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क्या इस बार पिता की विरासत वाली सीट बचा पाएंगी मीरा कुमार?

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मीरा कुमार को बिहार के सासाराम से टिकट दिया था, जहां उनको हार का सामना करना पड़ा था. अब एक बार फिर से कांग्रेस ने सासाराम से मीरा कुमार को चुनावी मैदान में उतारा है. आम चुनाव 2019 में सातवें और आखिरी चरण में सासाराम लोकसभा सीट के लिए मतदान होगा.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 18 May 2019
क्या इस बार पिता की विरासत वाली सीट बचा पाएंगी मीरा कुमार? मीरा कुमार

मीरा कुमार का नाम कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शुमार है. कांग्रेस की ओर से मीरा कुमार राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार में भी रह चुकी हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मीरा कुमार को बिहार के सासाराम से टिकट दिया था, जहां उनको हार का सामना करना पड़ा था. पूर्वी बिहार की बेहद महत्वपूर्ण लोकसभा सीट सासाराम को गेट वे ऑफ बिहार भी कहा जाता है. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में मीरा कुमार को कांग्रेस ने फिर से सासाराम से कांग्रेस ने चुनावी मैदान में उतारा है. सासाराम लोकसभा सीट उनके पिता की विरासत वाली सीट के तौर पर पहचानी जाती है.

निजी जिंदगी

बिहार के कांग्रेस नेता और नेहरू कैबिनेट के सबसे यंग सदस्य मेंबर जगजीवन राम और पत्नी इंद्राणी देवी की बेटी मीरा का जन्म 31 मार्च 1945 को पटना में हुआ. मीरा कुमार ने दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ और मिरांडा हाउस कॉलेजों से एमए और एलएलबी की पढ़ाई भी की है. साल 1973 में वह भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के लिए चुनी गईं. इसके बाद उन्होंने स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त के रूप में कई सालों तक अपनी सेवाएं भी दीं लेकिन बाद में उन्होंने अफसरशाही छोड़कर राजनीति में आने का फैसला किया. मीरा कुमार अंग्रेजी, स्‍‍पेनिश, हिंदी, संस्कृत, भोजपुरी भाषाओं की जानकार है. मीरा कुमार की शादी बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री सुमित्रा देवी के बड़े बेटे मंजुल कुमार से हुई. इनके एक बेटा और दो बेटियां है.

राजनीति करियर

80 के दशक में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाली मीरा कुमार उस वक्त चर्चा में आईं, जब उन्होंने 1985 में कांग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश की बिजनौर सीट से चुनाव लड़ा और रामविलास पासवान और मायावती जैसे दिग्गज दलित नेताओं को धूल चटा दी. मीरा कुमार पांच बार सांसद रह चुकी हैं. 1989 में मीरा कुमार पिता की सीट सासाराम पर चुनाव लड़ने पहुंची लेकिन जनता दल के छेदी पासवान से हार गई. फिर अगले दो चुनाव 1996 और 1998 दिल्ली की करोल बाग सीट से लड़ीं और जीतीं. 1999 में मीरा बीजेपी की अनीता आर्या से यहां हार गईं. सासाराम से 2004 और 2009 में लगातार दो बार मीरा कुमार यहां से सांसद रहीं. 2009 में यूपीए की सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी. लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उन्हें लोकसभा का स्पीकर चुन लिया गया. 2009 में बिहार के सासाराम से जीतकर आईं मीरा कुमार देश को पहली महिला स्पीकर बनीं. राष्ट्रपति चुनाव के लिए NDA उम्मीदवार के तौर पर रामनाथ कोविंद के खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाया था.

2014 में वोट शेयर

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में मीरा कुमार सासाराम से हार गई थीं. उनको बीजेपी के छेदी पासवान ने शिकस्त दी. इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जहां 366087 वोट हासिल हुए तो वहीं कांग्रेस की मीरा कुमार को 302760 वोट ही मिले. हालांकि साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मीरा कुमार ने सासाराम लोकसभा सीट से जीत हासिल की थी. उस दौरान उनको कुल 192213 वोट मिले थे तो वहीं बीजेपी के मुनि लाल को 149259 वोट हासिल हुए थे.

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