवारों की उम्र का औसत राष्ट्रीय औसत से 18 वर्ष ज़्यादा है. इसका मतलब यह कि इस बार चुनाव लड़ रहे आधे उम्मीदवार 46 साल से अधिक उम्र के हैं और आधे 46 साल से कम उम्र के.

बड़ी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों में केवल एक ही पार्टी इस आंकड़े से नीचे थी. शिवसेना के कुल उम्मीदवारों की औसत आय 44 साल है. वह हमारे आंकलन में सबसे युवा पार्टी के रूप में सामने आई. शिवसेना यह एकमात्र ऐसी बड़ी पार्टी है जिसकी औसत उम्र कुल उम्मीदवारों की औसत उम्र से कम है. आंध्र प्रदेश की वाईएसआर पार्टी एक मात्र ऐसी पार्टी निकली जिसकी औसत उम्र कुल उम्मीदवारों की उम्र के बराबर यानी 46 साल रही. तेलुगु देशम पार्टी, अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी की औसत उम्र 47 वर्ष है.

57 वर्ष की औसत उम्र के साथ जद(यू) हमारे आंकलन में सबसे ज़्यादा वृद्ध पाई गई. कांग्रेस पार्टी और भाजपा के उम्मीदवारों की औसत उम्र भी क्रमशः 56 और 55 वर्ष रही. बसपा के उम्मीदवारों की उम्र 53 साल रही. इन बड़ी पार्टियों की बड़ी औसत उम्र साफ़ दर्शाती है कि इन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए युवाओं को मौका नहीं दिया.

सबसे युवा पार्टी कौन?

diu2_051819010133.jpgसबसे युवा पार्टी कौन?

40 साल से कम उम्र के 45.3% युवा उम्मीदवारों के साथ, शिवसेना ने सबसे ज़्यादा युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका दिया है. शिवसेना के बाद आती है बसपा और आम आदमी पार्टी. इन दोनों पार्टियों के 29% उम्मीदवार युवा हैं. उसके बाद आती है तृणमूल कांग्रेस जिसके 26% उम्मीदवार युवा हैं. तमिलनाडु की द्रमुक के पास एक भी ऐसा उम्मीदवार नहीं जिसकी उम्र 40 साल से कम की हो.

सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली पार्टियों में द्रमुक के बाद आती है बीजेपी. बीजेपी के मात्र 8% उम्मीदवार ही 40 वर्ष से कम उम्र के हैं. कांग्रेस पार्टी का भी प्रदर्शन कुछ ज़्यादा अच्छा नहीं था. कांग्रेस ने भी केवल 12% युवाओं को ही चुनाव के टिकट दिए. हैरानी की बात यह है कि लगभग सभी बड़ी पार्टियों के पास छात्र युवा इकाइयां मौजूद हैं, लेकिन उसके बावजूद युवाओं को राजनीति में जगह नहीं मिल रही.

सबसे वृद्ध पार्टी कौन?

साठ की उम्र से ज़्यादा 52% उम्मीदवार उतारकर तेलुगु देशम पार्टी सबसे वृद्ध पार्टी साबित हुई है. टीडीपी के बाद आती है जद(यू) जहां 42% उम्मीदवार वृद्ध हैं. तृणमूल कांग्रेस के 39% उम्मीदवार साठ से ज़्यादा की उम्र से ऊपर हैं.

हैरानी की बात यह कि भाजपा और कांग्रेस के वृद्ध उम्मीदवारों की संख्या उनके युवा उम्मीदवारों से तीन गुना ज़्यादा है. जहां भाजपा के 32% उम्मीदवार वृद्ध हैं वहीं कांग्रेस के 38% उम्मीदवार वृद्ध हैं. सबसे वृद्ध उम्मीदवार तमिलनाडु की मदुरै सीट से चुनाव लड़ रहे पी अलगर हैं जिन्हें वहां की स्थानीय पार्टी दसिया मक्कल शक्ति कत्छी का टिकट मिला है.

कौन हैं पार्टियों के युवा उम्मीदवार?

नियमों के मुताबिक़ चुनाव लड़ने के लिए 25 साल का होना ज़रूरी है. डीआईयू ने ऐसे 65 उम्मीदवार पाए जिनकी उम्र 25 वर्ष है. बड़ी पार्टियों में बसपा के दो उम्मीदवार 25 की उम्र वाले हैं, गीतांजलि सिंह, दुर्ग (छत्तीसगढ़) से और निखिल केरल के त्रिशूर से. शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस के पास भी एक-एक उम्मीदवार हैं जिनकी उम्र 25 वर्ष है. 25 वर्षीय रिंकू साहनी शिवसेना की टिकट से बहराइच (उत्तर प्रदेश) से चुनाव लड़ रहे हैं वहीं तृणमूल कांग्रेस की 25 वर्षीय रूपाली बिस्वास रानाघाट (पश्चिम बंगाल) से चुनाव लड़ रही हैं.

बेंगलुरु दक्षिण से चुनाव लड़ रहे तेजस्वी सूर्या भाजपा के सबसे युवा उमीदवार हैं और हिसार से चुनाव लड़ रहे 26 वर्षीय भव्य बिश्नोई कांग्रेस के सबसे युवा उमीदवार हैं. 30 वर्षीय राघव चड्ढा, आम आदमी पार्टी के सबसे युवा उम्मीदवार हैं जो दक्षिण दिल्ली से चुनाव लड़ रहे हैं. बेगूसराय से सीपीआई के युवा उम्मीदवार कन्हैया कुमार ने सुर्खियां तो खूब बंटोरी लेकिन वे पार्टी के सबसे युवा उमीदवार नहीं हैं.

31 साल के अली अकबर के. (लक्षद्वीप) और केशकली (मध्य प्रदेश) सीपीआई की सबसे युवा उम्मीदवार हैं. द्रमुक के सबसे युवा उम्मीदवार डीएनवी सेंथिल कुमार 41 वर्ष के हैं.

राज्यों में सबसे युवा और वृद्ध कौन?

diu1_051819010035.jpgयुवाओं की भागेदारी के आंकड़े

छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुनाव लड़ने वाले ज़्यादातर उम्मीदवार 40 साल से कम उम्र के हैं. दादरा और नगर हवेली (64%), सिक्किम (55%), गोवा (50%), लक्षद्वीप(50%), और नागालैंड(50%) में आधे से ज़्यादा उम्मीदवार 40 वर्ष की उम्र से कम हैं.

बड़े राज्यों में तेलंगाना के उम्मीदवार सबसे युवा हैं. तेलंगाना के 45 प्रतिशत उम्मीदवार युवा हैं. झारखंड के 39 प्रतिशत, हरियाणा के 36 प्रतिशत और गुजरात के 38 प्रतिशत उम्मीदवार युवा हैं. नागालैंड एक ऐसा विचित्र राज्य रहा जहां युवा और वृद्ध लोगों की संख्या बराबर रही. हिमाचल प्रदेश के 35%, चंडीगढ़ के 33%, मिजोरम के 33% और त्रिपुरा के 30% उम्मीदवार वृद्ध हैं. मेघालय, सिक्किम और दादर नगर हवेली में एक भी वृद्ध उम्मीदवार नहीं है.

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