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दूसरा चरण: महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना का दबदबा, चुनौती दे पाएंगे शिंदे और चव्हाण

लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में महाराष्ट्र की 10 लोकसभा सीटों पर 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इनमें बुलढाना, अकोला, अमरावती, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, उस्मानाबाद, लातूर और सोलापुर सीट शामिल है. शिवसेना-बीजेपी का इस इलाके में दबदाबा है, लेकिन कांग्रेस-एनसीपी इस इलाके में जीत का परचम लहराने के लिए बेताब हैं.

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कुबूल अहमदनई दिल्ली, 15 April 2019
दूसरा चरण: महाराष्ट्र में BJP-शिवसेना का दबदबा, चुनौती दे पाएंगे शिंदे और चव्हाण सुशील कुमार शिंदे और अशोक चव्हाण (फोटो-रॉयटर्स)

लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में महाराष्ट्र की 10 लोकसभा सीटों पर 18 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. इनमें बुलढाना, अकोला, अमरावती, हिंगोली, नांदेड़, परभणी, बीड, उस्मानाबाद, लातूर और सोलापुर सीट शामिल है. 2014 के लिहाज से देंखें तो इन 10 सीटों में से पांच सीटों पर बीजेपी का कब्जा हैं. जबकि शिवसेना के तीन और कांग्रेस के दो सांसद हैं. इस बार के बदले सियासी समीकरण में देखें तो शिवसेना-बीजेपी और कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला माना जा रहा है, लेकिन बसपा और प्रकाश अंबेडकर की पार्टी ने चुनावी मैदान में उतरकर कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है.

लातूर:

लातूर लोकसभा सीट से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद सुनील गायकवाड़ का टिकट काटकर सुधाकर तुकाराम श्रंगारे को  उतारा है. जबकि कांग्रेस ने कामंत मछिंद्र, बसपा ने सिद्धार्थ कुमार दिगंबरराव सूर्यवंशी और वंचित बहुजन आघाडी ने राम गरकार सहित 10 उम्मीदवार मैदान में हैं. लातूर सीट से कांग्रेस के शिवराज पाटिल की परंपरागत सीट रही है. लेकिन बीजेपी इस इलाके में सेंध लगाने में कामयाब रही थी. कांग्रेस इसे वापस लाने के लिए कामंत मछिंद्र पर दांव खेला है. लेकिन बीजेपी ने जिस तरह से अपने मौजूदा सासंद का टिकट काटकर श्रंगारे को उतारा है. इससे बीजेपी को पार्टी के अंदर और बाहर दोनों चुनौतियों से सामना करना पड़ रहा है.

बुलढाना:

बुलढाना लोकसभा सीट पर शिवसेना से जाधव प्रतापराव गणपतराव, कांग्रेस से डॉ राजेंद्र भास्करवर शिंगणे और बसपा से अब्दुल हफीज अब्दुल अजीज सहित 12 उम्मीदवार मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है. जाधव इससे पहले दो बार बीजेपी से सांसद रह चुके हैं, लेकिन इस बार शिवसेना ने दांव खेला है.कांग्रेस से उतरने वाले शिंगणे भी एनसीपी से दो बार इसी सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली है.  

अकोला:

अकोला लोकसभा सीट पर कांग्रेस से हिदायतुल्ला बरकतुल्लाह पटेल, बीजेपी से धोत्रे संजय शामराव और वंचित बहुजन अघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर सहित 11 प्रत्याशी मैदान में हैं. प्रकाश अंबेडकर के सियासी मैदान में उतरने से अकोला सीट की लड़ाई दिलचस्प हो गई है. उन्हें ओवैसी की पार्टी AIMIM का समर्थन हासिल है. 2014 में इस सीट पर बीजेपी के धोत्रे ने जीत हासिल की थी. इस बार का सियासी संग्राम त्रिकोणीय होती नजर आ रही है.

अमरावती:

अमरावती लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, जो शिवसेना का मजबूत दुर्ग माना जाता है. पिछले 25 साल से शिवसेना का इस सीट पर कब्जा है. शिवसेना ने इस बार भी अपने मौजूदा सांसद अड़सुल आनंदराव को उतारा है. जबकि कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन में शामिल युवा स्वाभिमान पार्टी के अध्यक्ष रवि राणा की पत्नी नवनीत कौर राणा को उतारा है. बसपा ने अरुण वानखेड़े और बहुजन महा पार्टी ने अठावले संजय पर दांव लगाया है. हालांकि दिलचस्प बात ये है कि इस सीट पर कभी कोई महिला चुनाव नहीं हारी है, ऐसे में गठबंधन ने शिवसेना के जीत का सिलसिला रोकने के लिए नवनीत कौर राणा पर भरोसा जताया है.

