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गोवा में नया सियासी ड्रामा, BJP सरकार ने एक हफ्ते में ही डिप्टी सीएम को किया बर्खास्त

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी की विधायी पार्टी का मंगलवार देर रात पौने 2 बजे भारतीय जनता पार्टी में विलय हो गया. गोवा विधानसभा में एमजीपी के 3 विधायकों में से 2 विधायक मनोहर अजगांवकर और दीपक पावस्कर बीजेपी में शामिल हो गए. जबकि एक अन्य विधायक जो पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री बने थे, को अब हटा दिया गया है.

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aajtak.in
ऋचीक मिश्रा नई दिल्ली, 27 March 2019
गोवा में नया सियासी ड्रामा, BJP सरकार ने एक हफ्ते में ही डिप्टी सीएम को किया बर्खास्त विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपते एमजीपी विधायक

लोकसभा चुनाव के जोर के इतर गोवा की सियासत में लगातार उथल-पुथल हो रहा है. मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद पिछले हफ्ते प्रमोद सावंत की अगुवाई में बीजेपी की नई सरकार के शपथ ग्रहण के महज एक हफ्ते में ही उपमुख्यमंत्री सुदिन धवालिकर को पद से हटा दिया गया है. बीती रात बीजेपी की साझीदार पार्टी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) के 2 विधायक बीजेपी में शामिल हो गए जिससे सदन में एमजीपी पार्टी का एक ही विधायक रह गया.

इससे पहले मंगलवार और बुधवार की रात (1:45 बजे) महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) की सदन में पार्टी की विधायी इकाई का बीजेपी में विलय हो गया. गोवा विधानसभा में एमजीपी के 3 विधायक हैं और इनमें से 2 विधायक मनोहर अजगांवकर और दीपक पावस्कर बीजेपी में शामिल हो गए.

गोवा में नई सरकार के अस्तित्व में आने के एक हफ्ते के अंदर राजनीतिक हलचल अचानक बढ़ गई. नए घटनाक्रम के बाद सीएम प्रमोद सावंत ने कहा कि बुधवार दोपहर 12 बजे गर्वनर के सामने इन दोनों को शपथ दिलाई जाएगी. मनोहर अजगांवकर और दीपक पावस्कर ने रात 1:45 बजे विधानसभा अध्यक्ष माइकल लोबो को विलय पत्र सौंपा, लेकिन इस पत्र में एमजीपी के तीसरे विधायक सुदिन धवालिकर के हस्ताक्षर नहीं था. हालांकि धवालिकर बीजेपी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार में डिप्टी सीएम थे.

सीएम प्रमोद सावंत ने गोवा विधानसभा के अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि विधानसभा में एमजीपी के 3 विधायक हैं, लेकिन अब दो-तिहाई विधायक बीजेपी के साथ आ गए हैं. अब 36 सदस्यों वाली गोवा विधानसभा में अब बीजेपी के 14 सदस्य हो गए हैं. बता दें कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत कम से कम दो तिहाई विधायक अगर एक साथ पार्टी छोड़ते हैं, तभी उन्हें एक अलग दल के रूप में मान्यता दी जा सकती है और इनकी विधानसभा सदस्यता भी बनी रहती है.

पावस्कर का दावा- मिलेगा सरकार में मंत्री पद

बीजेपी में शामिल हुए विधायक पावस्कर का दावा है कि अब उन्हें गोवा सरकार में मंत्री का पद मिलेगा. वहीं, ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि बुधवार को धवालिकर को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. बता दें कि मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद बीजेपी को गोवा में अपनी सरकार बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थीं. एमजीपी नेता धवालिकर भी सीएम बनना चाहते थे.

अजगांवकर बोले- पीएम जहां जाते हैं, वहां उन्हीं का नाम चलता है

गोवा के टूरिज्म मिनिस्टर और एमजीपी विधायक मनोहर अजगांवकर ने कहा कि अगली सरकार बीजेपी ही बनाएगी. क्योंकि पीएम मोदी जहां भी जाते हैं, लोग उन्हीं का नाम लेते हैं. एक दलित नेता के रूप में मैं एमजीपी में असुरक्षित महसूस कर रहा था.

कांग्रेस नेता कावथंकर ने कहा कि भाजपा में शामिल होना अपना अस्तित्व खत्म करना है

कांग्रेस नेता सुनील कावथंकर ने कहा कि बीजेपी में शामिल होना किसी भी दल के लिए अपना अस्तित्व खत्म करना है. यह एक बड़ा राजनीतिक खतरा है. इससे भविष्य में छोटे दलों का कोई वजूद ही नहीं रहेगा.

साबित किया था बहुमत

शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 20 मार्च को गोवा विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया. बीजेपी सरकार के पक्ष में कुल 20 वोट पड़े, यानी अभी के लिए बीजेपी सरकार से संकट टल गया है. बहुमत के लिए 19 विधायकों की जरूरत थी, लेकिन बीजेपी के पास एक ज्यादा था. मौजूदा आंकड़ों को देखें तो बीजेपी के पास अभी 12 विधायक, गोवा फॉरवर्ड पार्टी के 3 विधायक, एमजीपी के 3 और तीन निर्दलीय विधायक हैं यानी बीजेपी के पास कुल 21 विधायक हैं. जो कि बहुमत से 2 ज्यादा हैं. जबकि कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक एनसीपी का विधायक है.

पर्रिकर के बाद उठने लगे थे सवाल

मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद गोवा में बीजेपी के साथियों ने नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया, क्योंकि कई दल ऐसे थे जो पर्रिकर के नाम पर ही सरकार के समर्थन में आए थे. लेकिन लगातार चली बैठकों के बाद प्रमोद सावंत के नाम पर मुहर लगी और सहयोगी भी माने. गोवा में कुल 40 विधानसभाएं हैं, लेकिन अभी राज्य की 4 सीटें खाली हैं. जिनपर उपचुनाव होंगे. इसलिए अब गोवा में 36 विधानसभा सीटों के हिसाब से ही बहुमत तय हुआ, इसलिए बहुमत साबित करने के लिए सिर्फ 19 नंबर की जरूरत थी.

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