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भरूच लोकसभा सीट: क्या बीजेपी अपने किले को सुरक्षित रख पाएगी?

भरूच में लोकसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. गुजरात की इस लोकसभा सीट पर तीसरे चरण के तहत मतदाता वोट डालेंगे. भरूच में कुल 17 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं.

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aajtak.in [Edited by: देवांग दुबे]नई दिल्ली, 15 April 2019
भरूच लोकसभा सीट: क्या बीजेपी अपने किले को सुरक्षित रख पाएगी? बीजेपी (फाइल फोटो)

भरूच में लोकसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. गुजरात की इस लोकसभा सीट पर तीसरे चरण के तहत मतदाता वोट डालेंगे. भरूच में कुल 17 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं. हालांकि यहां पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच ही मुकाबला माना जा रहा है. बीजेपी ने यहां से मनसुखभाई वसावा को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस की ओर से शेरखान पठान मैदान में हैं. वहीं बहुजन समाज पार्टी ने वसावा चिमनभाई को प्रत्याशी बनाया है.

सियासत के लिहाज से यह सीट भारतीय जनता पार्टी के काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह सीट बीजेपी का वह गढ़ है, जहां पहली बार 1989 में जीत दर्ज करने के बाद से 2014 तक कभी भी पार्टी को हार का मुंह नहीं देखना पड़ा. ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी क्या अपने इस अभेद्य किले को हमेशा की तरह सुरक्षित रख पाएगी या 2017 के विधानसभा चुनाव में बदले राजनीतिक समीकरण उसके लिए चुनौती पेश करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा.

सीट का इतिहास

आजादी के बाद 1951 से ही इस सीट पर कांग्रेस की जीत का जो सिलसिला शुरु हुआ था, वह इंदिरा गांधी के वक्त, यहां तक कि आपातकाल में भी चलता रहा. 1984 तक कांग्रेस यहां से जीतती रही. भारतीय जनता पार्टी को 1989 में पहली बार यहां से जीत दर्ज की. उसके बाद से बीजेपी यहां से एक बार भी चुनाव नहीं हारी है.

इस सीट पर अब तक कुल 17 बार चुनाव हुए हैं. इनमें से पहले आठ चुनाव कांग्रेस ने जीते, जबकि पिछले 9 चुनाव में बीजेपी ने बाजी मारी. सीट पर एक बार 1998 में उपचुनाव हुए और उसमें भी बीजेपी को जीत मिली. यानी बीते 1989 से 2014 तक जितने भी लोकसभा के आम चुनाव या उपचुनाव इस सीट पर हुए, उसमें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को विजय मिली है.

1977 के चुनाव में अहमद पटेल ने यहां से पहली बार बाजी मारी और फिर लगातार दो और चुनाव (1984 व 1989 लोकसभा चुनाव) भी जीते. इसके बाद 1989 और 1991 के चुनाव में भी उन्होंने हाथ आजमाया, लेकिन दोनों ही बार चंदूभाई देशमुख ने उन्हें परास्त कर दिया. इस सीट के दूसरे बड़े नेता मौजूदा सांसद मनसुखभाई वसावा ही हैं, जिन्होंने यहां से सबसे ज्यादा पांच बार चुनाव जीता है.

2014 लोकसभा चुनाव का जनादेश

मनसुखभाई वसावा, बीजेपी- 548,902 वोट (51.8%)

जयेशभाई पटेल, कांग्रेस- 395,629 (37.3%)

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