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जानिए कैसे होती है मतगणना और इस बार नतीजों के लिए क्यों करना पड़ेगा लंबा इंतजार

38 दिन चले लोकतंत्र के पर्व में 22 लाख 30 हजार बैलेट यूनिट, 10 लाख 63 हजार कंट्रोल यूनिट और 10 लाख 73 हजार वीवीपैट का इस्तेमाल हुआ. 12 लाख से अधिक ईवीएम में मतदाताओं के मत और उम्मीदवारों की किस्मत बंद है.

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aajtak.in
संजय शर्मा नई दिल्ली, 22 May 2019
जानिए कैसे होती है मतगणना और इस बार नतीजों के लिए क्यों करना पड़ेगा लंबा इंतजार 12 लाख से अधिक ईवीएम में उम्मीदवारों की किस्मत बंद (फाइल फोटो)

मतगणना का दिन बेहद तनाव भरा और गहमागहमी भरा रहने वाला है. ना केवल राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए बल्कि मतगणना प्रक्रिया में जुटे कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भी. इस बार मतदान के लिए ईवीएम भी रिकॉर्ड तादाद में इस्तेमाल किए गए.

38 दिन चले लोकतंत्र के पर्व में 22 लाख 30 हजार बैलेट यूनिट, 10 लाख 63 हजार कंट्रोल यूनिट और 10 लाख 73 हजार वीवीपैट का इस्तेमाल हुआ. इसमें कुछ रिजर्व में भी रहे. कई जगह उम्मीदवारों की तादाद ज्यादा होने से दोहरे बैलेट यूनिट का इस्तेमाल किया गया.

बनाए गए हैं चार हजार से अधिक मतगणना केंद्र

आयोग के उपायुक्त उमेश सिन्हा के मुताबिक, 12 लाख से अधिक ईवीएम में मतदाताओं के मत और उम्मीदवारों की किस्मत बंद है. पूरे देश में 10 लाख 35 हजार केंद्रों पर मतदान हुआ था. हर जिले में अमूमन एक या दो जगह स्ट्रॉन्ग रूम बनाए गए हैं. यानी चार हजार से ज्यादा मतगणना केंद्र बनाए गए हैं. स्ट्रॉन्ग रूम के चारों ओर सुरक्षाकर्मियों का पहरा है. अंदर और बाहर सीसीटीवी लगाए गए हैं. उनके आउटपुट पर सभी पार्टियों और उम्मीदवारों के कार्यकर्ताओं का पहरा है. यानी कई स्तरीय सुरक्षाव्यवस्था चौबीस घंटे सातों दिन चाकचौबंद है.

सबसे पहले चार टेबल पर पोस्टल बैलेट की गिनती

वोटों की गिनती भले 23 मई को सवेरे आठ बजे से होगी, लेकिन कामकाज तो आज रात से शुरू हो जाएगा. चुनाव आयोग के प्रोटोकॉल के मुताबिक मतगणना की भी एक तय प्रक्रिया है. आयोग की ओर से हरेक मतगणना केंद्र पर इसे फॉलो किया जाएगा. मतगणना की शुरुआत सवेरे आठ बजे से होगी. सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती है. इसके लिए चार टेबल तय होते हैं. सभी राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों के नुमाइंदे इस गणना के गवाह होते हैं. कायदे से हरेक टेबल पर मतगणना कर्मचारी को हरेक राउंड के लिए पांच सौ से ज्यादा बैलेट पेपर नहीं दिए जाते हैं. इसमें गलत भरे हुए या गलत निशान लगाये हुए बैलेट पेपर अवैध हो जाते हैं.

पोस्टल बैलेट और ईटीपीबीएस की गिनती के बाद ईवीएम की गिनती

आयोग के उपायुक्त चंद्रभूषण का कहना है कि कई लोकसभा क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां 30 हजार से 45 हजार तक पोस्टल बैलेट होते हैं. ऐसे में उनकी गिनती में ही करीब आठ दस घंटे लग जाते हैं. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफरेबल पोस्टल बैलेट भी अगर आए हों तो उनकी गिनती होती है. इन पर क्यू आर कोड होता है. उसके जरिए गिनती होती है. आयोग की नियमावली के मुताबिक पोस्टल बैलेट और ईटीपीबीएस की गिनती पूरी होने के आधा घंटा बाद ईवीएम में दिए गए मतों की गिनती शुरू होती है. इसके लिए हरेक विधान सभा इलाके के हिसाब से सेंटर में 14 टेबल लगाए जाते हैं. टेबल के चारों ओर जाली की घेराबंदी की जाती है.

