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लोकसभा चुनाव: बंगाल में दिलचस्प मुकाबला, ममता-BJP के खिलाफ कांग्रेस-लेफ्ट का गठबंधन

कांग्रेस और लेफ्ट ने बातचीत के दौरान तय किया कि कांग्रेस रायगंज और मुर्शिदाबाद पर अपने कैंडिडेट नहीं उतारेगी. दरअसल इन दोनों सीटों को लेकर ही पेच फंसा था. अभी इन दोनों ही सीटों पर सीपीएम का कब्जा है. रायगंज से मोहम्मद सलीम और मुर्शिदाबाद से बदरुद्दोजा खान सांसद हैं. हालांकि कांग्रेस नेता कहते हैं कि ये दोनों सीटें कांग्रेस की परंपरागत गढ़ है. कांग्रेस के मुताबिक 2014 में चौतरफा मुकाबले की वजह से रायगंज सीट से मोहम्मद सलीम चुनाव जीते थे.

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कुमार विक्रांत नई दिल्ली, 10 March 2019
लोकसभा चुनाव: बंगाल में दिलचस्प मुकाबला, ममता-BJP के खिलाफ कांग्रेस-लेफ्ट का गठबंधन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी (फोटो- विक्रम शर्मा)

लोकसभा चुनाव 2019 के तारीखों की घोषणा आज हो सकती है. इस बीच पश्चिम बंगाल के लिए कांग्रेस और लेफ्ट के लिए सीटों का बंटवारे पर बात बन गई है. रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस 17 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि सीपीएम 25 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस रायगंज और मुर्शिदाबाद में अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी. इस बारे में आधिकारिक घोषणा जल्द की जाएगी. लोकसभा चुनाव के हिसाब से पश्चिम बंगाल भारत का अहम सूबा है. यहां पर लोकसभा की 42 सीटें हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में 34 सीटें जीती थीं. जबकि 2 सीटें बीजेपी, 4 कांग्रेस और 2 सीपीएम ने जीती थीं.

बता दें कि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट के बीच गठबंधन पर चर्चा काफी दिनों से चल रही थी. इसी साल मार्च के शुरुआती दिनों में पश्चिम बंगाल कांग्रेस के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष सोमेन मित्रा समेत दूसरे नेताओं ने राहुल को राय दी कि ममता के बजाय सीपीएम से कांग्रेस को गठबंधन करना चाहिए.

कांग्रेस नेताओं ने राहुल को बताया कि सीएम ममता बनर्जी राज्य में चुनावी लड़ाई बीजेपी बनाम टीएमसी रखना चाहती हैं. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि टीएमसी पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के नेताओं को भी तोड़ती है.

पार्टी के नेताओं से राय लेने के बाद राहुल गांधी सीनियर सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से मिले. यहां दोनों नेताओं के बीच सीटों के बंटवारे पर डील फाइनल हुई. बता दें कि कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने के लिए 8 मार्च को सीपीएम ने रायगंज और मुर्शिदाबाद से अपने कैंडिडेट की घोषणा भी कर दी थी. इन दोनों सीटों पर इस बार भी मौजूदा सांसद मोहम्मद सलीम और बदरूद्दोजा खानरायगंज और मुर्शिदाबाद से चुनाव लड़ेंगे.

रायगंज और मुर्शिदाबाद पर फंसा था पेच

कांग्रेस और लेफ्ट ने बातचीत के दौरान तय किया कि कांग्रेस रायगंज और मुर्शिदाबाद में अपने कैंडिडेट नहीं उतारेगी. दरअसल इन दोनों सीटों को लेकर ही पेच फंसा था. अभी इन दोनों ही सीटों पर सीपीएम का कब्जा है. रायगंज से मोहम्मद सलीम और मुर्शिदाबाद से बदरुद्दोजा खान सांसद हैं. हालांकि कांग्रेस नेता कहते हैं कि ये दोनों सीटें कांग्रेस की परंपरागत गढ़ हैं. कांग्रेस के मुताबिक 2014 में चौतरफा मुकाबले की वजह से रायगंज सीट से मोहम्मद सलीम चुनाव जीते थे.

इससे पहले इस सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता प्रियरंजन दास मुंशी चुनाव जीता करते थे. वे यहां से 1999 और 2004 में सांसद रहे, उनके निधन के बाद 2009 में उनकी पत्नी दीपादास मुंशी यहां से सांसद बनीं. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में सीपीएम के मोहम्मद सलीम इस सीट से जीते. सूत्रों के मुताबिक लेफ्ट के साथ बातचीत के दौरान कांग्रेस ने दीपादास मुंशी के लिए सम्मानजनक समझौता रखा है. रिपोर्ट के मुताबिक बातचीत के दौरान तय हुआ है कि दीपादास मुंशी को लेफ्ट के समर्थन से राज्यसभा भेजा जाएगा.

विवाद की वजह रही दूसरी सीट मुर्शिदाबाद पर 2014 में सीपीएम के बदरुद्दोजा खान चुनाव जीते थे. लेकिन 2009 और 2004 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के मन्नान हुसैन ने विजय हासिल की थी. इसी आधार पर कांग्रेस इस बार भी इस सीट पर अपना दावा कर रही थी. हालांकि बातचीत में तय हुआ कि ये दोनों सीटें सीपीएम अपने पास ही रखेगी.

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