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विदेशी मीडिया में एयर स्ट्राइक पर सवाल, जेटली बोले- वे कुछ वामपंथी हैं

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि इंटरनेशन मीडिया हमारी नहीं पाकिस्तान की बात मान रही है. हिंदुस्तान में कुछ लोग हैं जो फर्जी कैम्पेन चलाते रहते हैं. राफेल और जज लोया पर भी सवाल खड़े किए हैं. हमारे यहां एक कुछ सीमित लोग हैं, वामपंथी हैं.

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aajtak.in [Edited By: कुबूल अहमद]नई दिल्ली, 12 March 2019
विदेशी मीडिया में एयर स्ट्राइक पर सवाल, जेटली बोले- वे कुछ वामपंथी हैं केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली (फोटो-india today)

एयर स्ट्राइक को लेकर विदेश मीडिया लगातार सवाल खड़े कर रही है. विदेश मीडिया का कहना है कि एयर स्ट्राइक में पाकिस्तान को कई नुकसान नहीं हुआ है. इस सवाल पर केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि ये सूचना का युद्ध चल रहा है. इस तरह की बात करने वाले वामपंथी हैं. अरुण जेटली ने यह बात आजतक के विशेष कार्यक्रम 'सुरक्षा सभा' के मंच से कही.

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमारे लिए ये चुनौती नहीं है कि इंटरनेशन मीडिया हमारी नहीं पाकिस्तान की बात मान रही है. हिंदुस्तान में कुछ लोग हैं जो फर्जी कैम्पेन चलाते रहते हैं. राफेल और जज लोया पर भी सवाल खड़े किए हैं. हमारे यहां एक कुछ सीमित लोग हैं, वामपंथी हैं. ये एमनेस्टी, ह्यूमन राइट या एडिट पेज के जरिए फेक न्यूज फैलाते हैं.

बता दें कि पाकिस्तान पर भारतीय वायुसेना द्वारा की गई एयर स्ट्राइक में जैश के आतंकी ठिकाने ध्वस्त हो गए और काफी संख्या में आतंकी भी मारे गए हैं. लेकिन विदेशी मीडिया का कहना है कि एयर स्ट्राइक में पाकिस्तान का कोई नुकसान नहीं हुआ है बल्कि कुछ पेड़ और पक्षियों को नुकसान पहुंचा है.

अरुण जेटली ने कहा इस बार भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की सीमा में खैबर पख्तूनख्वा में जाकर सटीक प्रहार किया. इस हमले से हमने वो अवधारणा तोड़ दी जिसमें कहा जाता था कि भारत नियंत्रण रेखा की पवित्रता बरकरार रखेगा, क्योंकि हमारी कार्रवाई के बाद दुनिया के किसी भी राष्ट्र ने हमारी आलोचना नहीं की. वजह ये थी कि हमने एहतियातन हमले किए जिसमें निर्दोष लोगों या पाकिस्तान की सेना को निशाना नहीं बनाया बल्कि आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगर राफेल होता तो एयर स्ट्राइक नतीजा कुछ और होता. इस सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि राफेल की जरूरत कारगिल युद्ध की कमियों से महसूस हुई. यूपीए सरकार राफेल के मुद्दे पर देरी करती रही. जब क्लियर भी किया तो कहा राफेल को चुना जाता है लेकिन प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए. यह कैसी डील थी? विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है. जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा दिया सही है, कैग ने कह दिया सही है. फिर भी ये लोग इसे मुद्दा बनाए हुए हैं क्योंकि इनके पास इसके अलावा कुछ आता नहीं.

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