एडवांस्ड सर्च

लोकसभा चुनावः दूसरे चरण में इन 5 खास सीटों पर रहेगी हर किसी की नजर

18 अप्रैल यानी गुरुवार को 13 राज्यों की 97 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. सात चरण में होने वाले लोकसभा चुनावों में दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूसरे सबसे ज्यादा सांसद इसी चरण में चुने जाएंगे. इनमें भी पांच ऐसी सीटें हैं जहां सबकी नजर होगी.

Advertisement
दीपू राय [Edited By: समीर चटर्जी/सुरेंद्र]नई दिल्ली, 16 April 2019
लोकसभा चुनावः दूसरे चरण में इन 5 खास सीटों पर रहेगी हर किसी की नजर दूसरे चरण के मतदान में 97 सीटों का भविष्य तय होगा (फाइल फोटो)

17वीं लोकसभा के लिए 18 अप्रैल यानी गुरुवार को 13 राज्यों की 97 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे. सात चरण में होने वाले लोकसभा चुनावों में दूसरा चरण काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूसरे सबसे ज्यादा सांसद इसी चरण में चुने जाएंगे. इनमें भी पांच ऐसी सीटें हैं जहां सबकी नजर होगी.

seat-1_041619123403.jpg

1. शिवगंगा, तमिलनाडु

मुकाबला: कार्ति चिदंबरम (कांग्रेस+डीएमके), एच राजा (बीजेपी+एआईडीएमके)

जमीनी हकीकत: गुरुवार को तमिलनाडु की कुल 39 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. तमिलनाडु की बाकी सीटों के मुकाबले शिवगंगा सीट का महत्व इसलिए है क्योंकि एआईडीएमके और डीएमके ने गठबंधन करने वाली राष्ट्रीय पार्टियों बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन दिया है. यहां से पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति और बीजेपी के एच राजा चुनाव मैदान में हैं.

2014 परिणाम: सेंथिलनाथन पी आर (एआईडीएमके) ने डीएमके उम्मीदवार धुरई राज सुभा को 22.34% वोट मार्जिन से हराया था.

2009 परिणाम: कांग्रेस के पी चिंदबरम ने राजाकन्नपम आर एस पर मामूली वोटों (0.44%) से जीत हासिल की थी.

seat-11_041619123439.jpg

2. सिल्चर, असम

मुकाबला: कांग्रेस की सुष्मिता देव और बीजेपी के राजदीप रॉय के बीच

जमीनी हकीकत: असम की 14 सीटों में से एक सिल्चर लोकसभा सीट पर लड़ाई सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल के इर्द-गिर्द घूम रही है. सिल्चर में 35 फीसदी वोटर्स मुस्लिम हैं और यहां के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं. ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के हटने से यहां सीधा मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है. 2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सात में से छह सीट जीत ली थी. बीजेपी सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल के जरिए उत्तर-पूर्व की इस सीट पर कब्जा करने की तैयारी में है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी यहां चुनावी रैली कर चुके हैं और प्रस्तावित सिटिजनशिप अधिनियम बिल यहां के लिए एक बड़ा मुद्दा है.

2014 परिणाम: सुष्मिता देव (कांग्रेस) ने बीजेपी के कबिंद्र पुरकायस्थ को करीब चार फीसदी वोटों के मार्जिन से हराया था.

2009 परिणाम: कबिंद्र पुरकायस्थ (बीजेपी) ने बदरुद्दीन अजमल (एयूडीएफ) को छह फीसदी वोट मार्जिन से हराया था.

3. सुंदरगढ़, ओडिशा

मुकाबला: बीजेपी के जुअल ओरम, बीजेडी की सुनीता बिस्वाल और कांग्रेस के जॉर्ज टिर्की के बीच त्रिकोणीय टक्कर

जमीनी हकीकत: ओडिशा की 21 सीटों में से सुंदरगढ़ एकलौती सीट है जहां बीजेपी को पिछले चुनाव में जीत हासिल हुई थी. पिछले दो लोकसभा चुनावों में इस सीट पर हार-जीत का अंतर दो फीसदी से कम के वोट मार्जिन पर हुआ है. इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं. केंद्रीय मंत्री जुअल ओराव पांचवीं बार इस सीट के दावेदार हैं. उन्हें त्रिकोणीय मुकाबले का सामना करना होगा.