30 से 45 मिनट में होती है एक राउंड की गणना

हरेक टेबल पर एक-एक ईवीएम भेजी जाती है. इस तरह हरेक विधान सभा क्षेत्र के लिए एक साथ चौदह ईवीएम की गिनती एक साथ होती है. अमूमन हर दौर में 30 से 45 मिनट का समय लगता है. मतगणना टेबल के चारों ओर पार्टियों या उम्मीदवारों के एजेंट रहते हैं, जो मतगणना पर पैनी निगाह रखते हैं. उनके लिए भी मतगणना अधिकारी तय फार्म 17 सी का अंतिम हिस्सा भरवाते हैं. फॉर्म 17 सी का पहला हिस्सा मतदान के पोलिंग एजेंट की मौजूदगी और दस्तखत के साथ पोलिंग प्रक्रिया शुरू करते समय भरा जाता है. फिर मशीनों की सीलिंग के समय अगला हिस्सा भरते हैं. फिर मतगणना के समय आखिरी हिस्सा भरा जाता है. ताकि हरेक चरण में ईवीएम और अन्य मशीनों के सही सलामत होने का सबूत रहे.

ईवीएम और वीवीपेट की पर्चियों के मिलान में लगता है एक घंटा

बैलेट यूनिट पर जितने उम्मीदवारों के नाम दर्ज होते हैं, उनके लिए एक- एक एजेंट का नाम पता और अन्य जरूरी जानकारियां दर्ज कर अंदर प्रवेश करने दिया जाता है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से आयोग औचक आधार पर पांच मशीनों को पहले ही अलग कर लेता है, जिनकी ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों की गिनती का मिलान सबसे आखिर में होता है. आयोग के उपायुक्त सुदीप जैन के मुताबिक एक ईवीएम और वीवीपैट की पर्चियों के मिलान में एक घंटा लगता है. तो पांच ईवीएम और वीवीपैट की गिनती के मिलान में औसतन पांच घंटे तो लग ही जाएंगे.

नियमों के कारण एक साथ नहीं होता पांच मशीनों का मिलान

आज तक ने जब उनसे ये पूछा कि आखिर पांचों मशीनें एक साथ ही खोलकर गिनती का मिलान कर लिया जाए तो क्या हर्ज है समय और श्रम दोनों ही बचेंगे. जैन साहब ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि नहीं. ऐसा नहीं किया जाता. एक बार में एक ही मशीन का मिलान होगा. उसके भी नियम हैं. पहले वीवीपैट की पर्चियों की छंटनी और गिनती होती है. इसके बाद ही बैलेट और कंट्रोल यूनिट के डिस्प्ले ऑन किये जाते हैं. फिर होता है मिलान. पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होती है.

रात 11 बजे तक आ सकते हैं नतीजे

आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया में हर विधान सभा क्षेत्र की मतगणना पूरी होने में कम से कम पांच घंटे की देरी होगी. विधान सभा का क्षेत्र या जनसंख्या के आधार पर छोटे बड़े क्षेत्र, कम या ज्यादा मतदाताओं वाला बूथ होते हैं. लिहाजा अमूमन मतगणना के दस से 12 दौर होते हैं. तो आधा से पौना घंटा प्रति दौर का औसत लगाया जाए तो छह से आठ घंटे लगते हैं. यानी सवेरे आठ बजे से अगर पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू हो तो औसतन दो घंटे उसमें लगते हैं. दस बजे से ईवीएम की गिनती शुरू हो तो भी शाम छह तो बज ही जाते हैं. अब ये नये पांच घंटे और जोड़ दिए जाएं तो रात 11 बारह बजे तक ही अंतिम नतीजा आएगा. यानी जीतने वाले उम्मीदवार को आधी रात तक ही जीत का प्रमाणपत्र मिलेगा.

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