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कांग्रेस-BJP नहीं में सीधी टक्कर नहीं, 221 लोकसभा सीटों पर होगा त्रिकोणीय मुकाबला

लोकसभा चुनाव 2019 में देश की कुल 543 लोकसभा सीटों में से 221 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां की सियासी लड़ाई कांग्रेस-बीजेपी के बीच नहीं बल्कि तीसरे ताकत के रूप में क्षत्रपों से है. दिलचस्प बात ये है कि देश के आठ राज्य ऐसे हैं जहां की अधिकतर सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है.

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कुबूल अहमदनई दिल्ली, 25 February 2019
कांग्रेस-BJP नहीं में सीधी टक्कर नहीं, 221 लोकसभा सीटों पर होगा त्रिकोणीय मुकाबला विपक्षी दल के नेता एक साथ (फाइल फोटो)

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए और बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए के बीच ही सीधी लड़ाई मानी जा रही है. हालांकि देश की तकरीबन आधी लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां इन दोनों दलों और गठबंधन के अलावा तीसरी ताकत के रूप में क्षत्रप हैं, जो नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों के खिलाफ मजबूती के साथ चुनावी संग्राम में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. देश में ऐसी 221 संसदीय सीटे हैं, जहां त्रिकोणीय मुकाबला होता नजर आ रहा है.

बता दें कि देश के कुल 543 लोकसभा सीटों में से उत्तर प्रदेश, केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली सहित आठ राज्यों की 221 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस और बीजेपी की सीधी लड़ाई 'तीसरे मोर्च' के क्षत्रपों से है. ये सभी दल देश की सत्ता से नरेंद्र मोदी को हर हाल में हटाने की कोशिशों में जुटे हैं.

UP में सपा-बसपा गठबंधन

उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के विजयरथ को रोकने के लिए सपा-बसपा ने गठबंधन किया है. सूबे की 80 लोकसभा सीटों पर सपा-बसपा ने राष्ट्रीय लोक दल और निषाद पार्टी को अपने साथ मिलाया है. वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने भी प्रियंका गांधी के बाद महान दल और पीस पार्टी जैसे दलों को लेकर गठबंधन की कवायद कर रही है. इसके अलावा बीजेपी का ओम प्रकाश राजभर और अपना दल के साथ गठबंधन है. इस तरह से सूबे की सियासी लड़ाई त्रिकोणीय होती दिख रही है. हालांकि अपना दल और राजभर को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है.

बंगाल में चार दलों में घमासान

पश्चिम बंगाल में अभी तक किसी भी दल का कोई गठबंधन नहीं हुआ है. जबकि राज्य में टीएमसी, बीजेपी, कांग्रेस और वामपंथी दल हैं. ममता के साथ न तो लेफ्ट और न ही कांग्रेस जाना चाहते हैं. इस तरह से सूबे की 42 लोकसभा सीटों के लिए चार प्रमुख पार्टियों के बीच मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि ममता बनर्जी का अपना आधार इन सभी दलों में सबसे ज्यादा है. बीजेपी राज्य में दूसरी पार्टी बनकर उभरी है.

केरल में UDF-LDF बीजेपी

दक्षिण भारत के केरल की सियासी लड़ाई कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ और लेफ्ट की अगुवाई एलडीएफ के बीच तीसरी ताकत के रूप में बीजेपी गठबंधन भी उभरा है. सबरीमाला और संघ कार्यकर्ताओं की हत्या को लेकर बीजेपी लगातार केरल में संघर्ष कर रही है. ऐसे में केरल की 20 सीटों पर लेफ्ट और कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के बीच भी है.

आंध्र प्रदेश की लड़ाई दिलचस्प

आंध्र प्रदेश में कुल 25 लोकसभा सीटों पर बीजेपी, कांग्रेस, टीडीपी और जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस के बीच मुकाबला है. सूबे में किसी भी दल का किसी भी पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं है. हालांकि सूबे में मुख्य मुकाबला जगन मोहन रेड्डी और चंद्रबाबू नायडू की पार्टी के बीच है. यहां कांग्रेस और बीजेपी दोनों राष्ट्रीय पार्टियां अपना वजूद बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है. हालांकि आंध्र प्रदेश एक दौर में कांग्रेस का सबसे मजबूत दुर्ग हुआ करता था.

ओडिशा में कांग्रेस-बीजेपी-बीजेडी

ओडिशा में कुल 21 लोकसभा सीटें हैं. प्रदेश में कांग्रेस, बीजेपी और बीजेडी के बीच सियासी संग्राम माना जा रहा है. प्रदेश में किसी भी पार्टी का कोई गठबंधन नहीं है. हालांकि यहां तीसरे ताकत के रूप में बीजेडी प्रमुख और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हैं. बीजेडी शुरू से ही गैर-कांग्रेसी और बीजेपी दलों के साथ गठबंधन की बात करती रही है, लेकिन वो किसी भी गठबंधन का हिस्सा फिलहाल नहीं है.

तेलंगाना की केसीआर

तेलंगाना में कुल 17 लोकसभा सीटें हैं. यहां की चुनावी लड़ाई मुख्य रूप से टीआरएस, कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. इस तरह से राज्य में तीसरी ताकत के रूप में केसीआर हैं, जो लंबे समय से गैर-बीजेपी और गैर कांग्रेसी गठबंधन को लेकर देश के अलग-अलग दलों के साथ मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन वो इसे अमलीजामा नहीं पहना सके हैं.

दिल्ली में केजरीवाल

दिल्ली में कुल 7 लोकसभा सीटें है. सूबे में कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच मुख्य मुकाबला है. दिल्ली में किसी भी दल का कोई गठबंधन नहीं है, ये सभी अकेले-अकेले चुनाव में उतर रहे हैं. हालांकि केजरीवाल कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बेताब थे, लेकिन दोनों के बीच तालमेल नहीं हो सका है.

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉफ्रेंस

जम्मू-कश्मीर में कुल 5 लोकसभा सीटें हैं. सूबे में चार दल प्रमुख रूप से हैं, जिनमें कांग्रेस, बीजेपी, नेशनल कॉफ्रेंस और पीडीपी. माना जा रहा है कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस मिलकर चुनावी मैदान में उतरेंगे. ऐसे में बीजेपी, पीडीपी और कांग्रेस-नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन के बीच मुख्य मुकाबला होगा.

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