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मोदी ने लिया काल भैरव का आशीर्वाद, जानिए क्यों कहते हैं इन्हें काशी का कोतवाल

वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इससे पहले मोदी ने काल भैरव की पूजा की, जिन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है.

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aajtak.in
aajtak.in वाराणसी, 26 April 2019
मोदी ने लिया काल भैरव का आशीर्वाद, जानिए क्यों कहते हैं इन्हें काशी का कोतवाल PM मोदी काल भैरव की पूजा करेंगे

वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थोड़ी देर में अपना नामांकन दाखिल करेंगे. इससे पहले मोदी ने काल भैरव की पूजा की, जिन्हें काशी का कोतवाल कहा जाता है. मान्यता है कि काशी में इन्हें स्वयं महादेव ने नियुक्त किया था. काशी में रहने के लिए हर व्यक्ति को बाबा भैरव की अनुमति लेनी पड़ती है.

पीएम मोदी जब भी अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी जाते हैं तो वह काल भैरव की पूजा जरूर करते हैं. ऐसा माना गया है कि वाराणसी में रहना है तो काशी के कोतवाल का दर्शन करना जरूरी है. ये ऐसे देवता हैं जिन्हें सब पसंद है. चाहे वह टॉफी, बिस्किट, मिठाई या दारू से लेकर गांजा भांग. आज भी ये काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं. इनका दर्शन किए बगैर विश्वनाथ का दर्शन अधूरा रहता है.

कैसे बाबा भैरव बने काशी के कोतवाल

कथाओं के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी में श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ जिसके बाद सभी भगवान शिव के पास गए. कुछ बातों को लेकर ब्रह्मा जी, भगवान शिव को अपशब्द कहने लगे जिसके बाद भगवान शिव को गुस्सा आ गया. भगवान शिव के गुस्से से ही काल भैरव जी प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्मा जी का सिर काट दिया था.

इसके बाद ब्रह्मा जी चतुर्मुख हो गये थे. काल भैरव को ब्रह्म हत्या दोष लग गया. भगवान शिव ने भैरव से काशी में प्रस्थान करने को कहा. जहां भैरव को ब्रह्म हत्या से मुक्ति मिली. रूद्र ने इन्हें काशी का कोतवाल नियुक्त किया. आज भी ये काशी के कोतवाल के रूप में पूजे जाते हैं.

कहा जाता है कि बाबा विश्वनाथ काशी के राजा हैं और काल भैरव उनके कोतवाल, जो लोगों को आशीर्वाद भी देते हैं और सजा भी. यमराज को भी यहां के इंसानों को दंड देने का अधिकार नहीं है. उनके मुताबिक, काल भैरव के दर्शन मात्र से शनि की साढ़े साती, अढ़ैया और शनि दंड से बचा जा सकता है.

शहर के रक्षक हैं बाबा काल भैरव

वाराणसी के कोतावली पुलिस थाने में एसएचओ की कुर्सी पर बाबा काल भैरव विराजते हैं. अफसर बगल में कुर्सी लगाकर बैठते हैं. कहा जाता है कि ये परंपरा सालों से चली आ रही है. यहां कोई भी थानेदार जब पोस्टिंग होकर आया, तो वो अपनी कुर्सी पर नहीं बैठा. कोतवाल की कुर्सी पर हमेशा काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव विराजते हैं. वो शहर के रक्षक हैं. शहर में बिना काल भैरव की इजाजत के कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता.

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