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हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भजनलाल का निधन

ग्राम पंचायत के पंच से राजनीतिक सफर शुरू करके दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजनलाल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया.

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aajtak.in
आजतक ब्‍यूरोहिसार, 03 June 2011
हरियाणा के पूर्व मुख्‍यमंत्री भजनलाल का निधन भजन लाल

ग्राम पंचायत के पंच से राजनीतिक सफर शुरू करके दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे भजनलाल का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया.

राजनीति के चाणक्य और कई दलबदल के ‘इंजीनियर’ रहे भजनलाल अंतिम दिनों में बनायी अपनी पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस के सदस्यों को दल बदलने से नहीं रोक सके. भजनलाल का जन्म छह अक्तूबर 1930 को पंजाब के बहावलपुर (अब पाकिस्तान में) जिले में कोरनवली कस्बे में विश्नोई परिवार में हुआ था.

उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन आदमपुर ग्राम पंचायत में एक पंच के रूप में शुरू किया था और बाद में उसी पंचायत में सरपंच बने. अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और समर्पण की बदौलत वह दो दशक तक हरियाणा की राजनीति के शिखर पुरुष बने रहे. भजनलाल दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने. पहली बार 28 जून 1979 से पांच जुलाई 1985 तक और दूसरी बार 23 जुलाई 1991 से 11 मई 1996 तक.

भजन 1968 में बंसीलाल सरकार में शामिल हुए और लम्बे समय तक उनके संकट मोचक बने रहे. 1972 के विधानसभा चुनाव के बाद वह राज्य के मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आए. इसके बाद 1975 में उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया. हालांकि अपनी जोड़तोड़ की कला की बदौलत वह 1979 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और बाद में 1980 में पूरे जनता पार्टी विधायक दल का कांग्रेस आई में दलबदल करा दिया.

उनका राजनीतिक सफर हरियाणा तक ही सीमित नहीं रहा. उन्होंने केंद्र में कांग्रेस नीत सरकार में कई पदों पर योगदान दिया. राजीव गांधी के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में उन्होंने कृषि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के कामकाज संभाले. गैर जाट समूह का प्रतिनिधित्व करने वाले भजनलाल लम्बे समय तक हरियाणा की राजनीति के केंद्र में रहे.

हरियाणा में 2005 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद राज्य इकाई में गंभीर मतभेद उभर कर सामने आए. इस समय भूपिन्दर सिंह हुडा (जाट) को भजनलाल के स्थान पर राज्य का मुख्यमंत्री चुना गया. साल 2007 में उन्होंने आधिकारिक रूप से कांग्रेस से अलग होने और नयी पार्टी बनाने की घोषणा की और इसका नाम हरियाणा जनहित कांग्रेस रखा.

साल 2008 में कांग्रेस ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए भजनलाल को पार्टी से निलंबित कर दिया. 2009 का लोकसभा चुनाव भजनलाल के राजनीतिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था जहां उन्होंने प्रदेश के दो प्रमुख नेताओं सम्पत सिंह और जयप्रकाश को पराजित किया.

उनके छोटे पुत्र चंद्रमोहन उस समय सुखिर्यों में आ गए जब उन्होंने दूसरे विवाह के लिए दिसंबर 2008 में इस्लाम कबूल कर लिया और बाद में 2009 में फिर हिन्दू धर्म अपनाया.

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