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लखनऊ रोड शो में राहुल तो गरजे पर आखिर क्यों नहीं बोलीं प्रियंका?

priyanka gandhi lucknow road show रोड शो की शुरुआत से कांग्रेस मुख्यालय तक राहुल कुल तीन बार बोले, लेकिन तीनों ही मौकों पर प्रियंका की चुप्पी लोगों को खटकी.

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aajtak.in [Edited By: राहुल विश्वकर्मा]नई दिल्ली, 12 February 2019
लखनऊ रोड शो में राहुल तो गरजे पर आखिर क्यों नहीं बोलीं  प्रियंका? लखनऊ में रोड शो के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी.

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए नवाबों के शहर लखनऊ ने रोड शो में पलक-पांवड़े बिछा दिए. सुबह से कार्यकर्ताओं का उत्साह हिलोरे मार रहा था. कांग्रेस दफ्तर में कार्यकर्ताओं की भीड़ उमड़ी पड़ी थी. पूरा शहर प्रियंका के स्वागत वाले पोस्टरों से पटा हुआ था. लेकिन प्रियंका पूरे रोड शो में चुप्पी साधे रहीं. वे हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार करती रहीं, लेकिन बोलीं कुछ नहीं.

प्रियंका की चुप्पी खटकी

रोड शो की शुरुआत से कांग्रेस मुख्यालय तक राहुल कुल तीन बार बोले, लेकिन तीनों ही मौकों पर प्रियंका की चुप्पी लोगों को खटकी. कांग्रेस मुख्यालय में उम्मीद थी कि दिनभर की चुप्पी के बाद शाम वे कुछ बोलेंगी, लेकिन वहां भी प्रियंका खामोशी ही अख्तियार किए बैठी रहीं. जिस तरह रोड शो के दौरान प्रियंका लोगों से मिलीं, उससे लगा कि कम से कम कांग्रेस मुख्यालय में वे बोलेंगी.

कब निकलेगा बोलने का मुहूर्त

रोड शो खत्म होने पर जो सवाल रह गया वो ये कि प्रियंका गांधी अपनी चुप्पी तोड़ने का मुहूर्त कब निकालेंगी. हजारों कार्यकर्ताओं की ये जानने की हसरत हसरत ही रह गई कि वो क्या बोलती हैं, कैसे बोलती हैं, कितना बोलती हैं. 20 दिन के इंतजार के बाद प्रियंका गांधी पहली बार यूपी पहुंचीं भी तो बोलीं कुछ नहीं. इसे लेकर सवाल इसलिए भी बड़ा हो गया है कि वो कार्यक्रम खत्म होते ही जयपुर के लिए निकल गईं, क्योंकि पति रॉबर्ट वाड्रा से कल बीकानेर जमीन सौदे के मामले में ईडी की पूछताछ होनी है.

रोड शो खत्म होने पर भी नहीं टूटी चुप्पी

लखनऊ में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का मेगा रोड शो 5 घंटे में 15 किलोमीटर लंबा फासला तय कर कांग्रेस दफ्तर पहुंचा. कांग्रेस दफ्तर में मंच सजा. कुर्सी पर प्रियंका वाड्रा बैठीं. उनके साथ ही कुर्सी पर पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठे. इस दौरान लगा कि पूरे रास्ते खामोश रहीं प्रियंका दफ्तर में अपनी बात रखेंगी. लेकिन यहां लोगों को निराशा हुई. माइक राहुल ने संभाल लिया. रोड शो में उमड़े जनसैलाब से गदगद राहुल ने कहा कि अब कांग्रेस फ्रंटफुट पर खेलेगी.

बतौर महासचिव पहली थी यूपी की यात्रा

कांग्रेस महासचिव के तौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने दिल्ली में पहले ही कार्यभार संभाल लिया था, लेकिन उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी महासचिव के रूप में ये प्रियंका की पहली यूपी यात्रा थी, जो गाजे-बाजे के साथ, हजारों कांग्रेसियों के हुजूम के साथ, नारेबाजी की गूंज के साथ शुरू हुई थी. ऐसे में कम से कम लखनऊवासियों को तो काफी उम्मीद थी कि उनकी चहेती प्रियंका गांधी उनके शहर में अपनी बात रखेंगी, लेकिन उनकी ये ख्वाहिश अधूरी ही रह गई.

