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केरल की कोल्लम लोकसभा सीट: RSP का गढ़, UDF और LDF के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई

केरल के कोवलम संसदीय क्षेत्र में पिछली बार यूडीएफ की तरफ से आरएसपी कैंडिडेट सांसद बने थे. यह वही संसदीय क्षेत्र है जहां पीएम मोदी द्वारा एक बाईपास के उद्घाटन को लेकर खूब राजनीति हुई. एलडीएफ यहां से फिर से अपना पांव जमाने के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रही है.

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दिनेश अग्रहरिनई दिल्ली, 22 February 2019
केरल की कोल्लम लोकसभा सीट: RSP का गढ़, UDF और LDF के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई कोल्लम एक खूबसूरत पर्यटन क्षेत्र भी है

यह केरल का वही संसदीय क्षेत्र है जहां पीएम मोदी द्वारा एक बाईपास के उद्घाटन को लेकर खूब राजनीति हुई. यह सीट फिलहाल यूडीएफ की तरफ से चुनाव लड़े आरएसपी कैंडिडेट एन.के. प्रेमचंद्रन के पास है. कोल्लम को पहले क्यूलो के नाम से जाना जाता था. यह समुद्र के किनारे स्थित एक खूबसूरत शहर है. यह रोमन साम्राज्य के जमाने से ही एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र रहा है. इब्न बतूता ने 14वीं सदी में जिन पांच बंदरगाहों की चर्चा की थी उनमें से एक कोल्लम या क्यूलो भी रहा है.

कोल्लम लोकसभा के तहत सात विधानसभा क्षेत्र-कुन्नाथुर, करुणागपल्ली, चवारा, कुंडारा, कोल्लम, एरवीपुरम और चथानूर विधानसभा क्षेत्र आते हैं. साल 1951 में जब देश में पहली बार चुनाव हुए तो यह इलाका क्यूलो/मावेलिकारा संसदीय क्षेत्र के तहत आता था. इस चुनाव में रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन. श्रीकांतन नायर विजयी हुए थे. लेकिन 1957 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के कोडियन विजयी हुए. तबसे अब तक यहां सात बार आरएसपी के कैंडिडेट सांसद बन चुके हैं. पांच बार कांग्रेस और दो बार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी यानी माकपा कैंडिडेट विजयी हुए हैं.

साल 2014 में यहां से रीवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) कैंडिडेट एन.के. प्रेमचंद्रन विजयी हुए थे. प्रेमचंद्रन को 4,08,528 वोट मिले थे. वह 37,649 वोटों से विजयी हुए थे. दूसरे स्थान पर रहे माकपा के एम.ए. बेबी को 3,70,879 वोट और तीसरे स्थान पर रहे बीजेपी के पीएम वेलायुधन को 58,671 वोट मिले थे. बहुजन समाज पार्टी के कैंडिडेट एडवोकेट प्रहलादन को 4,266 वोट मिले. नोटा (NOTA) बटन 7,876 लोगों ने दबाया था.

साल 2009 के चुनाव में यहां से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एन पीताम्बरा कुरुप कुल 3,57,401 वोट पाकर जीते थे. दूसरे स्थान पर माकपा के पी. राजेंद्रन थे.

कोल्लम जिला दक्षिण केरल का एक इलाका है जिसका मुख्यालय कोल्लम सिटी है. साल 2011 की जनगणना के मुताबिक इस जिले की जनसंख्या 26,35,375 थी, जिसमें से 12,46,968 पुरुष और 13,88,407 महिलाएं थीं. इसमें से 3,28,263 अनुसूचित जाति के और 10,761 अनुसूचित जनजाति के लोग थे.

