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देवास लोकसभा सीट: क्या बीजेपी को मिलेगी एक और जीत या कांग्रेस करेगी कमाल?

मध्य प्रदेश की देवास लोकसभा सीट राज्य की एक ऐसी सीट रही है, जहां से बीजेपी के दिग्गज नेता थावरचंद गहलोत चुनाव लड़ चुके हैं. यह सीट 2008 में अस्तित्व में आई. शाजापुर लोकसभा सीट को खत्म करके बनाई गई देवास लोकसभा सीट पर दो चुनाव हुए हैं, जिसमें से एक में कांग्रेस और एक में बीजेपी को जीत मिली है.

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देवांग दुबेनई दिल्ली, 09 February 2019
देवास लोकसभा सीट: क्या बीजेपी को मिलेगी एक और जीत या कांग्रेस करेगी कमाल? बीजेपी(फोटो- पीटीआई)

मध्य प्रदेश की देवास लोकसभा सीट राज्य की एक ऐसी सीट रही है, जहां से बीजेपी के दिग्गज नेता थावरचंद गहलोत चुनाव लड़ चुके हैं. यह सीट 2008 में अस्तित्व में आई. शाजापुर लोकसभा सीट को खत्म करके बनाई गई देवास लोकसभा सीट पर दो चुनाव हुए हैं, जिसमें से एक में कांग्रेस और एक में बीजेपी को जीत मिली है. इस सीट से 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने वाले बीजेपी के मनोहर ऊंटवाल ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में आगर सीट से भी जीत हासिल की.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

देवास लोकसभा सीट 2008 अस्तित्व में आई. शाजापुर लोकसभा सीट को खत्म करके देवास लोकसभा सीट बनाई गई. यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. 2009 में हुए यहां पर चुनाव में कांग्रेस के सज्जन सिंह को जीत मिली थी. उन्होंने मोदी सरकार में मंत्री थावरचंद गहलोत को मात दी थी. हालांकि इसके अगले चुनाव में बीजेपी ने बदला लेते हुए इस सीट पर कब्जा किया.

बीजेपी के मनोहर ऊंटवाल ने देवास लोकसभा सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन उन्होंने 2018 का विधानसभा चुनाव लड़ा और आगर सीट पर उन्होंने विजय हासिल की.

ऐसे में देखा जाए तो इस सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बराबरी का मुकाबला रहा है. दोनों को यहां एक-एक चुनाव में जीत मिली है. देवास लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं.

आष्टा, शुजालपुर,देवास,आगर,कालापीपल, हटपिपल्या, शाजापुर और सोनकच्छ यहां की विधानसभा सीटें हैं. यहां की 8 विधानसभा सीटों में से 4 पर बीजेपी और 4 पर कांग्रेस का कब्जा है.

2014 का जनादेश

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के मनोहर ऊंटवाल ने कांग्रेस के सज्जन सिंह को हराया था. इस चुनाव में मनहोर ऊंटवाल को 665646(58.19 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं सज्जन सिंह को 405333(35.49 फीसदी) वोट मिले थे. दोनों के बीच हार जीत का अंतर 260313 वोटों का था. वहीं बसपा 1.51 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.

इससे पहले 2009 के चुनाव में कांग्रेस के सज्जन सिंह को जीत मिली थी. उन्होंने बीजेपी के दिग्गज नेता थावरचंद गहलोत को मात दी थी. सज्जन सिंह को 376421(48.08 फीसदी) वोट मिले थे तो वहीं थावरतंद गहलोत को 360964(46.1 फीसदी) वोट मिले थे.दोनों के बीच हार जीत का अंतर 15457 वोटों का था. इस चुनाव में बसपा 1.37 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी.

सामाजिक ताना-बाना

देवास जिला इंदौर से करीब 35 किमी की दूरी पर है. यहां माता की टेकरी पर चामुण्डा माता और तुलजा भवानी माता के प्रसिद्ध मन्दिर हैं ,जिसके दर्शन के लिये लोग दूर-दूर से आते हैं. देवास एक औद्योगिक नगर है.

यह एक ऐसा शहर है, जहा दो वंशों ने राज किया. होलकर राजवंश और पंवार राजवंश ने यहां पर राज किया. देवास में बैंक नोट प्रेस भी है. आर्थिक व्यय विभाग की औद्योगिक इकार्इ बैंक नोट प्रेस, देवास की संकल्पना 1969 में की गर्इ और 1974 में इसकी स्थापना हुर्इ.

2011 की जनगणना के मुताबिक देवास की जनसंख्या 24,85,019 है. इसमें से 73.29 फीसदी लोग ग्रामीण इलाके में रहते हैं और 26.71 फीसदी लोग शहरी क्षेत्र में रहते हैं. यहां पर 24.29 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति की है और 2.69 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है. चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में यहां पर 16,17, 215 मतदाता थे. इसमें से 7,73,660 महिला मतदाता और 8,43, 555 पुरूष मतदाता थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 70.74 फीसदी मतदान हुआ था.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

 55 साल के मनोहर ऊंटवाल 2014 में चुनाव जीतकर पहली बार सांसद बने. संसद में उनकी उपस्थिति 58 फीसदी रही. उन्होंने इस दौरान 2 बहस में हिस्सा लिया और 52 सवाल किए. मनोहर ऊंटवाल को उनके निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 25 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे. जो कि ब्याज की रकम मिलाकर 25.18 करोड़ हो गई थी. इसमें से उन्होंने 22.23 यानी मूल आवंटित फंड का 86.91 फीसदी खर्च किया. उनका करीब 2.96 करोड़ रुपये का फंड बिना खर्च किए रह गया.

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