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एयर स्ट्राइक के जोश में भूल रहे हैं किसानों की खुदकुशी का मुद्दा : शिवसेना

संपादकीय के मुताबिक नांदेड़ में सिर्फ दो महीनों में 18 किसानों ने खुदकुशी की. 350 तहसीलों में से 180 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 06 March 2019
एयर स्ट्राइक के जोश में भूल रहे हैं किसानों की खुदकुशी का मुद्दा : शिवसेना शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (PTI)

बीजेपी से गठबंधन के एलान के बाद भी शिवसेना के आक्रामक तेवर जारी हैं. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय लेख में मोदी सररकार को फिर निशाना बनाया है. लेख में कहा गया है कि एयर स्ट्राइक के जोश में लोग किसानों की खुदकुशी के मुद्दे को भूल रहे हैं. इसके साथ ही लेख में महाराष्ट्र में एक ही दिन में तीन किसानों की खुदकुशी का हवाला दिया गया है.

मंगलवार को ही ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया था कि हमारा देश लोकतांत्रिक देश है और हर एक को सवाल करने का अधिकार है. ये बात पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना के एयर स्ट्राइक को लेकर पूछे जा रहे सवालों के संदर्भ में कही गई. संपादकीय में कहा गया कि लोगों को जानने का अधिकार है और इन सवालों से भारतीय सेनाओं का मनोबल नहीं गिरेगा.     

बुधवार को शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से ‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया कि “ऐसी बातें सामने आ रही हैं चुनाव आयोग की ओर से आचार संहिता किसी भी वक्त लागू हो जाएगी. ऐसे में चुनाव आचार संहिता से पहले हम हर जगह से उद्घाटनों, नए प्रोजेक्ट्स के मुहूर्त और अनेक प्रोजेक्ट्स की घोषणाओं के बारे में सुन रहे हैं. हमने इन्हें प्रधानमंत्री मोदी की अनेक रैलियों में ऐसा ही सुना. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पीछे नहीं हैं. उन्होंने गंगा में जाकर पवित्र आशीर्वाद लिए. मध्य प्रदेश में कमलनाथ की ओर से 25 लाख से ज्यादा किसानों के लिए कर्ज माफ़ी की सौगात का एलान किया जा सकता है.    

‘सामना’ में लिखा गया है कि  “एयर स्ट्राइक के उल्लास में लोग बेसुधी में चले गए हैं और सब ने किसानों की खुदकुशी के मुद्दे को भुला दिया गया है. महाराष्ट्र के बीड में तीन किसानों ने एक ही दिन में खुदकुशी की. ये बहुत गंभीर है और महाराष्ट्र में किसानों की हालत को लेकर कई सवाल उठाता है.” संपादकीय के मुताबिक नांदेड़ में सिर्फ दो महीनों में 18 किसानों ने खुदकुशी की. 350 तहसीलों में से 180 को सूखाग्रस्त घोषित कर दिया गया है. मराठवाड़ा और विदर्भ में हालात 1972 के सूखे से भी ज़्यादा ख़राब हैं.

‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया है कि विकट हालात में किसान अपनी गाय बेचने को मजबूर हैं. बाद में उनका क्या होगा? ये इन सारे गौरक्षकों को पता लगाना चाहिए. संपादकीय के मुताबिक सरकार ने पुलवामा हमले में शहीद हमारे जवानों का बदला लिया, इसलिए सरकार की प्रशंसा की गई, लेकिन हमारे जवानों की तरह ही किसान भी मारे जा रहे हैं. उनका क्या? हमारे किसानों के मारे जाने का बदला कौन लेगा?

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