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विपक्षी से सत्तारूढ़ बनी तो 5 साल में ऐसे बदल गई बीजेपी

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद न केवल देश के राजनीतिक हालात बदले हैं बल्कि भारतीय जनता पार्टी में भी जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. बीजेपी में मोदी युग शुरू हुआ और बीजेपी के दिग्गज एक-एक कर किनारे होते गए. साथ ही मोदी-शाह के दौर में बीजेपी युवा होने के साथ अब हर मुद्दे पर फ्रंटफुट पर खेलती हुई दिखी.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 16 May 2019
विपक्षी से सत्तारूढ़ बनी तो 5 साल में ऐसे बदल गई बीजेपी अमित शाह और नरेंद्र मोदी

देश की सियासत में 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद न केवल देश के राजनीतिक हालात बदले हैं बल्कि भारतीय जनता पार्टी में भी जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. बीजेपी में मोदी युग शुरू हुआ और बीजेपी के दिग्गज एक-एक कर किनारे होते गए. बीजेपी की नींव रखने वाले नेताओं से लेकर शिखर तक पहुंचाने वाले नेता पार्टी को अलविदा कह गए या फिर कोपभवन में बैठ गए. जबकि दूसरी ओर मोदी-शाह के दौर में बीजेपी युवा होने के साथ अब हर मुद्दे पर फ्रंटफुट पर खेलती हुई दिखी. दो सांसदों वाली बीजेपी ने  दुनिया की सबसे पार्टी का तमगा अपने नाम किया.

75 पार की बाउंड्री लाइन

मोदी-योगी के दौर में बीजेपी के सीनियर लीडर धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए. बात चाहे पार्टी संस्थापक में शामिल एल के आडवाणी हो या फिर मुरली मनोहर जोशी की. बीजेपी ने 75 साल के ऊपर के नेताओं को टिकट नहीं दिया है. इस सूची में कलराज मिश्र, करिया मुंडा, प्रेम कुमार धूमल, बीसी खंडूरी, शांता कुमार, सुमित्रा महाजन जैसे दिग्गज नेता हैं. 75 साल के फार्मूला को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कैबिनेट पर भी रखा था. नजमा हेपतुल्ला और कलराज मिश्र को कैबिनेट से बाहर होना पड़ा.

बीजेपी में युवा फौज

सत्ता की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में मिली तो सरकार में युवा चेहरों को तरजीह मिली. बीजेपी की कमान अमित शाह को मिली तो पार्टी में युवा नेताओं को तवज्जो मिली. इसी का नतीजा है कि बीजेपी अब बुजुर्गों की पार्टी के बजाय युवाओं की नजर आती है. मोदी सरकार में पीयूष गोयल, जयंत सिन्हा, राजवर्धन सिंह राठौर, स्मृति ईरानी, बाबुल सुप्रियो और किरण रिजिजू जैसे युवा चेहरे शामिल थे. जबकि बीजेपी संगठन में श्याम जाजू, अनिल जैन, मुरलीधर राव, राम माधव, सरोज पांडेय, सौदान सिंह, शिव प्रकाश, रजनीश कुमार, भूपेंद्र यादव,कैलाश विजयवर्गीय और तीरथ सिंह रावत को जिम्मेदारी सौंपी. बीजेपी के मीडिया प्रभार की जिम्मेदारी अनिल बलूनी जैसे युवा नेता को दी. इसके अलावा कई प्रदेश में पार्टी की कमान युवा नेता के हाथों दी गई है.  

फ्रंटफुट पर बीजेपी

बीजेपी 2014 के बाद से बैकफुट पर खेलने के बजाय फ्रंटफुट पर हर सियासी गेम खेलती हुई नजर आती है. बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रहने के बावजूद बीजेपी अब सरकार बनाने हर संभव कोशिश करती है. दो सीट जीतने के बाद भी सरकार बनाने में सफल रही है. गोवा में कांग्रेस से पीछे रहने के बाद भी बीजेपी सरकार बनाने में कामयाब रही थी. जबकि कांग्रेस सबसे ज्यादा सीटें पाने के बाद सरकार नहीं बना सकी. यही नहीं विवादित मुद्दे पर भी बीजेपी फ्रंटफुट पर खेलती रही है. आतंकवाद मामले के आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भोपाल से टिकट देकर चुनावी मैदान में उतार देना और उसके पक्ष में जोरदार तरीके से खड़े रहना बीजेपी की नई राजनीति का हिस्सा है.

हाई कमान कल्चर

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी में हाई कमान कल्चर खूब देखने को मिला है. चुनाव में टिकट से लेकर मुख्यमंत्री तक फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के द्वारा ही लिए गए हैं. हाई कमान के आदेश पर पार्टी में कोई भी आवाज नहीं उठा सका है. हरियाणा, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा और असम में मुख्यमंत्री का फैसला बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने लिया है. यही नहीं इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेताओं के टिकट काट दिए गए, लेकिन कोई आवाज भी नहीं उठी. इसके अलावा पूरा लोकसभा चुनाव नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ा जा रहा है.  

हाईटेक बीजेपी

पिछले पांच सालों में बीजेपी पूरी तरह से हाईटेक हो गई है. वेबसाइट से लेकर सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्म पर बीजेपी की जबरदस्त उपस्थिति है. साइबर वॉर रूम से बीजेपी ने हाईटेक चुनाव प्रचार कर रही है. ट्विटर पर लगातार पार्टी की ओर से ट्रेंड चलाए जा रहे हैं. इसके अलावा पीएम के हर भाषण के छोटे वीडियो को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया के अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके अलावा प्रधानमंत्री नमो ऐप के जरिए एक साथ देश के अलग-अलग शहर और गांव में रहने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करते हैं.

ग्लोबल हुई बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी देश ही नहीं दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में अपने आपको स्थापित कर चुकी है. 2014 के बाद दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे भारत के लोगों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी अपनी जगह बनाई है. नरेंद्र मोदी जब भी विदेश दौरे पर जाते थे तो वहां भारतीय मूल के रहने वाले लोगों के साथ मिलने का एक कार्यक्रम जरूर रखते हैं. पीएम लोगों से मिलते और भारतीय मूल के लोगो उनका स्वागत करते. इस दौरान पीएम ने उन्हें भारत के लिए कुछ करने की सलाह देते. इसी का नतीजा था कि ग्लोबल स्तर पर बीजेपी की पहचान मिली है.

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