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इस राज्य में वोटरों ने खूब दबाया नोटा, कम पड़ गए 3 दलों के कुल वोट

2019 के लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में लाखों की संख्या में मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाकर उम्मीदवारों को खारिज कर दिया. बिहार और राजस्थान में सर्वाधिक वोटर्स ने नोटा विकल्प चुना.

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aajtak.in [Edited By: नवनीत मिश्र]नई दिल्ली, 25 May 2019
इस राज्य में वोटरों ने खूब दबाया नोटा, कम पड़ गए 3 दलों के कुल वोट सांकेतिक तस्वीर.

2019 के लोकसभा चुनावों में सबसे ज्यादा नोटा का बदन दबाने का बिहार की जनता ने  रिकॉर्ड बनाया. बिहार के 8.17 लाख मतदाताओं ने नोटा के जरिए अपने उम्मीदवारों को खारिज कर दिया. वहीं राजस्थान में 3.27 लाख मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. राजस्थान में तो नोटा का बटन इतना दबा कि उसका आंकड़ा भाकपा, माकपा, और बसपा के उम्मीदवारों को मिले कुल वोटों से भी ज्यादा रहा.

पिछले लोकसभा चुनावों में भी करीब इतने ही  327902 वोटर्स ने नोटा का प्रयोग किया था. इस बार राज्य के 3 लाख 27 हजार 559 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया. वोटों का यह आंकड़ा राज्य की 25 लोकसभा सीटों में डाले गए कुल मतों के 1.01 प्रतिशत के बराबर है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर हुए कुल पोलिंग में 2 प्रतिशत लोगों ने नोटा का चयन किया. दमन और दीव में 1.7 फीसदी, आंध्र प्रदेश में 1.49 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 1.44 फीसदी मतदाताओं ने नोटा को चुना.

पंजाब के 1.54 लाख से अधिक वोटर्स ने नोटा का बटन दबाया. राज्य में कांग्रेस ने आम चुनाव में 13 लोकसभा सीटों में से 8 जीतकर शानदार जीत दर्ज की है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 1,54,423 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया. यह कुल पड़े मतों का 1.12 प्रतिशत है.13 लोकसभा सीटों में से फरीदकोट सीट पर सबसे ज्यादा वोटर्स ने कैंडीडेट को खारिज किया. फरीदकोट में कुल 19,246 वोटर्स ने नोटा का प्रयोग किया.

दिल्ली में 45,000 से अधिक वोटर्स ने नोटा का इस्तेमाल कर उम्मीदवारों को खारिज किया, यह आंकड़ा  2014 में नोटा के मतों से 6,200 अधिक है. उत्तरी पश्चिम (आरक्षित) सीट पर सर्वाधिक 10,210 लोगों ने नोटा वाली बटन दबाई.हरियाणा के लोकसभा चुनाव में 41,000 से अधिक लोगों ने नोटा का विकल्प चुना, जहां भाजपा ने सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है.

इसी तरह हरियाणा में हुई कुल पोलिंग में से 0.68 प्रतिशत लोगों ने इस विकल्प को चुना. अंबाला में सर्वाधिक 7,943 और भिवानी-महेन्दरगढ़ में सबसे कम 2041 लोगों ने नोटा का इस्तेमाल किया. हिमाचल प्रदेश में 33 हजार से अधिक वोटर्स ने नोटा का इस्तेमाल किया.चुनाव अधिकारी ने बताया कि राज्य में कम से कम 33,008 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. इस लिहाज से राज्य में कुल पड़े 38,01,793 मतों का 0.87 प्रतिशत नोटा के हिस्से में गया है.

उत्तर कश्मीर की बारामूला संसदीय सीट पर कुल 7999 मतदाताओं ने नोटा का विकल्प चुना. इस सीट पर कुल मतदान के 1.79 फीसदी मत नोटा को मिले हैं. उन्होंने बताया कि चुनाव लड़ने वाले नौ में से चार उम्मीदवारों को नोटा से कम वोट मिले हैं.

मध्य प्रदेश में 3,40,984 वोटर्स ने नोटा का इस्तेमाल किया. वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में 3,91,837 मतदाताओं ने नोटा का प्रयोग किया था. मध्य प्रदेश में नोटा चौथे नंबर पर रहा. इससे अधिक प्रतिशत मत केवल बीजेपी, कांग्रेस और बसपा को मिले. सपा एवं अन्य छोटे-छोटे दलों को नोटा से भी कम वोट प्रतिशत हासिल हुए. सपा को एमपी में कुल 82,662 मत मिले.

छत्तीसगढ़ में 2 लाख मतदाताओं ने सभी उम्मीदवारों को खारिज करते हुए नोटा को वोट दिया है. राज्य में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित बस्तर लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया है.इसी तरह महाराष्ट्र में भी नोटा का वोट बढ़ा है. राज्य में 4,86,902 वोटरों ने नोटा दबाया, वहीं 2014 के चुनावों में 4,83,459 मतदाताओं ने इसका इस्तेमाल किया था.

कब मिला था नोटा का विकल्प

देश में उम्मीदवारों की सूची में 2013 से नोटा का विकल्प दिया गया. यह पहल सुप्रीम कोर्ट की पहल पर हुई. इससे वोटर्स  को सभी उम्मीदवारों को खारिज करने का विकल्प मिला. 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बारृनोटा की शुरुआत हुई. करीब 60 लाख मतदाताओं ने नोटा के विकल्प को चुना था. जो कि चुनाव में हुई कुल पोलिंग का 1.1 प्रतिशत था.

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