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Sitapur Election Result: भाजपा के राजेश वर्मा जीते, बसपा के नकुल दुबे को शिकस्त दी

Lok Sabha Chunav Sitapur Result 2019: भाजपा उम्मीदवार मौजूदा सांसद राजेश वर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी गठबंधन प्रत्याशी बसपा के नकुल दुबे को 100833 मतों से शिकस्त दी.

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aajtak.in
वरुण शैलेश नई दिल्ली, 24 May 2019
Sitapur Election Result: भाजपा के राजेश वर्मा जीते, बसपा के नकुल दुबे को शिकस्त दी Lok Sabha Chunav Sitapur Result 2019

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की सीतापुर सीट से भाजपा उम्मीदवार मौजूदा सांसद राजेश वर्मा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी गठबंधन प्रत्याशी बसपा के नकुल दुबे को 100833 मतों से शिकस्त दी है. इस सीट पर बसपा, बीजेपी और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला दिखा.

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कब  और  कितनी  हुई  वोटिंग

सीतापुर  सीट  पर वोटिंग पांचवें चरण में 6 मई  को  हुई  थी,  इस सीट पर 63.80  फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार  का  इस्तेमाल  किया  था. इस सीट पर कुल 1665745 मतदाता हैं, जिसमें से 1060712 मतदाताओं ने अपने वोट डाले हैं.

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प्रमुख  उम्मीदवार

सामान्य वर्ग वाली इस सीट पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी राजेश वर्मा चुनाव लड़ रहे थे, जिनका मुख्य मुकाबला बसपा से नकुल दूबे से था. कांग्रेस से कौसर जहां सहित इस सीट पर कुल 12 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे था.

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2014 का चुनाव

2014 के लोकसभा चुनाव में सीतापुर सीट पर 66.25 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी की राजेश वर्मा 40.66 फीसदी (4,17,546) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बसपा प्रत्याशी कैसर जहां को 35.69 फीसदी (2,34,682)  मिले थे. इसके अलावा सपा के भारत त्रिपाठी को महज 15.21 फीसदी (1,56,170) वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी की राजेश वर्मा ने 51,027 मतों से जीत दर्ज की थी.

सीतापुर का इतिहास

1952 के चुनाव से ही सीतापुर लोकसभा सीट चर्चा का विषय रही है. 1952 और 1957 के चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की ओर से उमा नेहरू ने चुनाव जीता था. उमा नेहरू रिश्ते में पंडित जवाहर लाल नेहरू की भाभी थीं, उन्होंने जवाहर लाल नेहरू के चचेरे भाई श्यामलाल से शादी की थी. हालांकि 1962 और 1967 के चुनाव में भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की थी. लेकिन 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने जीत के साथ यहां वापसी की.

आपातकाल के बाद 1977 में जब चुनाव हुए तो कांग्रेस को यहां मुंह की खानी पड़ी. 1977 में भारतीय लोकदल यहां से चुनाव जीता. लेकिन 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस ने जीत का हैट्रिक लगाई. 1990 में जब देशभर में मंदिर आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी तो बीजेपी की भी किस्मत जागी.

1991 का चुनाव यहां से भारतीय जनता पार्टी ने अपने नाम किया. 1996 में समाजवादी पार्टी और 1998 में बीजेपी यहां से चुनाव जीती. 1999 से लेकर 2009 तक बहुजन समाज पार्टी ने लगातार तीन बार चुनाव जीता. लेकिन 2014 का चुनाव मोदी लहर के दम पर बीजेपी के खाते में ये सीट गई.

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