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मोदी की नई कैबिनेट में पहली बार केंद्रीय मंत्री बन सकते हैं ये सांसद

जिन कद्दावर सांसदों को पिछली बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी, उनमें से कुछ को इस बार मौका मिल सकता है. वहीं जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिहाज से कुछ नए सांसदों को जूनियर होने पर भी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 28 May 2019
मोदी की नई कैबिनेट में पहली बार केंद्रीय मंत्री बन सकते हैं ये सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

2019 लोकसभा चुनाव में जीतकर लोकसभा पहुंचे कुछ सांसदों को पहली बार मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. इनमें कुछ दो से तीन बार के सांसद हैं तो कुछ ऐसे भी सांसद हैं जो पहली बार जीतकर पहुंचे हैं. जिन कद्दावर सांसदों को पिछली बार मोदी के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली थी, उनमें से कुछ को इस बार मौका मिलने की संभावना जताई जा रही. वहीं जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिहाज से कुछ नए सांसदों को जूनियर होने पर भी मंत्रिमंडल में मौका मिल सकता है.

पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने वालों की बात करें बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी इस श्रेणी में हैं. वह गांधीनगर सीट से पहली बार जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं. हालांकि शाह इससे पहले राज्यसभा के लिए भी चुने जा चुके हैं. माना जा रहा है कि अब तक संगठन देख रहे अमित शाह इस बार मोदी कैबिनेट में मजबूत भूमिका के साथ नजर आ सकते हैं. यूपी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी पहली बार इलाहाबाद से जीतकर लोकसभा पहुंची हैं.

देवरिया से इस बार रमापति राम त्रिपाठी 2.46 लाख वोटों से जीते हैं. रमापति राम त्रिपाठी को जूताकांड से सुर्खियों में आए उनके बेटे शरद त्रिपाठी का टिकट कटने पर बीजेपी ने चुनाव मैदान में उतारा था. भले ही रमापति राम त्रिपाठी पहली बार सांसद बने हैं, मगर वरिष्ठता को देखते हुए उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है. वह पूर्व में यूपी बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. यह तय माना जा रहा है कि एनडीए को सबसे ज्यादा 64 सांसद देने वाले यूपी को ज्यादा संख्या में केंद्रीय मंत्री मिलेंगे.

ये भी दावेदार

तीन बार के सांसद वरुण गांधी को इस बार उनकी मां मेनका गांधी पर तरजीह दी जा सकती है. एटा से राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह फिर से सांसद बने हैं, जातीय प्रतिनिधित्व के लिहाज से राजवीर सिंह को मौका मिल सकता है. इसी तरह तीन बार के सांसद गोंडा के कीर्तिवर्धन सिंह, बलिया के वीरेंद्र सिंह मस्त, फैजाबाद के लल्लू सिंह, डुमरियागंज से जगदंबिका पाल दावेदारी में हैं. आगरा सुरक्षित लोकसभा सीट से 2.11 लाख वोटों से जीते  प्रो. एसपी सिंह बघेल भी रेस में हैं.

अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल को कन्नौज में पराजित करने वाले सुब्रत पाठक को भी इनाम मिल सकता है. धर्मेंद्र यादव को बदायूं में हराने वाली यूपी सरकार में मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य के चेहरे पर भी विचार हो सकता है.

दिल्ली के बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी को लेकर भी कयास तेज हैं. उनके प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए नगर निगम और अब लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी के अच्छे प्रदर्शन का इनाम मिल सकता है. दिल्ली से ही पहली बार चुनाव जीतने वाले क्रिकेटर गौतम गंभीर, गायक हंसराज हंस भी रेस में हैं. यूपी के सीएम आदित्यनाथ की हॉट सीट गोरखपुर से जीते रवि किशन, बेंगलुरु साउथ से 28 साल की उम्र में जीते तेजस्वी सूर्या को भी मौका मिल सकता है.

पश्चिम बंगाल से ये बन सकते हैं मंत्री

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी ने 18 सीटे जीतीं हैं. 2014 में सिर्फ दो सीटें मिली थीं. यहां 2021 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में पार्टी यहां दो से तीन सांसदों को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है. पिछली बार आसनसोल से जीते बाबुल सुप्रियो मंत्री बने थे. उनके अलावा इस बार बैरकपुर से जीते अर्जुन सिंह कैबिनेट में नजर आ सकते हैं. अर्जुन पहले टीएमसी में विधायक थे. मेदिनीपुर से जीते बीजेपी नेता दिलीप घोष के नाम की भी चर्चा जोरों पर है.

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