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महाराणा की धरती चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस-बीजेपी में कांटे की टक्कर

महाराणा प्रताप की धरा चित्तौड़गढ़ में आजादी के बाद से ही पहले कांग्रेस और जनसंघ फिर बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है. 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में भी बराबर का मुकाबला रहा.

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विवेक पाठकनई दिल्ली, 12 February 2019
महाराणा की धरती चित्तौड़गढ़ में कांग्रेस-बीजेपी में कांटे की टक्कर चित्तौड़गढ़ का किला (फाइल फोटो)

देश में आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. राजस्थान में भी विधानसभा चुनावों के बाद लोकसभा चुनाव के लिए बैठकों का दौर शुरू हो चुका है. जहां विधानसभा चुनावों में सत्ता में वापसी कर कांग्रेस के हौसले बुलंद हैं, तो वही कम मत प्रतिशत के अंतर से हारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी लोकसभा चुनावों में हार का बदला लेने की रणनीति तैयार कर रही है.

अजेय भूमि के नाम से ख्यात राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र का देश के इतिहास में विशेष स्थान रहा है. महाराणा प्रताप की धरा चित्तौड़गढ़ मेवाड़ में ही आता है. चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच आजादी के बाद से ही बराबर का मुकाबला देखने को मिला. वहीं हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में भी दोनों दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

मेवाड़ की ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ संसदीय सीट पर आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में चित्तौड़गड़ लोकसभा सीट जनसंघ के खाते में गई. लेकिन 1957, 1962, 1967 के चुनावों में यहां कांग्रेस को जीत मिली. 1971 में जनसंघ ने एक बार फिर वापसी की, जिसके बाद 1977 में जनता पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमाया. 1980, 1984 में फिर कांग्रेस की वापसी हुई. जिसके बाद 1989, 1991, 1996 में बीजेपी के बाद का कब्जा रहा. वहीं 1998 में कांग्रेस की वापसी हुई. 1999, 2004 में बीजेपी की जीत के बाद 2009 में यहां कांग्रेस के टिकट पर गिरिजा व्यास चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं. फिलहाल बीजेपी के चंद्र प्रकाश जोशी यहां से सांसद हैं. इस लिहाज से इस सीट पर कांग्रेस-बीजेपी के बीच बराबरी का मुकाबला रहा.

चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र में 8 विधानसभा सीटें आती हैं- जिनमें चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ की 6 सीट-कपासन, बेगूं, चित्तौड़गढ़, निम्बाहेड़ा, बड़ी सादड़ी और प्रतापगढ़, जबकि उदयपुर की 2 सीट- मावली और वल्लभनगर शामिल हैं. साल 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनाव में कपासन, चित्तौड़गढ़, बड़ी सादड़ी और मावली पर बीजेपी, जबकि बेगूं, निम्बाहेड़ा, प्रतापगढ़ और वल्लभगर पर कांग्रेस कब्जा है. इस तरह चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभाओं में से दोनों दलों का 4-4 सीट पर कब्जा है. लिहाजा आगामी लोकसभा चुनाव में कांटे का मुकाबला होने की उम्मीद है.

सामाजिक ताना-बाना

चित्तौड़गढ़ लोकसभा क्षेत्र संख्या 21 राजस्थान के ऐतिहासिक मेवाड़ क्षेत्र की सामान्य सीट है. यह लोकसभा सीट चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और उदयपुर जिले के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाई गई है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां की कुल जनसंख्या का 85 प्रतिशत ग्रामीण और 15 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. वहीं कुल आबादी का 13 फीसदी अनुसूचित जाति और 23.42 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. इसके अलावा इस सीट पर राजपूतों और ब्राह्मणों का खासा प्रभाव है.

साल 2014 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के मुताबिक चित्तौड़गढ़ में मतदाताओं की संख्या 18,18,147 है जिसमें 9,28,572 पुरुष और 8,89,575 महिला शामिल हैं.

2014 का जनादेश

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में चित्तौड़गढ़ में 64.5 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें बीजेपी को 60 फीसदी और कांग्रेस को 33 फीसदी वोट पड़े. इस चुनाव में बीजेपी से चंद्र प्रकाश जोशी ने कांग्रेस सांसद गिरिजा व्यासा को 3,16,857 मतों के भारी अंतर से हराया. बीजेपी से जोशी को 7,03,236 और कांग्रेस से गिरिजा व्यास को 3,86,379 वोट मिले थे.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

43 वर्षीय चित्तौड़गढ़ सांसद चंद्र प्रकाश जोशी को हाल ही लोकसभा में अच्छे प्रदर्शन और कार्यशैली के लिए सम्मानित किया गया था. अपने कार्यकाल में चली कुल 321 दिन की संसद में जोशी की मौजूदगी 94.08 फीसदी रही, इस दौरान उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े 657 प्रश्न पूछें, 385 बहस में हिस्सा लिया और 4 प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए. उन्होंने अपने सांसद विकास निधि से क्षेत्र के विकास के लिए आवंटित धन का 73.6 फीसदी खर्च किया.

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