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हार्दिक पटेल: पाटीदार आंदोलन का वो चेहरा, जिसने बदल दी गुजरात की राजनीति

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस में आ गए है. पाटीदार युवा नेता गुजरात की जामनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं.

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aajtak.in अहमदाबाद, 15 March 2019
हार्दिक पटेल: पाटीदार आंदोलन का वो चेहरा, जिसने बदल दी गुजरात की राजनीति हार्दिक पटेल (फाइल फोटो-PTI)

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस में आ गए है. पाटीदार युवा नेता गुजरात की जामनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. हार्दिक पटेल का जन्म 20 जुलाई, 1993 को गुजराती पटेल परिवार में हुआ था. उनके पिता भरत पटेल बीजेपी के कार्यकर्ताओं थे. 2004 में हार्दिक पटेल के पिता विरामगाम शहर में बस गए थे. यहां हार्दिक ने बारहवीं तक की पढ़ाई की. हार्दिक ने अहमदाबाद के सहजनवां कॉलेज से बी. कॉम की डिग्री हासिल की.

इसी कॉलेज से हार्दिक की राजनीति में एंट्री हुई. छात्रसंघ के चुनाव में हार्दिक पटेल महासचिव पद के लिए लड़े और निर्विरोध जीते. इस दौरान हार्दिक पटेल ने कई विरामगाम में कई सामाजिक कार्य किए. 31 अक्टूबर 2012 को हार्दिक पटेल, पाटीदारों के युवा संगठन सरदार पटेल ग्रुप (SPG) में शामिल हुए और एक महीने से भी कम समय में

अपनी वीरमगाम इकाई के अध्यक्ष बने.

हार्दिक पटेल ने इसके बाद पाटीदारों के लिए एक लंबा आंदोलन चलाया. दरअसल, आर्थिक रूप से संपन्न पाटीदार युवाओं को सरकारी नौकरियां हासिल करने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था. पाटीदार इसके पीछे आरक्षण को जिम्मेदार मानते थे. गुजरात में पाटीदारों की जमीनों का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण हुआ, लेकिन उन्हें नौकरियां नहीं मिली. इसके बाद हार्दिक ने पाटीदारों के आरक्षण की मांग को उठाना शुरू किया. हालांकि, 2015 में लालजी पटेल के साथ हुआ विवाद के बाद हार्दिक को SPG से हटा दिया गया.

जुलाई 2015 में, हार्दिक पटेल की बहन मोनिका, राज्य सरकार की छात्रवृत्ति नहीं, जबकि उससे कम नंबर पाने वाली ओबीसी कोटे की एक सहेली को छात्रवृत्ति मिल गई. इसके बाद हार्दिक पटेल ने पाटीदारों के आरक्षण के लिए आंदोलन शुरू किया. उन्होंने पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) का गठन किया, जिसका मकसद पाटीदारों को आरक्षण दिलाना था. पाटीदारों तक हार्दिक ने अपने आंदोलन की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाई और 6 जुलाई, 2017 को गुजरात के विसनगर में रैली की.

इसके बाद हार्दिक ने गुजरात में कई रैलियां की. इन रैलियों में पाटीदार समाज के लाखों युवा इकट्ठा होने लगे. 25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद में हार्दिक पटेल ने एक बड़ी रैली करके पूरे प्रदेश के सामने अपनी ताकत दिखाई. इस दिन को पाटीदार क्रांति दिवस (पाटीदार क्रांति दिवस) के रूप में घोषित किया गया. उसी शाम हार्दिक को अहमदाबाद सिटी पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया था, जब वह भूख हड़ताल पर बैठे. इसके बाद हिंसा भड़क उठी और मजबूरन गुजरात सरकार को सेना बुलाना पड़ा.

9 सितंबर 2015 को हार्दिक पटेल ने पटेल नवनिर्माण सेना (PNS) का गठन किया. इसका मकसद पाटीदारों, गुर्जरों समेत कई जातियों को आरक्षण दिलाना था. 18 अक्टूबर 2015 को हार्दिक पटेल के खिलाफ राजकोट में भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा का अपमान करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया. इसके अलावा भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (एकदिवसीय) क्रिकेट मैच को बाधित करने की कोशिश के लिए हार्दिक को हिरासत में लिया गया था.

19 अक्टूबर 2015 को सूरत में 'हत्या पुलिस' के बारे में कथित टिप्पणी को लेकर राजद्रोह के आरोपों के तहत पटेल पर मामला दर्ज किया गया था. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. 15 जुलाई 2016 को, पटेल को इस शर्त पर जमानत दी गई थी कि वह छह महीने के लिए राज्य से बाहर रहेंगे और नौ महीने के लिए मेहसाणा से बाहर रहेंगे. इस अवधि के लिए वह उदयपुर चले गए.

फरवरी 2017 में, यह घोषणा की गई कि हार्दिक पटेल गुजरात में शिवसेना के चुनावी अभियान का नेतृत्व करेंगे. हालांकि, बाद में उन्होंने सेना के साथ न जाकर कांग्रेस का समर्थन किया. गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान हार्दिक पटेल की करीबी चिराग पटेल और केतन पटेल ने उन पर कई आरोप लगाए. आंदोलन के धन के दुरुपयोग समेत उन पर कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी से गुप्त रूप से मिलने के भी आरोप लगे. हालांकि, हार्दिक ने इससे इंकार किया. 25 साल की उम्र पूरी होने के कारण हार्दिक विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़ पाए थे.

नवंबर 2017 में हार्दिक पटेल का कथित सेक्स टेप सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पटेल ने दावा किया कि वह गंदी राजनीति का शिकार हुए हैं और वीडियो ने केवल यह साबित किया कि वह नपुंसक नहीं हैं. 25 जुलाई, 2018 को हार्दिक पटेल और उनके दो सहयोगियों - लालजी पटेल व एके पटेल को दंगा, आगजनी, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत कई धाराओं में दोषी पाया गया. तीनों को दो साल की जेल के अलावा 50,000 का जुर्माना लगाया गया, लेकिन फैसले के तुरंत बाद उन्हें जमानत मिल गई थी.

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