इस जिले में भी सेक्स रेश्यो महिलाओं के पक्ष में है और प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले 1113 महिलाएं हैं. इसमें 64.42 फीसदी हिंदू और 19.3 फीसदी मुस्लिम हैं. जिले की साक्षरता दर 94.09 फीसदी है. जिले में लोगों की आमदनी का मुख्य स्रोत खेती ही है. कोल्लम संसदीय क्षेत्र में कुल 12,19,415 मतदाता हैं, जिसमें से 5,75,296 पुरुष और 6,44,119 महिलाएं हैं.

इस बार होगी कांटे की लड़ाई

यूडीएफ और एलडीएफ ने इस सीट से अपने कैंडिडेट लगभग तय कर लिए हैं. यूडीएफ की तरफ से मौजूदा सांसद और आरएसपी नेता प्रेमचंद्रन ही उम्मीदवार होंगे, जबकि एलडीएफ की तरफ से के.एन. बालागोपाल उम्मीदवार होंगे. खबर है कि बीजेपी कोल्लम के जिलाधिकारी सीवी. आनंद बोस को चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन बोस ने अभी यह स्वीकार नहीं किया है.

केरल में आरएसपी के अस्तित्व के लिए प्रेमचंद्रन की जीत काफी जरूरी है, दूसरी तरफ एलडीएफ के लिए भी यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है, क्योंकि उसके पोलित ब्यूरो सदस्य एमएम बेबी को 2014 में यहां से हार मिल चुकी है. बालागोपाल राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं, लेकिन उनके लिए भी लड़ाई आसान नहीं होगी, क्योंकि उनके सामने प्रेमचंद्रन जैसे मजबूत कैंडिडेट होंगे.

कोल्लम बाईपास को लेकर राजनीति

यह वही संसदीय इलाका है, जहां एक बाईपास के पीएम मोदी द्वारा उद्घाटन को लेकर खूब राजनीति हुई. नेशनल हाईवे-66 पर बनने वाले 13 किमी लंबे बाईपास का पीएम मोदी ने 15 जनवरी को उद्घाटन किया. 352 करोड़ की लागत से बनने वाला यह हाईवे अलप्पुझा और तिरुवनंतपुरम के बीच यात्रा समय को काफी घटा देता है. इस तरह बाईपास के उद्घाटन के साथ ही पीएम मोदी ने एक तरह से यहां बीजेपी के चुनाव अभियान की शुरुआत कर दी. पीएम मोदी अपने कार्यकाल में तीन बार कोल्लम की यात्रा कर चुके हैं.

कोल्लम बाईपास को लेकर खूब राजनीति हुई और सीपीएम ने तो यहां तक आरोप लगाया कि इस उद्घाटन के पीछे प्रेमचंद्रन का हाथ है और इसे लेकर आरएसपी और कांग्रेस के बीच मतभेद कायम हो गए हैं. लेकिन आरएसपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया.

संसद में बेहतरीन प्रदर्शन

58 वर्षीय सांसद प्रेमचंद्रन का संसद में प्रदर्शन बेहतर रहा है. वह तीसरी बार सांसद हैं. उनके परिवार में पत्नी गीता के अलावा एक बेटा है. पेशे से वकील प्रेमचंद्रन ने बीएससी और एलएलबी तक शिक्षा हासिल की है. वह अपने राजनीतिक संघर्षों के बल पर एक ग्राम पंचायत चुनाव जीतने से लेकर सांसद तक पहुंचे हैं. उन्होंने संसद में 460 सवाल पूछे हैं और 320 बार बहसों और अन्य विधायी कार्यों में हिस्सा लिया है. उन्होंने सात बार प्राइवेट मेंबर बिल पेश किए हैं. सांसद प्रेमचंद्रन को पिछले पांच साल में सांसद निधि के तहत ब्याज सहित 22.36 करोड़ रुपये मिले जिसमें से वह 17.71 करोड़ रुपये खर्च कर पाए.

वह 16वीं लोकसभा में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी हो चुके हैं. उन्हें बहस शुरू करने में उत्कृष्टता दिखाने के मामले में सम्मानित किया गया.

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