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गुजरात: आदिवासी बाहुल्य उदयपुर में लगेगी बीजेपी की हैट्रिक?

पिछले दो चुनाव यानी 2009 और 2014 में रामसिंह ने नारणभाई का स्वाद बिगाड़ दिया. 2009 में हालांकि, नारणभाई कम अंतर से हारे, लेकिन 2014 में मोदी लहर के साथ रामसिंह राठवा काफी आगे निकल गए.

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aajtak.in
जावेद अख़्तर नई दिल्ली, 09 April 2019
गुजरात: आदिवासी बाहुल्य उदयपुर में लगेगी बीजेपी की हैट्रिक? Chhota Udepur Seat

छोटा उदयपुर जिले के अंतर्गत आने वाली यह लोकसभा सीट पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी. अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित इस लोकसभा क्षेत्र में आदिवासी समाज की बड़ी संख्या है. पिछले दो चुनाव से यहां बीजेपी को जीत मिलती रही है और लगातार दो बार रामसिंह राठवा सांसद बने हैं.

राजनीतिक पृष्ठभूमि

छोटा उदयपुर सीट पर पहला चुनाव इमरजेंसी के बाद 1977 में हुआ था. इस पहले चुनाव में ही कांग्रेस ने यहां से बाजी मारी थी और अमरसिंह राठवा पहले सांसद बने थे. इसके बाद 1980 और 1984 के चुनाव में भी अमरसिंह राठवा ने परचम लहराया और संसद पहुंचे. 1989 के चुनाव में यहां परिवर्तन हुआ और जनता दल के टिकट पर नारणभाई राठवा ने अमरसिंह राठवा को शिकस्त दी. जनता दल का विघटन होने पर उन्होंने अगला चुनाव यानी 1991 का आम चुनाव जनता दल (गुजरात) के टिकट पर लड़ा और एक बार फिर जीत दर्ज की.

नारणभाई राठवा ने अब कांग्रेस का हाथ थाम लिया और 1996 के चुनाव में फिर जीत गए. 1998 का चुनाव भी नारणभाई राठवा ने कांग्रेस के टिकट पर अपने नाम कर लिया. लेकिन 1999 में उनकी जीत पर बीजेपी के रामसिंह राठवा ने ब्रेक लगा दिया. हालांकि, रामसिंह बहुत ही मामूली अंतर से उन्हें हरा पाए, लेकिन इस चुनाव में नारणभाई का विजयरथ रुक गया. 2004 में जब देशभर में बीजेपी का शाइनिंग इंडिया नारा फेल हुआ तो नारणभाई ने फिर वापसी कर ली और रामसिंह राठवा को हरा दिया.

हालांकि, पिछले दो चुनाव यानी 2009 और 2014 में रामसिंह ने नारणभाई का स्वाद बिगाड़ दिया. 2009 में हालांकि, नारणभाई कम अंतर से हारे, लेकिन 2014 में मोदी लहर के साथ रामसिंह राठवा काफी आगे निकल गए.

सीट का सामाजिक ताना-बाना

2011 की जनगणना के मुताबिक, यहां की कुल आबादी 22,90,199 है. इसमें से 87 फीसदी आबादी ग्रामीण और 13 फीसदी शहरी है. अनुसूचित जाति (SC) की जनसंख्या 3.23 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति (ST) 56.27 प्रतिशत है.

2018 की वोटर लिस्ट के मुताबिक, यहां वोटरों की कुल संख्या 16,40,277 है. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कुल मतदाता 15,36,305 थे. इनमें से पुरुष मतदाता 7,98,160 और महिला मतदाता 7,38,145 थे. चुनाव में 5,93,192 पुरुष और 5,07,350 महिलाओं ने अपने मत का इस्तेमाल किया था.

छोटा उदयपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीट हैं. इनमें हलोल, सानखेड़ा, नांदोड, छोटा उदयपुर, दभोई, जेतपुर, पादरा सीट हैं. सानखेड़ा, नांदोड, छोटा उदयपुर और जेतपुर सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. जबकि बाकी सीटें सामान्य हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में हलोल से बीजेपी, सानखेड़ा से बीजेपी, नांदोड से कांग्रेस, छोटा उदयपुर से कांग्रेस, दभोई से बीजेपी, जेतपुर से कांग्रेस और पादरा से कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. यानी इस लोकसभा के तहत आने वाली सात विधानसभा में से 3 सीट बीजेपी और 4 कांग्रेस ने जीती थीं.

2014 लोकसभा चुनाव का जनादेश

रामसिंह राठवा, बीजेपी- 607,916 वोट (55.2%)

नारणभाई राठवा, कांग्रेस- 428,187 (38.9%)

अर्जुनभाई राठवा, AAP- 23,116 (2.1%)

2014 चुनाव का वोटिंग पैटर्न

कुल मतदाता-   15,36,305

पुरुष मतदाता-   7,98,160

महिला मतदाता-  7,38,145

मतदान- 11,00,542 (71.6%)

सांसद का रिपोर्ट कार्ड

रामसिंह राठवा 1951 में पैदा हुए थे. रामसिंह पेंटिंग्स और ग्राफिक्स में डिप्लोमा होल्डर हैं. 1982-94 तक वह राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. इसके बाद 1999 में उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता.

लोकसभा में रामसिंह राठवा की उपस्थिती 89 फीसदी रही है. जबकि उन्होंने 28 बार संसद की बहस में हिस्सा लिया है. सवाल पूछने में उनका प्रदर्शन औसत से अच्छा रहा है और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कुल 498 सवाल पूछे हैं.

रामसिंह राठवा ने अपनी सांसद निधि से लगभग 80 फीसदी पैसा खर्च कर दिया. उनकी निधि से कुल 15.22 करोड़ रुपये आवंटित हुए, इनमें से 12.11 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए, जबकि 3.11 करोड़ रुपये बाकी रह गए. एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, रामसिंह राठवा की कुल संपत्ति करीब 4 करोड़ रुपये की है. इसमें से 1 करोड़ 18 लाख की चल संपत्ति है, जबकि 2 करोड़ 79 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.

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