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कटिहार में कांग्रेस के सहारे राजनीतिक गुरु की विरासत बचाने उतरे तारिक अनवर

तारिक अनवर 1976 में इंदिरा गांधी कांग्रेस के बिहार यूथ ब्रिगेड के अध्यक्ष बने. 1981 तक वो इस पद पर रहे. इसके बाद 1982 से 1985 तक ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. 1988 से 1989 तक तारिक अनवर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. इस बीच वो लोकसभा चुनाव भी लड़ते रहे. तारिक अनवर अब तक 5 बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं.

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जावेद अख़्तरनई दिल्ली, 15 April 2019
कटिहार में कांग्रेस के सहारे राजनीतिक गुरु की विरासत बचाने उतरे तारिक अनवर बिहार की कटिहार सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं तारिक अनवर

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे सीताराम केसरी को राजनीतिक आदर्श मानकर सियासी सफर शुरू करने वाले बिहार के मशहूर नेता तारिक अनवर एक बार फिर कटिहार में अपने राजनीतिक गुरु की विरासत संभालने के लिए तैयार हैं. दिलचस्प बात ये है कि तारिक अनवर ने घर वापसी करते हुए कांग्रेस के टिकट पर बाजी लड़ने का फैसला किया है. कटिहार सीट से कुल 5 बार सांसद बन चुके तारिक अनवर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़कर कांग्रेस के साथ चुनावी मैदान में उतर गए हैं. हालांकि, कांग्रेस से उनका नाता सबसे पुराना है.

बिहार की राजधानी पटना में 16 जनवरी 1951 को जन्म लेने वाले तारिक अनवर कम उम्र में राजनीति के मैदान में उतर गए थे. वो शुरुआती दिनों से ही कांग्रेस की राजनीति करने लगे थे. महज 25 साल की उम्र में तारिक अनवर बिहार प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए थे. ये वो वक्त था जब पूरे देश में इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस के खिलाफ तमाम सियासी सूरमा एकजुट हो गए थे और देश को आपातकाल का सामना करना पड़ा था.

बिहार में जगन्नाथ मिश्र और सीताराम केसरी की लड़ाई ने तारिक अनवर को बड़ा मौका दिया. दोनों दिग्गजों के बीच तारिक अनवर ने सीताराम केसरी का साथ दिया और दिल्ली में जब कांग्रेस (इंदिरा) का गठन हुआ तो सीताराम केसरी को कोषाध्यक्ष बनाया गया. यहीं से तारिक अनवर के सियासी सफर को परवाज मिला.

हालांकि, इससे पहले उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया. तारिक अनवर के घर में उनकी पत्नी हिना, चार बेटी और एक बेटा है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर पत्रकार की. तारिक अनवर ने पटना से हिंदी में साप्ताहिक टैबलॉयड अखबार निकाला, जो 1972 से 1974 तक चला. इसके बाद वो 1974 से 1982 तक 'युवक धारा' के संपादक रहे.

tariq-anwar-family_041519045035.jpgपरिवार के साथ तारिक अनवर

सियासी सफर

तारिक अनवर 1976 में इंदिरा गांधी कांग्रेस के बिहार यूथ ब्रिगेड के अध्यक्ष बने. 1981 तक वो इस पद पर रहे. इसके बाद 1982 से 1985 तक ऑल इंडिया यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. 1988 से 1989 तक तारिक अनवर बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. इस बीच वो लोकसभा चुनाव भी लड़ते रहे.

तारिक अनवर ने पहला लोकसभा चुनाव 1985 में कटिहार सीट से ही जीता. इसके बाद वो यहीं से 1987-1988 तक सांसद रहे. 1996 और 1998 में फिर वो कटिहार सीट से सांसद निर्वाचित हुए.

1999 में तारिक अनवर ने बड़ा फैसला किया और कांग्रेस पार्टी का साथ छोड़ दिया. तारिक अनवर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हो गए. उन्हें एनसीपी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद वो 2004 में राज्यसभा भेजे गए. 2009 में उन्होंने एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए. हालांकि, 2014 में पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद तारिक अनवरने कटिहार सीट से एनसीपी के टिकट से जीतने में सफल रहे. 

तारिक अनवर ने की घर वापसी

सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर 1999 में कांग्रेस से बगावत कर एनसीपी प्रमुख शरद पवार के साथ मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी  (एनसीपी) का गठन करने वाले तारिक अनवर ने अक्टूबर 2018 में घर वापसी की और राहुल गांधी ने उनका कांग्रेस में स्वागत किया.  तारिक अनवर ने राफेल मुद्दे पर शरद पवार के बयान को आधार बनाते हुए एनसीपी से इस्तीफा दिया था. उन्होंने कहा था कि राफेल पर एनसीपी ने जो रुख जाहिर किया है, वो सही नहीं है. इस तरह एनसीपी का साथ छोड़ने के बाद अब तारिक अनवर फिर कटिहार सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से उनके राजनीतिक गुरु सीताराम केसरी ने 1967 में कांग्रेस के टिकट बाजी मारी थी. अब तारिक अनवर का मुकाबला जनता दल (युनाइटेड) के दुलाल चंद्र गोस्वामी से हैं. जबकि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के टिकट पर इस बार मुहम्मद शकूर चुनाव लड़ रहे हैं.

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