अमौसी से कांग्रेस दफ्तर तक भीड़

प्रियंका गांधी का रोड शो सुबह 11 बजे शुरू होना था, लेकिन लखनऊ में उनके इंतजार में कांग्रेसियों की भीड़ सुबह ही कांग्रेस दफ्तर से लेकर अमौसी हवाई अड्डे तक पहुंच गई. प्रियंका और राहुल गांधी का रोड शो दोपहर 1 बजे शुरू हुआ. 15 किलोमीटर का रास्ता तकरीबन पौने पांच घंटे में तय हुआ. इस दौरान राहुल प्रियंका ने शर्मा जी की चाय की चुस्की ली तो राहुल ने प्रधानमंत्री मोदी पर बयानों के खूब तीर चलाए.

6 नेता थे गाड़ी पर सवार

एक खास रथ में प्रियंका सवार थीं. उनके साथ भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी थे. इसके अलावा इस गाड़ी पर ज्योतिरादित्य सिंधिया. आरपीएन सिंह, राज बब्बर और राजीव शुक्ला थे. प्रियंका के स्वागत में खड़ी भीड़ देख कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गदगद थे. हजरतगंज में जब काफिला थोड़ी देर के लिए ठहरा तो राहुल ने हाथ में माइक थाम लिया और राफेल को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर फिर हमला बोला. यहां भी प्रियंका ने कुछ नहीं बोला.

पौने पांच घंटे में 15 किलोमीटर

अमौसी एयरपोर्ट से कांग्रेस दफ्तर के लिए निकले इस रोड शो में यूं तो कुल 15 किलोमीटर की दूरी तय होनी थी, लेकिन कांग्रेसियों के हुजूम और उनके जोश, उनकी नारेबाजी की वजह से ट्रक धीरे-धीरे चल रहा था. इसके चलते 15 किलोमीटर की ये दूरी तय करने में पौने 5 घंटे लग गए.

प्रियंका के पोस्टरों से पटा था शहर

लखनऊ के पूरे रास्ते भर होर्डिंग, पोस्टर लगे हुए थे. किसी में उन्हें रानी लक्ष्मीबाई के रूप में दिखाया गया तो किसी में इंदिरा गांधी के रूप में. पोस्टरों में प्रियंका के स्वागत में तरह-तरह के नारे भी लिखे हुए थे. प्रियंका के पोस्टर और होर्डिंग्स पर लिखी इबारतें कुछ कम दिलचस्प नहीं थीं. कहीं लिखा था कि लहर नहीं ये आंधी है, नाम प्रियंका गांधी है. कुछ पोस्टरों में नारा लिखा था कि आई रानी लक्ष्मी के अवतार में, प्रियंका गांधी मैदान में. पहले लड़े थे गोरों से, अबकी लड़ेंगे चोरों से.

प्रियंका से कांग्रेस को बेहद उम्मीद

प्रियंका गांधी वाड्रा ऐसे वक्त सक्रिय राजनीति में आई हैं, जब कांग्रेस सबसे बुरे दौर में गुजर रही है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सिर्फ दो सांसद हैं, जबकि पूरे देश से सिर्फ 44 सांसद. कांग्रेस में नई जान फूंकने का जिम्मा प्रियंका के कंधों पर आन पड़ा है. 2019 लोकसभा चुनाव में इस बात की परख भी हो जाएगी कि क्या वाकई प्रियंका कांग्रेस के लिए तुरुप का इक्का साबित होंगे.

राहुल बोले पर प्रियंका चुप बैठी रहीं

कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे राहुल ने फिर माइक पकड़ा और कहा, भाइयों और बहनों उत्तर प्रदेश इस देश का दिल है. अब मैंने प्रियंका और सिंधिया जी को महासचिव बनाया है. मैंने इनसे कहा है कि यूपी में जो सालों से अन्याय हो रहा है, उनको लड़ना है, न्याय वाली सरकार लानी है, इनका लक्ष्य लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा में सरकार बनाने का है. हम अब फ्रंटफुट पर खेलेंगे बैकफुट पर नहीं. जब तक कांग्रेस की सरकार नहीं बनेगी, तब तक हम चैन से नहीं रहेंगे.

रॉबर्ट वाड्रा पर कहा था- राजनीतिक प्रतिशोध है

इससे पहले भी महासचिव बनने के बाद जब वे पति रॉबर्ट वाड्रा को ईडी दफ्तर छोड़ने गईं तो पत्रकारों के ढेरों सवाल के जवाब में सिर्फ इतना ही कहा कि पूरी दुनिया को पता है कि क्या हो रहा. ये राजनीतिक प्रतिशोध है. मैं अपने परिवार के साथ मजबूती से खड़ी हूं.

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