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मैसूर लोकसभा सीट पर कांग्रेस-BJP के बीच कड़ी टक्कर का इतिहास

मैसूर लोकसभा सीट पर 2014 के चुनाव में बीजेपी के प्रताप सिम्हा ने कांग्रेस के अब्बगोरू एच विश्वनाथ को 31 हजार वोटों से हराया. प्रताप सिम्हा को 5.03 लाख और अब्बगोरू एच विश्वनाथ को 4.72 लाख वोट मिले थे.

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aajtak.in
अनुग्रह मिश्र नई दिल्ली, 19 March 2019
मैसूर लोकसभा सीट पर कांग्रेस-BJP के बीच कड़ी टक्कर का इतिहास Mysore Lok Sabha constituency (Photo: BJP MP Pratap Simha)

कर्नाटक की अहम लोकसभा सीटों में से एक मैसूर सीट पर बीजेपी और कांग्रेस में कड़ी टक्कर होती है. वोडेयार-मैसूर जिले में फैली इस सीट पर पिछली बार बीजेपी के प्रताप सिम्हा जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के सांसद अब्बगोरू एच विश्वनाथ को करीब 30 हजार मतों से मात दी थी. इस सीट पर 18 अप्रैल को मतदान होगा.

टीपू सुल्तान ने साल 1799 तक इस शहर पर राज किया. श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में टीपू सुल्तान की मौत हो गई और फिर मैसूर पर अंग्रेजों ने शासन किया. टीपू सुल्तान के मैसूर पैलेस यानी अम्बा विलास महल के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध मैसूर कावेरी और काबीनी नदी के किनारे बसा है. नदियों के किनारे होने के कारण है कि इस इलाके की मुख्य आजीविका खेती पर निर्भर है. इसके अलावा मैसूर में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक घूमने जाते हैं. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 8 विधानसभा सीटें आती हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

1977 में वजूद में आई मैसूर लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. 1977 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के एचडी तुलसीदास जीते थे. इसके बाद 1980 में इस सीट से एम. राजशेखरामुर्थी जीते. 1984 और 1989 का चुनाव कांग्रेस के ही श्रीकांतादत्ता नरसिंहाराज वाडियर जीते. 1991 में कांग्रेस के चंद्रप्रभा जीतीं. 1996 में एक बार फिर कांग्रेस के टिकट पर श्रीकांतादत्ता नरसिंहाराज वाडियर जीतने में कामयाब रहे.

1996 में इस सीट पर पहली बार बीजेपी का खाता खुला और सीएच विजयशंकर जीते. 1999 में कांग्रेस ने फिर वापसी की. कांग्रेस के टिकट पर श्रीकांतादत्ता नरसिंहाराज वाडियर चौथी बार संसद पहुंचे. इसके बाद 2004 के चुनाव में एक बार फिर बीजेपी के सीएच विजयशंकर जीतने में कामयाब हुए. हालांकि, 2009 का चुनाव वह हार गए और कांग्रेस के टिकट पर अब्बगोरू एच विश्वनाथ जीते. 2014 के चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के प्रताप सिम्हा ने जीत दर्ज की.

सामाजिक तानाबाना

इस सीट पर लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय का दबादबा है. बताया जाता है कि दोनों समुदायों की आबादी करीब 3 लाख है. इसके बाद खुरुबास करीब 1.30 लाख, मुस्लिम करीब 1.50 लाख, नायाकस करीब 1 लाख, ओबीसी करीब 2 लाख, ब्राह्मण करीब 1.30 लाख, दलित करीब 2.20 लाख हैं. इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 17.23 लाख है. इनमें 8.67 लाख पुरुष और 8.55 लाख महिला वोटर हैं.

इस लोकसभा सीट के अतंर्गत आठ विधानसभा सीटें (मदिकेरी, विराजपेट, पीरीरपटाना, हुनसुर, चामुंडेश्वरी, कृष्णराज, चामराजा, नरसिम्हराजा) आती हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 3 सीट (मदिकेरी, विराजपेट, चामराजा), जेडीएस ने 4 सीट (पीरीरपटाना, हुनसुर, चामुंडेश्वरी, कृष्णराज) और कांग्रेस ने एक सीट (नरसिम्हराजा) पर जीत दर्ज की थी.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के प्रताप सिम्हा ने कांग्रेस के अब्बगोरू एच विश्वनाथ को 31 हजार वोटों से हराया. प्रताप सिम्हा को 5.03 लाख और अब्बगोरू एच विश्वनाथ को 4.72 लाख वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर रहे जेडीएस के चंद्रशेखराह को 1.38 लाख वोट मिले थे. इस चुनाव में बसपा चौथे और आम आदमी पार्टी 5वें स्थान पर रही थी. 

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

मैसूर से सांसद प्रताप सिम्हा पेशे पत्रकार थे. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 1999 में कन्नड़ अखबार विजया कर्नाटक में बतौर ट्रेनी शुरू की थी. इस दौरान उन्होंने कई अखबार और मैगजीन में काम किया. 2014 में उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन की और मैसूर से चुनाव लड़े. उन्होंने सांसद बनने के बाद कहा था कि 33 दिनों में वह एक स्तंभकार से सांसद बन गए. जून 2015 में सिम्हा भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य बने थे.

चुनाव में दिए गए हलफनामे के मुताबिक, प्रताप सिम्हा के पास 63.21 लाख की संपत्ति है. इसमें 12.21 लाख की चल संपत्ति और 51 लाख की अचल संपत्ति शामिल है. उनके ऊपर 44 लाख की देनदारी है. मार्च, 2019 में तक mplads.gov.in पर मौजूद आंकड़ों के अनुसार, प्रताप सिम्हा ने अभी तक अपनी सांसद निधि से क्षेत्र के विकास के लिए 22.84 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. उन्हें सांसद निधि से अभी तक 22.89 करोड़ मिले हैं. उन्होंने सांसद निधि की 99.50 फीसदी राशि खर्च की है.

संसद में सिम्हा की प्रदर्शन की बात करें तो वह लोकसभा की 331 बैठकों में से 293 में मौजूद रहे हैं. इसके अलावा बीजेपी सांसद ने 684 सवाल किए और 11 चर्चाओं में हिस्सा लिया.

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