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कोरोना केस 62 फीसदी घटाए जा सकते हैं दूरियां बनाकर

आइसीएमआर की अध्ययन रिपोर्ट में बताया एहतियात को ही समाधान

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aajtak.in
मनीष दीक्षित 24 March 2020
कोरोना केस 62 फीसदी घटाए जा सकते हैं दूरियां बनाकर कोरोना का कहर

एकांत में ही कोरोना वायरस (कोविड-19) का इलाज छिपा है, घुलने-मिलने से ये फैल जाता है.अगर भारतीय केवल आपस में दूरियां बना लें (सोशल डिस्टेंसिंग) तो कोरोनावायरस के मामलों में 62 फीसदी तक की कमी लाई जा सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन भी लगातार सामाजिक दूरियां कायम करने पर जोर दे रहा है और विशेषज्ञ भी इसे सख्ती से अपनाने पर जोर दे रहे हैं ताकि इस महामारी पर लगाम लगाई जा सके.

इंडियन कौंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने अपने ताजा अनुमानों में कहा है कि कोरोनावायरस के मामलों में दो तिहाई कमी लाई जा सकती है बशर्ते क्वारेंटीन (एकांत) और सामाजिक दूरियां कायम कर ली जाएं. इस वायरल इन्फेक्शन को घटाने का यही एक तरीका है कि लोगों की आवाजाही और गतिविधियों पर रोक लगा दी जाए. हालांकि ये अध्ययन कुछ हफ्तों पहले किया गया था लेकिन उपाय कारगर रहा है. यह अध्ययन मुंबई, बेंगलूरू और कोलकाता में कोरोनावायरस के फैलने के दौरान किया गया था. इन शहरों का चुनाव इसलिए किया गया क्योंकि यहां विदेशियों की आवाजाही बहुत ज्यादा है.

अध्ययन से पता चला कि एक आदमी से इसके फैलने का औसत 1.5 से 4.9 के इनसानों के अनुपात में है. यानी एक आदमी से इतने लोगों तक पहुंचता है और ये आंकड़े अटपटे लग सकते हैं क्योंकि ये गणितीय आकलन है. कोरोनावायरस फैलने का औसत संतोषजनक और डरावना दोनों है क्योंकि अगर ऊपरी स्तर से फैला तो हालत बदतर हो जाएगी. 62 फीसदी मामले कम होने का अनुमान फैलने के न्यूनतम औसत पर आधारित है और ये भी तब होगा जबकि कोरोनावायरस के लक्षणों वाले 50 फीसदी लोगों को तीन हफ्ते तन्हाई में रखा जाएगा.

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी तक चीन से आए 5700 लोगों में से 17 में कोरोना के लक्षण पाए गए थे और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

अध्ययनों से ये भी पता चला है कि 46 फीसदी वायरस पीड़ितों का पता नहीं लगाया जा सकता क्योंकि वायरस का इनक्यूबेशन पीरियड हर किसी में अलग-अलग होता है. इसमें यह भी बताया गया है डॉक्टरों के लिए ये बताना बहुत मुश्किल पड़ रहा है कि आखिर कितने वेंटीलेटर्स की जरूरत होगी. दूसरे देशों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना से हुई एक मौत के साथ 8-10 गंभीर मरीज और 40 से 50 गैर गंभीर मरीज आते हैं. क्रूज शिप ड़ायमंड प्रिंसेस को नमूना मानें तो 26 फीसदी आबादी संक्रमित हो सकती है और हर 450 वायरल पीड़ित में एक की जान जा सकती है. कम से कम पांच फीसदी मरीजों को आइसीयू में रखने की जरूरत पड़ने का अनुमान लगाया गया है.

अध्य्यन कहता है कि अभी ये तय करना मुश्किल है कि कोविड-19 का भारत पर क्या असर होगा क्योंकि इसके लक्षण दिखने में 20 से लेकर कुछ महीनों तक का समय भी लग सकता है. लिहाजा, क्वारेंटीन और सेल्फ आइसोलेशन के साथ लक्ष्णों पर लगातार नजर रखकर ही इस पर काबू पाया जा सकता है.

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