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दयानिधि मारन: चेन्नई सेंट्रल सीट पर वापसी के लिए लगा रहे हैं जोर

दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी सहयोगी पार्टियों के सहारे चुनावी जंग जीतने की कोशिश में जुटी हैं.18 अप्रैल को दूसरे चरण में जिन सीटों पर वोटिंग है उसमे एक हाई प्रोफाइल सीट चेन्नई सेंट्रल की है. इस सीट पर डीएमके के दयानिधि मारन चुनावी ताल ठोक रहे हैं.

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पंकज सिंहनई दिल्ली, 16 April 2019
दयानिधि मारन: चेन्नई सेंट्रल सीट पर वापसी के लिए लगा रहे हैं जोर चुनाव प्रचार करते दयानिधि मारन.

लोकसभा चुनाव में इस बार दक्षिण की जंग काफी रोचक होने वाली है. दक्षिण के राज्य तमिलनाडु में इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी सहयोगी पार्टियों के सहारे चुनावी जंग जीतने की कोशिश में जुटी हैं. 18 अप्रैल को दूसरे चरण में जिन सीटों पर वोटिंग है उसमे एक हाई प्रोफाइल सीट चेन्नई सेंट्रल की है. इस सीट पर डीएमके के दयानिधि मारन चुनावी ताल ठोक रहे हैं. उन्हें इस सीट पर पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के नेता सैम पॉल से कड़ी टक्कर मिल रही है. दयानिधि मारन इस सीट से वापसी करने के लिए जी-जान से जुटे हैं.

चेन्नई सेंट्रल सीट से इस बार कुल 31 उम्मीदवार मैदान में हैं. इस सीट पर 8 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया है. यहां से डीएमके के दयानिधि मारन, एसडीपीआई और एएमएमके से गठबंधन उम्मीदवार तेहलान बकावी, पीएमके से सैम पॉल, मक्कल निधि मैयम से कमिला नासिर और नाम तमिलर काची से आर. कार्तिकेयन चुनाव मैदान में हैं. दयानिधि पिछला लोकसभा चुनाव 45 हजार से अधिक वोटों से हार गए थे.

मारन परिवार का रहा है दबदबा

तमिलनाडु की चेन्नई सेंट्रल सीट पर शुरू से मारन परिवार का दबदबा रहा है. यह सीट बनने के बाद 1977 से  2014 तक यहां 11 बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. उसमें 7 बार डीएमके और 3 बार कांग्रेस को जीत मिली है. 2014 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के एस.आर. विजयकुमार ने डीएमके के बड़े नेता दयानिधि मारन को 45,841 वोटों से हराया. 2014 में चेन्नई सेंट्रल लोकसभा सीट पर 61.39 फीसदी वोटिंग हुई थी. इसमें एआईएडीएमके को 40.9 प्रतिशत, डीएमके को 35.28 प्रतिशत और कांग्रेस को 3.19 प्रतिशत वोट मिले थे. इस संसदीय क्षेत्र को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का गढ़ माना जाता है. लेकिन 2014 में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के एस.आर. विजयकुमार ने पहली बार जीत हासिल करके पार्टी के सूखे को खत्म कर दिया.

पिछले चुनाव में 61 फीसदी मतदान

चेन्नई सेंट्रल संसदीय क्षेत्र में कुल छह विधानसभाएं आती हैं. इनमें विलिवक्कम, एग्मोर, हार्बर, चेपक थिरुवल्लिकेनी, थाउजेंड लाइट्स और अन्ना नगर शामिल हैं. पिछले चुनाव में एआईएडीएमके के एस.आर. विजयकुमार को 13,28,027 में से 3,33,296 वोट मिले थे, जबकि उनके विरोधी और डीएमके नेता दयानिधि मारन को 287455 वोट मिले थे. वहीं कांग्रेस को 25,981, आम आदमी पार्टी को 19,553 और नोटा के तहत 21,959 वोट पड़े थे. चेन्नई सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में कुल 1,328,027 मतदाता हैं, जिसमें 6,65,278 पुरुष और 6,62,749 महिलाएं हैं. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में 422,278 पुरुष और 392616 महिलाओं ने मतदान किया था. संसदीय क्षेत्र में कुल 61.39 फीसदी वोटिंग हुई थी.

इस सीट पर 2009 में 61.03 फीसदी वोटिंग हुई थी जिसमें एआईएडीएमके को 41.34 प्रतिशत, डीएमके को 46.82 प्रतिशत वोट मिले थे. राज्य के 39 लोकसभा संसदीय क्षेत्रों में से 37 पर एआईएडीएमके का कब्जा है. तमिलनाडु राज्य में सत्तारूढ़ एआईएडीएमके के अलावा डीएमके दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. हालांकि 2014 लोकसभा चुनाव में डीएमके का खाता भी नहीं खुला था. वहीं बीजेपी भी यहां अपनी जड़ें मजबूत करने में लगी है. इस बार एआईएडीएमके और बीजेपी के बीच गठबंधन है. उधर डीएमके और कांग्रेस में भी गठजोड़ है.

तमिलनाडु की खास है यह सीट

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के अंतर्गत आने वाली तीन लोकसभा सीटों में से चेन्नई सेंट्रल की खास अहमियत है. यह देश का छठा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर है साथ ही दुनिया का 31वां सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र भी है. यह बंगाल की खाड़ी से सटे कोरोमंडल तट पर स्थित है. चेन्नई सेंट्रल भारत के सबसे छोटे लोकसभा क्षेत्रों में से भी एक है.  2011 की जनगणना के मुताबिक चेन्नई सेंट्रल संसदीय क्षेत्र की कुल जनसंख्या 16,31,196 है. जो 100 फीसदी शहरी आबादी है. यहां अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या 17.84 प्रतिशत है तो वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) की  आबादी  0.29 फीसदी है. एक बार फिर दयानिधि मारन इस सीट पर वापसी के लिए प्रयासरत हैं.

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