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काराकाट: महागठबंधन में कुशवाहा, अब NDA के नए प्रत्याशी पर नजर

काराकाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र हैं. इनके नाम हैं-नोखा, गोह, डिहरी, ओबरा, काराकाट और नबीनगर.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 25 March 2019
काराकाट: महागठबंधन में कुशवाहा, अब NDA के नए प्रत्याशी पर नजर काराकाट के मौजूदा सांसद उपेंद्र कुशवाहा (PTI)

काराकाट लोकसभा सीट बिहार के 40 लोकसभा क्षेत्रों में एक है. पहले यह बिक्रमगंज संसदीय क्षेत्र में था लेकिन 2008 में इसे अलग सीट का दर्जा मिल गया. काराकाट रोहतास जिले में है जो नक्सली हिंसा के लिए बदनाम है. रोहतास जिला कभी उद्योग का केंद्र होता था लेकिन नक्सली हिंसा ने इसकी कमर तोड़ दी और अब वित्तीय रूप से पिछले और गरीब जिलों में इसका शुमार है. उपेंद्र कुशवाहा यहां से सांसद हैं जिन्होंने 2014 के चुनाव में आरजेडी की प्रत्याशी कांति सिंह को हराया था.

काराकाट के विधानसभा क्षेत्र

काराकाट लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र हैं. इनके नाम हैं-नोखा, गोह, डिहरी, ओबरा, काराकाट और नबीनगर.  2008 में काराकाट नया संसदीय क्षेत्र बना. इसके साथ ही बिक्रमगंज के संसदीय और विधानसभा क्षेत्र को हटा दिया गया. काराकाट में औरंगाबाद जिला के गोह, नबीनगर और ओबरा विधानसभा क्षेत्र हैं जबकि रोहतास जिले के नोखा, डिहरी और काराकाट को शामिल किया गया. नए परिसीमन में बिक्रमगंज विधानसभा और लोकसभा क्षेत्र का बदल दिया गया और बिक्रमगंज विधानसभा क्षेत्र को काराकाट से जोड़ दिया गया. यहां की एक भी विधानसभा सीट आरक्षित नहीं है और काराकाट लोकसभा जनरल सीट है.

2014 का लोकसभा चुनाव

काराकाट सीट पर 10 अप्रैल 2014 को लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ जिसमें राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के उपेंद्र कुशवाहा ने जीत दर्ज की. इस क्षेत्र में कुल 1580558 मतदाता हैं जिनमें 53.75 प्रतिशत पुरुष और 46.02 प्रतिशत महिलाएं हैं. यहां का लैंगिक अनुपात 860 है. अर्थात 1000 पुरुषों पर 860 महिलाएं हैं. 2014 के चुनाव में पूरे 790361 वोट पड़े. मतदा संपन्न कराने के लिए 1607 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे. इस सीट पर वोटर टर्नआउट 50.01 प्रतिशत रहा.

पिछले चुनाव में टॉप 5 कैंडिडेट

पिछले चुनाव में जो टॉप 5 कैंडिडेट चुनावी मैदान में थे उनके नाम हैं-उपेंद्र कुशवाहा (रालोसपा), कांति सिंह (आरजेडी), महाबली सिंह (जेडीयू), संजय किउ (बीएसपी) और राजा राम सिंह (सीपीआईएमएल). मैदान में कुल 15 उम्मीदवारों में उपेंद्र कुशवाहा टॉप पर रहे और उन्होंने कांति सिंह को हराया. कुशवाहा को 338892 (42.9 प्रतिशत) वोट मिले जबकि उपविजेता रहीं कांति सिंह को 233651 (29.58 प्रतिशत) वोट हासिल हुए. तीसरे स्थान पर जेडीयू के महाबली सिंह थे जिन्हें 76709 (9.71 प्रतिशत) वोट मिले. चौथे स्थान पर संजय किउ (45503-5.76 प्रतिशत) और पांचवें पर सीपीआईएमल के राजाराम सिंह थे जिन्हें 32686 (4.14 प्रतिशत) वोट मिले थे.

इस चुनाव में 10 अन्य उम्मीदवार भी रहे जिन्हें कुल 62486 वोट मिले थे. अन्य उम्मीदवारों ने समग्र वोट शेयर का 7.91 प्रतिशत अपने खाते में दर्ज कराया था. सभी पार्टियों का वोट शेयर देखें तो आरएलएसपी को 42.9, आरजेडी को 29.58 और जेडीयू को 9.71 प्रतिशत वोट मिले.

कौन हैं उपेंद्र कुशवाहा

उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के संस्थापक हैं. पूर्व में यह पार्टी एनडीए की सहयोगी थी लेकिन पिछले महीने सीट शेयरिंग को लेकर दोनों पार्टियों में बात बिगड़ गई और कुशवाहा एनडीए छोड़कर विपक्षी धड़े के महागठबंधन में शामिल हो गए और केंद्र की मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. इससे पहले वे मानव संसाधन मंत्रालय में जूनियर मंत्री थे. कुशवाहा केंद्र में ग्रामीण विकास, पंचायती राज , पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में राज्यमंत्री का ओहदा संभाल चुके हैं. एनडीए छोड़ने से पहले कुशवाहा ने इशारा कर दिया था कि उन्हें सम्मानजनक सीटें नहीं मिलीं तो वे बीजेपी नीत गठबंधन से अलग हो जाएंगे. रालोसपा के पास काराकाट के अलावा 2 और सीटें हैं.

कुशवाहा की संसदीय गतिविधि

उपेंद्र कुशवाहा की संसद में हाजिरी 82 प्रतिशत रही है. उन्होंने 1 जून 2014 से 13 फरवरी 2018 तक 40 बहसों में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने न तो कोई सवाल पूछा और न ही प्राइवेट मेंबल बिल पास कराया. 2018 में मोदी कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने सामान्य सांसद के तौर पर शीत सत्र के सिर्फ एक बहस में हिस्सा लिया. यह बहस 8 जनवरी 2019 को संविधान संशोधन (124वां) बिल, 2109 के उपलक्ष्य में संसद में कराई गई थी.

सांसद निधि का खर्च

काराकाट लोकसभा क्षेत्र के लिए 25 करोड़ रुपए नियोजित है. भारत सरकार ने 20 करोड़ जारी किए. ब्याज के साथ 20.48 करोड़ रुपए की राशि काराकाट क्षेत्र को मिली जिसमें 19.22 करोड़ रुपए पारित हुए.  इसमें कुल साढ़े 15 करोड़ रुपए खर्च हुए. यह खर्च 77.52 प्रतिशत है जबकि 4.96 करोड़ बिना खर्च के बचे रह गए.<

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