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सुप्रीम कोर्ट पहुंची वाराणसी की लड़ाई, नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर यादव ने लगाई याचिका

तेज बहादुर ने वाराणसी सीट से पहले निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया और हलफनामे में बताया कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप के चलते बीएसएफ से निकाला गया. लेकिन बाद में सपा का टिकट मिलने पर जब तेज बहादुर ने दूसरा हलफनामा दायर किया तो यह जानकारी नहीं दी. इसी ही आधार मानते हुए निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर का नामांकन रद्द कर दिया.

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aajtak.in
संजय शर्मा नई दिल्ली, 06 May 2019
सुप्रीम कोर्ट पहुंची वाराणसी की लड़ाई, नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर यादव ने लगाई याचिका तेज बहादुर यादव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से समाजवादी पार्टी के टिकट पर नामांकन रद्द होने के बाद तेज बहादुर यादव ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बीएसएफ के पूर्व जवान तेज बहादुर यादव पर जानकारी छिपाने के आरोप में कार्रवाई करते हुए निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया था, उसी फैसले के खिलाफ तेज बहादुर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है.

तेज बहादुर यादव ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में सेवा देते हुए वहां के खाने पर सवाल उठाए थे और सेना की व्यवस्था को सार्वजनिक तौर पर चुनौती दी थी. तेज बहादुर का यह खुलासा पूरे देश में चर्चा का विषय बना और मामला कोर्ट तक पहुंचा. अंतत: तेज बहादुर को बीएसएफ से बर्खास्त कर दिया गया.

बीएसएफ से बर्खास्तगी का कारण छिपाना ही तेज बहादुर यादव की उम्मीदवारी पर भारी पड़ गया. दरअसल, तेज बहादुर ने पहले वाराणसी सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पीएम मोदी के खिलाफ नामांकन किया था और हलफनामे में बताया था कि उन पर भ्रष्टाचार के आरोप के चलते बीएसएफ से निकाला गया.

इसके बाद समाजवादी पार्टी ने बड़ा फैसला लिया और वाराणसी से अपनी प्रत्याशी शालिनी यादव का नाम वापस लेकर तेज बहादुर को प्रत्याशी बना दिया. तेज बहादुर ने दोबारा नामांकन किया और इस बार जो हलफनामा वाराणसी निर्वाचन अधिकारी को दिया उसमें बीएसएफ से निकाले जाने की जानकारी नहीं दी.

इसे आधार मानते हुए वाराणसी निर्वाचन अधिकारी ने तेज बहादुर यादव को नोटिस भेजकर एक तय समयसीमा के अंदर जवाब देने के लिए कहा और जवाब न मिलने पर नामांकन रद्द कर दिया गया. हालांकि, तेज बहादुर ने सबूत मुहैया कराने का दावा करते हुए आयोग पर तानाशाही रवैये का आरोप लगया. तेज बहादुर यादव के वकील ने भी यही बताया कि हमने सभी सबूत दिए, लेकिन बावजूद इसके हमारा नामांकन रद्द कर दिया गया. हालांकि, आयोग से तेज बहादुर को कोई राहत नहीं मिली, जिसके बाद अब तेज बहादुर ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.

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