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सिंहभूम सीट: बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है यह सीट, मधु कोड़ा रह चुके हैं सांसद

सिंहभूम लोकसभा सीट से झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुआ सांसद हैं. वह 2014 में दूसरी बार जीते हैं. इस सीट से 2009 में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा भी सांसद रह चुके हैं.

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aajtak.in
विशाल कसौधन नई दिल्ली, 26 February 2019
सिंहभूम सीट: बीजेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है यह सीट, मधु कोड़ा रह चुके हैं सांसद सिंहभूम लोकसभा सीट

झारखंड के 14 लोकसभा सीटों में सिंहभूम लोकसभा सीट भी अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है. यह सीट सेराकेला खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम जिले में फैली हुई है. यह इलाका रेड कॉरिडोर का हिस्सा है. इस इलाके में अनुसूचित जनजाति के वोटरों का दबादबा है. यही कारण है कि लोकसभा सीट के अन्तर्गत आने वाली सभी छह विधानसभा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.

शुरुआत में यह सीट झारखंड पार्टी का गढ़ थी, लेकिन समय के साथ यहां कांग्रेस ने पांव पसारा और उसके प्रत्याशी कई बार जीते. इस सीट से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीत चुके हैं. फिलहाल इस सीट से बीजेपी के लक्ष्मण गिलुआ सांसद हैं. लक्ष्मण गिलुआ ही झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1957 से लेकर 1977 तक इस सीट पर झारखंड पार्टी का दबदबा रहा और उसके प्रत्यासी जीतते रहे. 1957 में शंभू चरण, 1962 में हरी चरण शॉ, 1967 में कोलई बिरुआ, 1971 में मोरन सिंह पुर्ती और 1977 में बगुन संब्रुई जीते. 1980 में बगुन संब्रुई ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और उसके टिकट पर जीत कर संसद पहुंचे. इसके बाद वह 1984 और 1989 का चुनाव भी जीते. यानि बगुन संब्रुई इस सीट से लगातार चार बार सांसद बने.

1991 में झारखंड मुक्ति मोर्चा की कृष्णा मरांडी जीती. 1996 में पहली बार इस सीट पर बीजेपी का खाता खुला. बीजेपी के टिकट पर चित्रसेन सिंकू जीते. 1998 में कांग्रेस ने वापसी की और विजय सिंह शॉ जीते. 1999 में बीजेपी के टिकट पर लक्ष्मण गिलुआ जीतने में कामयाब हुए. एक बार फिर इस सीट से बगुन संब्रुई सांसद बने. 2004 में वह कांग्रेस के टिकट पर पांचवीं बार संसद पहुंचे. 2009 में इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मधु कोड़ा जीते. 2014 के चुनाव में बीजेपी के लक्ष्ण गिलुआ जीते.

सामाजिक तानाबाना

सिंहभूम लोकसभा सीट पर अनुसूचित जनजाति का खास दबदबा है. इस सीट पर उरांव, संथाल समुदाय, महतो (कुड़मी), प्रधान, गोप, गौड़ समेत कई अनुसूचित जनजाति और इसाई व मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं. 2014 के चुनाव में बीजेपी अनुसूचित जनजातियों की गोलबंदी के कारण जीती थी. इस सीट के अंतर्गत सरायकेला, चाईबासा, मंझगांव, जगन्नाथपुर, मनोहरपुर और चक्रधरपुर विधानसभा सीट आते हैं. यह सभी सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है.

2014 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 5 सीटों (सरायकेला, चाईबासा, मंझगांव, मनोहरपुर, चक्रधरपुर) और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक सीट (जगन्नाथपुर) पर जीत दर्ज की थी. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 11.52 लाख है, इसमें 5.83 लाख पुरुष और 5.69 लाख महिला मतदाता शामिल है. 2014 में इस सीट पर 69 फीसदी मतदान हुआ था.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से बीजेपी के लक्ष्मण गिलुआ दूसरी बार सांसद बने. उन्होंने जेबीएसपी की गीता कोड़ा को चुनाव हराया था. लक्ष्मण गिलुआ को 3.03 लाख और गीता कोड़ा को 2.15 लाख वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर कांग्रेस के चित्रसेन सिंकू थे. उन्हें 1.11 लाख वोट मिले थे. चौथे नंबर पर झामुमो के दशरथ गगरई थे. उन्हें 35 हजार वोट मिले थे.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

लक्ष्मण गिलुआ मूल रूप से पश्चिमी सिंहभूम के जांटा गांव के रहने वाले हैं. वह पहली बार 1995 में विधायक बने. पहली बार 1999 में पश्चिमी सिंहभूम से सांसद बने. 2004 के लोकसभा चुनाव में वह हार गए. 2009 में वह फिर झारखंड विधानसभा के सदस्य बने. 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिमी सिंहभूम क्षेत्र से दोबारा सांसद बने. फिलहाल वह बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी है. लोकसभा चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक, उनके पास 15.79 लाख की संपत्ति है. इसमें 2.70 लाख की चल संपत्ति है और 13 लाख की अचल संपत्ति शामिल है. उनके ऊपर 3.90 लाख की देनदारी है. साथ ही उनके ऊपर दो आपराधिक मुकदमे भी दर्ज है.

जनवरी, 2019 तक mplads.gov.in पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, लक्ष्मण गिलुआ ने अभी तक अपने सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए 27.48 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. उन्हें सांसद निधि से अभी तक 32.79 करोड़ मिले हैं. इनमें से 5.31 करोड़ रुपए अभी खर्च नहीं किए गए हैं. उन्होंने 92 फीसदी अपने निधि को खर्च किया है.

लक्ष्मण गिलुआ का फेसबुक पेज यह और ट्विटर हैंडल यह है.

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