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चुनाव: जानें, क्या होती है जमानत राशि और कब होती है जब्त?

अक्सर चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के जमानत जब्त होने की खबरें आती हैं. जानते हैं आखिर यह जमानत राशि क्या होती है, कितनी राशि होती है और यह कब जब्त होती है...

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aajtak.in [Edited By- मोहित पारीक]नई दिल्ली, 09 April 2019
चुनाव: जानें, क्या होती है जमानत राशि और कब होती है जब्त? लोकसभा चुनाव 2019: प्रतीकात्मक फोटो

देश में लोकसभा चुनाव 2019 का शंखनाद हो चुका है और उम्मीदवार चुनाव में नामांकन दाखिल कर रहे हैं. चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया के दौरान सबसे अहम चीज होती है जमानत राशि. साथ ही अक्सर सुना जाता है कि किसी उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई है... ऐसे में जानते हैं कि आखिर यह जमानत राशि क्या होती है, कितनी राशि होती है और यह कब जब्त होती है...

क्या है जमानत राशि?

किसी भी चुनाव में जब प्रत्याशी चुनाव लड़ता है तो पर्चा भरते वक्त उसे एक निश्चित रकम जमानत के तौर पर चुनाव आयोग में जमा करनी होती है. इसी राशि को चुनावी जमानत राशि कहते हैं. यह राशि कुछ मामलों में वापस दे दी जाती है अन्यथा आयोग इसे अपने पास रख लेता है.

कितनी होती है जमानत राशि?

जमानत राशि हर चुनाव के आधार पर तय की जाती है और चुनाव के आधार पर अलग अलग होती है. पंचायत के चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक जमानत राशि अलग अलग होती है. यह राशि सामान्य वर्ग के लिए और आरक्षित वर्ग के लिए अलग अलग होती है. एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को जनरल वर्ग के उम्मीदवारों के मुकाबले आदि राशि देनी होती है.

पार्षद चुनाव के लिए जमानत राशि?

चुनाव के दौरान जनरल वर्ग के उम्मीदवार को 5000 रुपए और आरक्षित उम्मीदवार को 2500 रुपए की राशि जमानत के तौर पर जमा करनी होती है.

विधानसभा चुनाव के लिए जमानत राशि?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34(1)(ए) के अनुसार विधानसभा चुनाव में जनरल वर्ग के उम्मीदवारों को 10 हजार रुपये और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार को 5 हजार रुपये जमा करने होते हैं. इससे पहले यह राशि काफी कम थी और सामान्य वर्ग के उम्मीदवार को 250 और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 125 रुपये राशि जमा करनी होती थी. हालांकि साल 2009 में इसमें बदलाव किया गया.

लोकसभा चुनाव के लिए जमानत राशि?

वहीं लोकसभा चुनाव में दावेदारी प्रस्तुत करने जा रहे जनरल वर्ग के उम्मीदवारों को 25 हजार रुपये और एससी-एसटी वर्ग के उम्मीदवारों को 12,500 रुपये फीस जमा करनी होती है. 2009 से पहले जनरल वर्ग के लिए यह राशि 10 हजार रुपये और एससी-एसटी उम्मीदवार के लिए 5 हजार रुपये थी.

कब जब्त होती है जमानत?

जब कोई प्रत्याशी किसी भी चुनाव क्षेत्र में पड़े कुल वैध वोट का छठा हिस्सा हासिल नहीं कर पाता है तो उसकी जमानत राशि जब्त मानी जाती है और नामांकन के दौरान दी गई राशि उन्हें वापस नहीं मिलती है. जैसे अगर किसी सीट पर 1 लाख लोगों ने वोट दिया है और उम्मीदवार को 16666 से कम वोट हासिल हुए हैं तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी.

किसे वापस मिलती है जमानत राशि?

- जब किसी उम्मीदवार का नामांकन खारिज हो जाता है या वह अपनी उम्मीदवार वापस ले लेता है तो यह राशि लौटा दी जाती है.

- किसी उम्मीदवार की वोटिंग शुरू होने से पहले मौत हो जाती है तो यह राशि परिवारजन को वापस मिल जाती है.

- अगर उम्मीदवार कुल डाले गए वोट के छठे हिस्सा से ज्यादा वोट हासिल कर लेता है.

- अगर कोई उम्मीदवार छठे हिस्से जितना वोट हासिल नहीं कर पाता है और चुनाव जीत जाता है तो उन्हें भी राशि दे दी जाती है.

2014 में कितनी जब्त हुई थी जमानत राशि?

साल 2014 में 8748 उम्मीदवारों ने दावेदारी प्रस्तुत की थी, जिसमें से 7502 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. यानी 7502 उम्मीदवारों को 16.6 फीसदी वोट हासिल नहीं हुए थे. देश की सिर्फ ऐसी 6 सीटें थीं, जहां विजेता प्रत्याशी की ही जमानत बच पाई थी. इन सीटों में त्रिपुरा ईस्‍ट, त्रिपुरा वेस्‍ट, गाजियाबाद, सतारा,  फरीदाबाद शामिल है.

कहा जाता हैं पैसा?

प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त होने पर जमा होने वाले पैसों को इलेक्शन अकाउंट में जमा किया जाता है.

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