एडवांस्ड सर्च

लोकसभा चुनाव में सफाए के बाद मंथन में जुटी सीपीएम

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद वामपंथी पार्टियां दिल्ली में मंथन कर रही हैं. इस चुनाव में वामपंथी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) पश्चिम बंगाल से अपना सूपड़ा साफ करवा चुकी है जबकि केरल में वह महज एक सीट ही जीत पाई.

Advertisement
आशुतोष मिश्रा [Edited By: अजय भारतीय]नई दिल्ली, 27 May 2019
लोकसभा चुनाव में सफाए के बाद मंथन में जुटी सीपीएम सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)

लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद वामपंथी पार्टियां दिल्ली में मंथन कर रही हैं. इस चुनाव में वामपंथी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) पश्चिम बंगाल से अपना सूपड़ा साफ करवा चुकी है जबकि केरल में वह महज एक सीट ही जीत पाई. तमिलनाडु में सीपीएम को 2 सीटों पर जीत मिली. हार की वजहों को लेकर सीपीएम ने दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में 2 दिनों की पोलित ब्यूरो की बैठक बुलाई है, जहां हार के नतीजों पर पार्टी के बड़े नेता मंथन कर रहे हैं.

दो दिवसीय बैठक में केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात समेत सभी राज्यों के पोलित ब्यूरो सदस्य शामिल हैं. लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद सीपीएम के सामने अब राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में अस्तित्व बचाने की चुनौती है और इस मंथन के जरिए पार्टी समझने की कोशिश कर रही है कि आखिर किन वजहों के चलते वह हाशिए पर चली गई.

सीपीएम में लगातार प्रकाश करात और सीताराम येचुरी के बीच मतभेद की खबरें आती रहीं. पोलित ब्यूरो की बैठक में इस बात पर भी नजर होगी कि क्या एक धड़ा हार के लिए दूसरे धड़े को जिम्मेदार ठहराएगा. पोलित ब्यूरो की बैठक में इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि जिन राज्यों में सीपीएम ने दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन किया और जिन राज्यों में गठबंधन नहीं किया, वहां कौन से फैक्टर पार्टी के लिए हार का सबब बने.

केरल में वामपंथी दलों की सरकार है बावजूद इसके लोकसभा चुनाव में वह एक सीट पर सिमट गई जबकि तमिलनाडु में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डीएमके) के साथ गठबंधन का फायदा सीपीएम को मिला और चुनाव में उसे 2 सीटें मिलीं. सीपीएम की सबसे बदतर स्थिति पश्चिम बंगाल में हुई, जहां वह 35 साल के शासन में रही लेकिन ममता बनर्जी द्वारा राज्य में सरकार बनाए जाने के बाद लगातार लेफ्ट सिमटता चला गया और इस लोकसभा चुनाव में सीपीएम बंगाल में अपना खाता भी नहीं खोल पाई है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay