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दुमका सीट: झारखंड मुक्ति मोर्चा का है गढ़, सातवीं बार जीते हैं शिबू सोरेन

Dumka Loksabha Seat दुमका लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. 1989 से ही यह सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ है और इस सीट से सात बार से शिबू सोरेन सांसद बनते आ रहे हैं.

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aajtak.in
विशाल कसौधन नई दिल्ली, 26 February 2019
दुमका सीट: झारखंड मुक्ति मोर्चा का है गढ़, सातवीं बार जीते हैं शिबू सोरेन शिबू सोरेन (फाइल फोटो)

झारखंड के 14 लोकसभा सीटों में से एक दुमका लोकसभा सीट काफी अहम है. इस सीट से झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन और बाबू लाल मरांडी सांसद रह चुके हैं. दुमका लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. दुमका लोकसभा क्षेत्र आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है और नक्सली प्रभावित भी है.  

इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत जामताड़ा, देवघर और दुमका जिले की 6 विधानसभा सीट आती है. 1989 से ही यह सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ रही है और इस सीट से सात बार से शिबू सोरेन सांसद बनते आ रहे हैं. 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद शिबू सोरेन अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए थे.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1957 में इस सीट से झारखंड पार्टी के देबी सोरेन जीते थे. इसके बाद इस सीट से कांग्रेस के एस. सी. बेसरा लगातार तीन बार (1962, 1967 और 1971) में सांसद बने. 1977 में यह सीट जनता पार्टी के पास चली गई और हेमब्रह्म बटेश्वर जीतनें कामयाब हुए. 1980 के चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर शिबू सोरेन पहली बार संसद पहुंचे. 1984 में यह सीट फिर कांग्रेस के पास आ गई और पृथ्वी चंद किस्कू जीते.

1989 में शिबू सोरेन ने वापसी की और लगातार तीन बार (1989, 1991 और 1996) झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जीते. 1998 में इस सीट से बीजेपी प्रत्याशी बाबू लाल मरांडी जीते. मरांडी 1999 का चुनाव भी जीते. 2002 में शिबू सोरेन ने दुमका में झारखंड मुक्ति मोर्चा का परचम फहराया और जीते. इसके बाद से वह लगातार (2004, 2009 और 2014) इस सीट से सांसद बन रहे हैं. वह इस सीट से सातवीं बार सांसद हैं.

सामाजिक तानाबाना

दुमका लोकसभा सीट पर आदिवासी, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के वोटरों का दबदबा है. इस सीट पर 40 फीसदी आदिवासी, 40 फीसदी पिछड़ी जातियां और 20 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं. आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटरों को झारखंड मुक्ति मोर्चा का परंपरागत वोटर माना जाता है. यही कारण है कि इस सीट से शिबू सोरेन लगातार जीत रहे हैं. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 12.47 लाख है, इसमें 6.46 लाख पुरुष और 6 लाख महिला मतदाता शामिल है.

इस लोकसभा सीट के अन्तर्गत 6 विधानसभा सीटें शिकारीपाड़ा (एसटी), जामताड़ा, दुमका (एसटी), नाला, सारठ और जामा (एसटी) आती है. 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने चार सीटों (शिकारीपाड़ा, नाला, सारठ, जामा), बीजेपी ने एक सीट (दुमका) और कांग्रेस ने भी एक सीट पर (जामताड़ा) जीत दर्ज की थी.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से शिबू सोरेन सातवीं बार जीते थे. उन्होंने बीजेपी के सुनील सोरेन को हराया था. शिबू सोरेन को करीब 3.35 लाख और सुनील सोरेन को 2.96 लाख वोट मिले थे. इससे पहले यानि 2009 के चुनाव में भी शिबू सोरेन ने बीजेपी के सुनील सोरेन को ही हराया था. इस दौरान शिबू सोरेन को करीब 2 लाख और सुनील सोरेन को करीब 1.89 लाख वोट मिले थे.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

गुरूजी के नाम से मशहूर शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पहली बार वो 2005 में 10 दिन (2 मार्च से 12 मार्च) के लिए, फिर दूसरी बार 2008 से 2009 तक के लिए और तीसरी बार 2009 से 2010 तक के लिए सीएम के पद पर रहे. शिबू सोरेन सात बार सांसद और यूपीए सरकार के दौरान केंद्रीय कोयला मंत्री भी रह चुके हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान दिए हलफनामे के मुताबिक, उनके पास 4.67 करोड़ की संपत्ति है. इसमें 1.55 करोड़ की चल संपत्ति है और 3.12 करोड़ की अचल संपत्ति शामिल है. उनके ऊपर 14.70 लाख की देनदारी है.

जनवरी, 2019 तक mplads.gov.in पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, शिबू सोरेन ने अभी तक अपने सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए 13.58 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. उन्हें सांसद निधि से अभी तक 17.94 करोड़ मिले हैं. इनमें से 4.36 करोड़ रुपए अभी खर्च नहीं किए गए हैं. उन्होंने 76 फीसदी अपने निधि को खर्च किया है.

शिबू सोरेन का ट्विटर हैंडल यह है.

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