हिंगोली:

महाराष्ट्र की हिंगोली सीट पर कांग्रेस ने इस बार अपने मौजूदा सांसद राजीव सातव की जगह शिवसेना से आए सुभाष वानखेड़े को उतारा है. जबकि शिवसेना ने हेमंत पाटिल, बीएसपी ने धनवे दत्ता और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से अल्ताफ अहमद सहित 17 प्रत्याशी मैदान में है. मोदी लहर में भी कांग्रेस इस सीट पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी. इस बार दलित और मुस्लिम वोटों के बिखराव की आस में शिवसेना जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं.

नांदेड़:

नांदेड़ लोकसभा सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है. नांदेड़ सीट पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण मैदान में हैं तो बीजेपी ने चिखलीकर प्रताप गोविंदराव को उतारा है. जबकि सपा ने अब्दुल समद, वंचित बहुजन आघाडी ने भिंगे यशपाल नरसिंह राव, बहुजन मुक्ति पार्टी ने मोहन आनंदरराव को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. अशोक चव्हाण के गृह क्षेत्र होने के नाते बीजेपी इस इलाके में कमल खिलाने से महरूम रही है. लेकिन सपा और प्रकाश अंबेडकर की पार्टी ने इस बार जिस तरह से उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में बीजेपी इस इलाके में जीत की उम्मीद लगाए हुए है.

परभणी:

परभणी लोकसभा सीट शिवसेना का मजबूत सीटों में गिनी जाती है. इस सीट पर शिवसेना ने अपने मौजूदा सांसद संजय हरिभाऊ जाधव, एनसीपी ने राजेश उत्तम राव, बसपा ने वैजनाथ सीताराम और वंचित बहुजन आघाडी ने आलमगीर मोहम्मद खान को उतरा है. इस बार एनसीपी ने अपने पुराने उम्मीदवार की जगह नए चेहरे पर दांव लगाया है. जबकि शिवसेना अपने पुराने चेहरे के सहारे जीत की आस लगाए है.

बीड:

महाराष्ट्र की बीड सीट बीजेपी का मजबूत इलाका माना जाता है. बीजेपी ने इस पर दिवंगत गोपीनाथ मुंडे की बेटी प्रीतम मुंडे को चुनाव मैदान में उतारा है तो वहीं एनसीपी ने बजरंग मनोहर सोनवणे को उतारा है. वंचित बहुजन आघाडी ने विष्णु जाधव और सपा से सैयद मुजम्मिल सैयद जमील चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं. 2014 में गोपीनाथ मुंडे ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उनके निधन के बाद उनकी बेटी ने राजनीतिक विरासत को संभाला था. इस बार बदले सियासी समीकरण में गोपीनाथ मुंडे के राजनीतिक विरासत संभालने की कड़ी चुनौती है. पर सपा के मुस्लिम उम्मीदवार के उतरने से प्रीतम मुंडे एक बार फिर जीत की उम्मीद लगाए हैं.

उस्मानाबाद:

उस्मानाबाद लोकसभा सीट पर शिवसेना ने अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर ओमरोज निंबालकर, एनसीपी ने रणजगीत सिंह पद्मसिंह पाटिल, बसपा ने शिवाजी पंढरीनाथ ओमान और वंचित बहुजन आघाडी की ओर से अर्जुन चुनावी मैदान में हैं. 2014 में शिवसेना से रविंद्र गायकवाड़ ने जीत दर्ज की थी. कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन का इस सीट पर लंबे समय तक कब्जा रहा है. ऐसे में मोदी लहर में शिवसेना के द्वारा जीती गई सीट को एनसीपी दोबारा से वापस लाने के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है.

सोलापुर:

सोलापुर लोकसभा सीट कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे का परंपरागत क्षेत्र रहा है, लेकिन मोदी लहर में बीजेपी इस इलाके में कमल खिलाने में कामयाब रही थी. इस बार कांग्रेस ने सुशील कुमार शिंदे को उतारा है. जबकि बीजेपी ने मौजूदा सांसद शरद बनसोडे की जगह धार्मिक गुरु जय सिद्धेश्वर शिवाचार्य और वंचित बहुजन अघाड़ी ने आंबेडकर प्रकाश यशवंत पर दांव लगाया है. इस सीट पर लिंगायत और दलित मतदाता निर्णयक भूमिका में है, जिसका फायदा उठाने के लिए बीजेपी ने सिद्धेश्वर शिवाचार्य पर भरोसा जाता है, लेकिन कांग्रेस के सुशील कुमार शिंदे के सहारे एक बार फिर वापसी करना चाहती है.

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