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यवतमाल- वाशिम लोकसभा सीट: शिवसेना का गढ़, कांग्रेस चाहती है वापसी

मालूम हो कि वर्ष 2009 में हुए परिसीमन के बाद यवतमाल लोकसभा सीट तीन हिस्सों में बंट गया जिसमें एक हिस्सा वाशिम जिले से जुड़ा, दूसरा चंद्रपुर जिले से तो तीसरा मराठवाड़ा के हिंगोली जिले से. दो बार वाशिम लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी गवली ने परिसीमन के बाद वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से यवतमाल जुड़ जाने के बावजूद जीत हासिल की. 2009 के लोकसभा चुनाव में भावना गवली ने कांग्रेस के दमदार प्रत्याशी हरिभाऊ राठोड को 53 हजार वोटों से हराया.

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aajtak.in
आदित्य बिड़वई नई दिल्ली, 05 March 2019
यवतमाल- वाशिम लोकसभा सीट: शिवसेना का गढ़, कांग्रेस चाहती है वापसी यवतमाल- वाशिम लोकसभा सीट.

महाराष्ट्र की यवतमाल- वाशिम लोकसभा सीट पर शिवसेना का कब्ज़ा है. यहां भावना गवली सांसद हैं. यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से चुनी गईं भावना गवली यवतमाल जिले की एकमात्र महिला सांसद हैं और वो लगातार चार बार चुनाव जीत चुकी हैं, दो बार वाशिम लोकसभा सीट से तो दो बार यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से. इस बार भी भाजपा-सेना उन्हें मैदान में दोबारा उतार सकती है.

मालूम हो कि वर्ष 2009 में हुए परिसीमन के बाद यवतमाल लोकसभा सीट तीन हिस्सों में बंट गया जिसमें एक हिस्सा वाशिम जिले से जुड़ा, दूसरा चंद्रपुर जिले से तो तीसरा मराठवाड़ा के हिंगोली जिले से.

दो बार वाशिम लोकसभा सीट से सांसद रह चुकी गवली ने परिसीमन के बाद वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से यवतमाल जुड़ जाने के बावजूद जीत हासिल की. 2009 के लोकसभा चुनाव में भावना गवली ने कांग्रेस के दमदार प्रत्याशी हरिभाऊ राठोड को 53 हजार वोटों से हराया.

क्या रहा है यवतमाल लोकसभा सीट का इतिहास...

यवतमाल लोकसभा सीट का इतिहास देखा जाए तो यह कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है. लेकिन आज तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसी को स्थान नहीं मिला. आंकड़ों पर नजर डाले तो 1952 में यवतमाल लोकसभा सीट से पहले सांसद रहे सहदेव भारती 1952 में सबसे पहले चुनाव जीतकर संसद पहुंचे. उनके बाद 1957 में डी.वाई.गोहोकार (कांग्रेस), 1962-1967 में देवराव पाटिल (कांग्रेस), 1971 में सदाशिव ठाकरे (कांग्रेस), 1977 में श्रीधरराव जावड़े चुनाव जीते. इसके बाद उत्तमदादा पाटिल (1980 से 1991) तक कांग्रेस की टिकट पर लगातार जीतकर लोकसभा पहुंचे.

जब टूटा कांग्रेस के जीत का रिकॉर्ड...

यवतमाल लोकसभा सीट पर सबसे पहले बीजेपी को जीत राजाभाऊ ठाकरे ने दिलवाई. वो 1996 में चुनकर आए. लेकिन अगले ही चुनाव में दोबारा 1998-1999 में उत्तमदादा पाटील ने जीत दर्ज की. फिर 2004 में यहां हरिसिंह राठौड़ ने कांग्रेस को वापस जीत दिलाई.  

वाशिम लोकसभा का क्या रहा है हाल...

यहां 1977 में पहला लोकसभा चुनाव हुआ. वसंतराव नाईक कांग्रेस की टिकट पर सांसद बने. उनके बाद 1980 और 1984 में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, 1989-1991 में कांग्रेस के देशमुख अनंत राव, 1996 में पुंडलिकर राव शिवसेना से, 1998 में कांग्रेस के सुधाकर राव नाईक, फिर 1999 और 2004 में शिवसेना की टिकट पर भावना गवली चुनाव जीती.    

क्या है विधानसभा सीटों की स्थिति...

यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा सीट आती है. इनमें यवतमाल, वाशिम, कारंजा, रालेगांव में बीजेपी का कब्जा है. जबकि दिग्रस में शिवसेना, पुसद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कब्जा है.

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