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...यूं बदला था BJP ने उत्तर प्रदेश में 'राजनीति' के खेल का नियम!

2014 लोकसभा चुनाव में अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी और सुनील बंसल सह प्रभारी बने, तब से अब तक भारतीय जनता पार्टी दो लोकसभा और एक विधानसभा का चुनाव जीत चुकी है.

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aajtak.in
कुमार अभिषेक लखनऊ, 25 May 2019
...यूं बदला था BJP ने उत्तर प्रदेश में  'राजनीति' के खेल का नियम! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी- अमित शाह

उत्तर प्रदेश की राजनीति की पिच पर महागठबंधन अगर फेल हुआ तो इसके पीछे की वजह वह गेम प्लान है जो पिछले डेढ़ सालों में बीजेपी ने बहुत ही सधे अंदाज में बनाया. इस जीत के पीछे की प्लानिंग लखनऊ में बीजेपी के मुख्यालय में हुई, जिसे बीजेपी का कंट्रोल रूम भी कहा जाता है. 2014 लोकसभा चुनाव में अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी और सुनील बंसल सह प्रभारी बने, तब से अबतक पार्टी दो लोकसभा और एक विधानसभा का चुनाव जीत चुकी है.

'आजतक' से खास बातचीत में संगठन महामंत्री सुनील बंसल ने कहा कि हमने 2019 के चुनाव के लिए अपने कार्यकर्ताओं को उन तीन करोड़ 35 लाख लाभार्थियों से जोड़ा जिन्हें प्रधानमंत्री की योजनाओं का सीधा लाभ मिला, यह काम हमारे लिए भगीरथ प्रयास जैसा था. उन्होंने बताया कि 80 सीटों पर 35 चेहरों को बदलकर बीजेपी ने नाराजगी रोक ली. कई सीटों पर कैंडिडेट बदले गए, जबकि कई उम्मीदवारों के सीट बदल दिए गए जिससे उम्मीदवारों के खिलाफ नाराजगी का मामला लगभग खत्म हो गया.

सुनील बंसल ने बताया कि चुनाव के 3 महीने पहले तक बीजेपी ने अपने 16 हजार कार्यकर्ताओं को पूरे प्रदेश के अलग-अलग कमेटियों, निगमों, बोर्ड और दूसरे सरकारी संस्थाओं में नॉमिनेट कर दिया, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच की नाराजगी खत्म हुई और वह जोश से काम में जुट गए. उम्मीदवारों के चुनाव के पहले करीब आधे दर्जन बार जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक कई बार रायशुमारी की गई और तब जाकर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हुआ.

उन्होंने कहा कि मार्च से लेकर 17 मई तक कुल 697 सभाएं हुईं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, सीएम योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह के साथ-साथ सहयोगी दलों के नेताओं और मंत्रियों की सभाएं थीं. चुनाव शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में 13 बड़ी सभाएं कर माहौल तैयार कर चुके थे.

बंसल ने कहा कि यह बहुत पहले तय हो गया था कि हमें जाति और धर्म के महागठबंधन की राजनीति के ट्रैप में नहीं आना है और हमें जातिविहीन लड़ाई के लिए राष्ट्रवाद और विकासवाद की पिच तैयार करनी है, क्योंकि अगर हम जाति और समीकरण की बात करते तो हम इस गठबंधन को नहीं हरा सकते थे, इसलिए हमें महागठबंधन को हमारी पिच पर लाना था और हम इसमें कामयाब रहे.

उन्होंने कहा कि बीजेपी को यह मालूम था कि इस बार तो पीएम मोदी के नाम पर pro-incumbency है और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी कोई नाराजगी नहीं, ऐसे में महागठबंधन के वंशवाद और भ्रष्टाचार पर चोट करने के साथ-साथ राष्ट्रवाद और संगठन को हथियार बनाना था, जिसे पार्टी ने बखूबी किया.

सुनील बंसल ने बातचीत में बताया कि एक बार ग्राउंड वर्क तैयार होने के बाद 53 सीटों पर हम महागठबंधन से आगे थे और हमारी लड़ाई 27 सीटों पर सिमट रही थी जो बेहद ही कड़ी थी और जहां जीतना बहुत मुश्किल था, लेकिन ग्राउंड पर मोदी लहर, लोगों में मोदी को लाने की हसरत और कार्यकर्ताओं के जोश ने इन 27 सीटों पर भी हमें लड़ाई में खड़ा किया और हम इसमें 11 सीटें जीत गए.

उन्होंने कहा कि बीजेपी की छह लोगों की टीम रोज आपस में बातकर फीक बैक देती थी. इस टीम में सीएम योगी आदित्यनाथ, प्रभारी जेपी नड्डा, संगठन मंत्री सुनील बंसल,उप मुख्यमंत्री केशव मौर्य और दिनेश शर्मा शामिल थे. पीएम की योजनाओं ने मास्टर स्ट्रोक का काम किया उसमें उज्जवल, शौचालय, पीएम आवास, किसानों को लेकर ऋृण माफी किसानों के खाते में पैसा आना और लॉ एंड ऑर्डर की बड़ी भूमिका थी.

बीजेपी के प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने कहा कि संगठन के निर्देश बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए ईश्वर के आदेश समान थे, जिसे सभी ने अक्षरशः माना तभी हम इस बड़ी चुनौती को जीत पाए. बीजेपी के इन कार्यक्रमों और चुनावी रणनीति का गठबंधन के पास कोई जबाब नहीं था.

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