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कल्याण लोकसभा सीट: शिवसेना का गढ़, MNS बिगाड़ देती है समीकरण

कल्याण लोकसभा सीट पर पिछले कुछ चुनाव से किसी भी पार्टी को एकतरफ़ा जीत नहीं मिली है. क्योंकि यहां महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) हर चुनाव में समीकरण बिगाड़ देती है. देखा जाए तो 2009 और 2014 के चुनाव में एमएनएस के उम्मीदवार ने जहां शिवसेना उम्मीदवार के जीत का अंतर कम कर दिया था तो वहीं एनसीपी के जीत के गणित को बिगाड़ दिया.

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aajtak.in [ Edited By: आदित्य बिड़वई ]नई दिल्ली, 07 March 2019
कल्याण लोकसभा सीट: शिवसेना का गढ़, MNS बिगाड़ देती है समीकरण कल्याण लोकसभा सीट.

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में आने वाली कल्याण लोकसभा सीट पर हर बार की तरह इस बार भी शिवसेना और एनसीपी के बीच कड़े मुकाबले की उम्मीद है. पिछले दो बार से यहां लगातार शिवसेना चुनाव जीतते आ रही है. उम्मीदवार बदलने के बावजूद भी यहां राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दूसरे स्थान पर रही. 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से शिवसेना की टिकट पर श्रीकांत शिंदे चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. उन्होंने एनसीपी के आनंद परांजपे को चुनाव हराया था.

दिलचस्प बात तो यह है कि आनंद परांजपे 2009 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना की टिकट से चुनकर आए थे. लेकिन 2014 लोकसभा के पहले वो शिवसेना छोड़कर एनसीपी से जुड़ गए. वो चुनाव में भी उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

MNS बिगाड़ देती है समीकरण...

कल्याण लोकसभा सीट पर पिछले कुछ चुनाव से किसी भी पार्टी को एकतरफ़ा जीत नहीं मिली है. क्योंकि यहां महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (MNS) हर चुनाव में समीकरण बिगाड़ देती है. देखा जाए तो 2009 और 2014 के चुनाव में एमएनएस के उम्मीदवार ने जहां शिवसेना उम्मीदवार के जीत का अंतर कम कर दिया था तो वहीं एनसीपी के जीत के गणित को बिगाड़ दिया.

क्या रहा है कल्याण लोकसभा सीट का इतिहास...

कल्याण लोकसभा सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. इसके पहले यह ठाणे लोकसभा के अंतर्गत आती थी. कल्याण लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डालें तो यह सीट शिवसेना-बीजेपी का गढ़ माना जाता है. यहां से बीजेपी के राम कापसे 1989 से 1996 तक चुनाव जीतते आए.

शिवसेना लगातार जीतती आई है यहां....

महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना के गठबंधन होने के बाद यह सीट शिवसेना के खाते में चली गई. शिवसेना ने प्रकाश परांजपे को टिकट दिया वो जीतकर भी आए. वो 1996 से 2008 तक लगातार जीते और सांसद रहे. उनके निधन के बाद शिवसेना ने प्रकाश परांजपे के बेटे आनंद परांजपे को टिकट दिया. आनंद ने पिता की विरासत को संभाला और चुनाव जीते.

शिवसेना से अलग हुए और हार गए...

आनंद परांजपे कल्याण से सांसद चुने गए लेकिन कुछ ही समय बाद शिवसेना के साथ उनकी कटुता पैदा हो गई. इसका असर यह हुआ कि शिवसेना से वो दूर हो गए और उन्होंने एनसीपी की सदस्यता ले ली. 2014 में आनंद एनसीपी से चुनाव में उतरे और हार गए.

क्या है विधानसभा की स्थिति...

कल्याण लोकसभा के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं. इनमें से अधिकतर विधानसभा सीटों पर बीजेपी और शिवसेना का दबदबा है. अंबरनाथ विधानसभा क्षेत्र पर शिवसेना, उल्हासनगर में एनसीपी, कल्याण पूर्व में निर्दलीय विधायक का कब्ज़ा है. वहीं, डोंबिवली में बीजेपी, कल्याण ग्रामीण सीट पर शिवसेना और मुम्ब्रा कलवा में एनसीपी का कब्ज़ा है.

कैसा है जातीय समीकरण....

कल्याण लोकसभा क्षेत्र में उत्तर भारतीय, सिंधी समाज, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है. इसके अलावा मराठा और सवर्ण समाज के लोगों का भी अच्छा ख़ासा दबदबा है. लेकिन उत्तर भारतीय और मुस्लिम समुदाय का वोट यहां निर्णायक साबित होता है.

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