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गौतम गंभीरः क्रिकेट की पिच से पूर्वी दिल्ली के राजनीतिक मैदान तक

गौतम गंभीर भारत के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी थे. बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम दिल्ली से घरेलू क्रिकेट खेलते थे. इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलते थे. भारत सरकार ने 2008 में गंभीर को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था.  अभी भाजपा के टिकट पर पूर्वी दिल्ली सीट पर चुनावी मैदान में हैं.

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aajtak.in[ऋचीक मिश्रा]नई दिल्ली, 08 May 2019
गौतम गंभीरः क्रिकेट की पिच से पूर्वी दिल्ली के राजनीतिक मैदान तक गौतम गंभीर (FILE)

गौतम गंभीर भारत के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी थे. बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज गौतम दिल्ली से घरेलू क्रिकेट खेलते थे. इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली डेयरडेविल्स के लिए खेलते थे. भारत सरकार ने 2008 में गंभीर को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था. अभी भाजपा के टिकट पर पूर्वी दिल्ली सीट पर चुनावी मैदान में हैं.

गौतम गंभीर का जन्म 14 अक्टूबर 1981 को हुआ. उनके पिता दीपक गंभीर टेक्सटाइल बिजनेसमैन हैं. मां का नाम सीमा है. गौतम गंभीर के जन्म से 18 दिन बाद ही इनके दादा और दादी ने इन्हें पालने के लिए अपने साथ ले गए थे और तब से वे लोग साथ ही में हैं. गंभीर ने 10 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था.

इन्होंने अपनी पढ़ाई मॉडर्न स्कूल, नई दिल्ली में और आगे की पढ़ाई हिन्दू कॉलेज में पूरी की थी. ये अपने मामा पवन गुलाटी के घर में 90 के दशक में रहते थे और उन्हें अपना गुरु भी मानते हैं. किसी भी मैच से पहले इन्हें फोन करते थे. राजू टंडन और दिल्ली के लाल बहादुर शास्त्री अकादमी से संजय भारद्वाज इनके कोच रहे हैं. इन्हें 2000 में बेंगलुरु में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के लिए चुना गया था.

इंडियन प्रीमियर लीग में इन्होंने अपनी शुरुआत दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ खेलते हुए की थी. ये कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेले जहां इन्होंने बहुत अच्छी कप्तानी करते हुए 2 बार खिताब दिलाया. वहीं साल 2018 के इंडियन प्रीमियर लीग में इन्हें कोलकाता ने नहीं खरीदा. दिल्ली डेयरडेविल्स ने इन्हें कप्तान बना दिया लेकिन खराब प्रदर्शन के कारण 25 अप्रैल 2018 को कप्तानी छोड़ दी.

पूर्वी दिल्ली सीट की राजनीतिक पृष्ठभूमि

साल 1966 में गठित पूर्वी दिल्ली ने 1967 में अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ा. 1967 में सीट के लिए हुए पहला चुनाव भारतीय जनसंघ के हरदयाल देवगन ने कांग्रेस के बी मोहन के विरुद्ध जीता था. उसके बाद 1971 में कांग्रेस के एचकेएच भगत ने भारतीय जनसंघ के हरदयाल देवगन को हराया. 1977 में यहां से बीएलडी के किशोर लाल ने एचकेएच भगत को पटखनी दे दी. 1980 में पांसा पलटते हुए एचकेएच भगत ने किशोर लाल(इस बार जेएनपी से) को हरा दिया.

बात करें 1984 के आम चुनाव की तो जेएनपी और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर फिर से दांव लगाया. जिसमें कांग्रेस को कामयाबी मिली. 1989 को यहां से एचकेएच भगत ने तीसरी बार जीत करते हुए निर्दलीय चांद राम को शिकस्त दी.  

1991 में बीजेपी के बीएल शर्मा ने एचकेएच भगत को हराकर कांग्रेस से ये सीट छीन ली. 1996 में बीएल शर्मा ने कांग्रेस के दीपचंद बंधु का हराते हुए अपनी जीत बरकरार रखी.

1997 के उपचुनावों में बीजेपी के लाल बिहारी ने कांग्रेस के डॉ. अशोक कुमार वालिया को धूल चटा दी. 1998 में लाल बिहारी ने कांग्रेस उम्मीदवार शीला दीक्ष‍ित को हार का मुंह देखने को मजबूर कर दिया.

1999 में हुए चुनाव में लाल बिहारी तिवारी को लगातार तीसरी बार कामयाबी मिली. इस बार उनके सामने थे कांग्रेस के एचएल कपूर. 2004 में कांग्रेस के संदीप दीक्षित भाग्यशाली निकले. उन्होंने तीन बार के विजयी सांसद लाल बिहारी तिवारी को हरा दिया. 2009 में भी संदीप दीक्षित यहां से दोबारा चुने गए. उन्होंने बीजेपी के चेतन चौहान को हराया.

2014 का जनादेश

2014 के चुनाव में बीजेपी के महेश गिरि ने 572202(47.83%) वोटों के साथ आम आदमी पार्टी के राजमोहन गांधी को 190463 वोट से शिकस्त दी. राजमोहन गांधी को कुल 381739(31.91%) वोट मिले थे. इस चुनाव में कांग्रेस के संदीप दीक्षित महज 203240(16.99%) वोटों के साथ तीसरे पायदान पर सिमट कर रह गए थे.

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