बीजेडी ने पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व सांसद हेमनंदा विश्वास की बड़ी बेटी सुनीता बिस्वाल चुनाव मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस ने हाल ही में पार्टी में शामिल जॉर्ज टिर्की को टिकट दिया है. हॉकी का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर चुनावी मुद्दा भी हॉकी और महिला सशक्तिकरण है.

2014 परिणाम: जुअल ओराम (बीजेपी) ने मशहूर हॉकी खिलाड़ी और बीजेडी उम्मीदवार दिलीप कुमार टिर्की को 1.86 फीसदी के वोट मार्जिन से हराया था.

2009 का परिणाम: कांग्रेस के हेमानंद बिश्वाल ने बीजेपी के जुअल ओराम को 1.52 फीसदी के वोट मार्जिन से हराया था.

4. अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

मुकाबला: सतीश कुमार गौतम (बीजेपी) और अजीत बलियान (सपा-बसपा गठबंधन)

जमीनी हकीकत: सांप्रदायिक लिहाज से संवेदनशील सीट अलीगढ़ में इस बार कड़े मुकाबले के आसार हैं. बीजेपी ने मौजूदा सांसद सतीश गौतम को टिकट दिया है जबकि सपा-बसपा की ओर से अजीत बलियान को मैदान में उतारा गया है. सपा-बसपा के गठबंधन के बाद बीजेपी के लिए इस बार कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि पिछली बार सतीश गौतम ने 26 फीसदी से ज्यादा वोट से बसपा उम्मीदवार को शिकस्त दी थी. अगर हम पिछली बार के सपा-बसपा के वोट जोड़ भी दें तो भी गौतम के वोट से कम है.

2014 का परिणाम: सतीश कुमार गौतम (बीजेपी) ने बीएसपी के अरविंद कुमार सिंह को 26.94 फीसदी के मारिजन से हराया था.

2009 का परिणाम: बीएसपी के राजकुमारी चौहान ने सपा के जफर आलम को 2.39 फीसदी की मार्जिन से हराया था.

5. धर्मपुरी, तमिलनाडु

मुकाबला: तमिलनाडु की धर्मपुरी लोकसभा सीट पर सीधा मुकाबला पीएमके के हाईप्रोफाइल उम्मीदवार अंबुमणि रामदौस और डीएमके के एस सेंथिल कुमार के बीच है.

जमीनी हकीकत: इस सीट के लिए दो बड़ी पार्टियां कांग्रेस और बीजेपी तमिलनाडु की क्षेत्रीय पार्टियों के उम्मीदवारों को समर्थन दे रही हैं. वेनियार प्रभाव वाले इस सीट पर अंबुमणि रामादौस को एंटी-इनकंबेंसी की चुनौती है. उनका सीधा मुकाबला कांग्रेस समर्थित डीएमके से है. डीएमके उम्मीदवार सेंथिल कुमार पेशे से डॉक्टर हैं और धर्मपुरी में काफी पॉपुलर है. अंबुमणि और सेंथिल कुमार दोनों वेनियार समुदाय से हैं लेकिन अंबुमणि के लिए एएमएमके जैसी छोटी पार्टियां चुनौती खड़ी कर सकती हैं. स्थानीय रिपोर्ट बताते हैं कि एएमएमके अंबुमणि को समर्थन देने वाली एआईएडीएमके के वोटों का बंटवारा कर सकती हैं.

2014 का परिणाम: पीएमके के अंबुमणि रामादौस ने एआईएडीएमके के पी एस मोहन को 7 फीसदी वोटर मार्जिन के साथ हराया.

2009 का परिणाम: डीएमके के आर थमरसेलवन ने पीएमके के डीआर सेंथिल को 17 फीसदी वोट मार्जिन से हराया था.

चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़लेटर

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay