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झारखंड: क्या चुनाव से पहले ही बिखर जाएगा विपक्षी महागठबंधन? JMM ने बढ़ाई मुश्किल

झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) और सीपीआई महागठबंधन से अलग होकर चुनावी ताल ठोकने का ऐलान पहले ही कर चुके हैं. वहीं, अब झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आधी से ज्यादा सीटों की डिमांड करके कांग्रेस और आरजेडी को भी बेचैन कर दिया है. इस तरह झारखंड विधानसभा चुनाव की सियासी जंग में उतरने से पहले ही महागठबंधन बिखरता हुआ नजर आ रहा है.

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aajtak.in
कुबूल अहमद नई दिल्ली, 07 November 2019
झारखंड: क्या चुनाव से पहले ही बिखर जाएगा विपक्षी महागठबंधन? JMM ने बढ़ाई मुश्किल कांग्रेस नेता आरपीएन सिंह, जेएमएम शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन

  • झारखंड में महागठबंधन में सीट शेयरिंग का मुद्दा उलझा
  • JMM का आधी से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा

झारखंड विधानसभा चुनाव की सियासी जंग में उतरने से पहले ही महागठबंधन बिखरता हुआ नजर आ रहा है. झारखंड विकास मोर्चा (जेवीएम) और सीपीआई महागठबंधन से अलग होकर चुनावी ताल ठोकने का ऐलान पहले ही कर चुके हैं. वहीं, अब झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आधी से ज्यादा सीटों की डिमांड करके कांग्रेस और आरजेडी को बेचैन कर दिया है. इसी का नतीजा है कि महागठबंधन में बचे दलों के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय नहीं हो पा रहा है.

जेएमएम के फॉर्मूले ने उलझाई बात

बता दें कि जेएमएम ने कांग्रेस के सामने नया फॉर्मूला रखा है. इसके तहत राज्य की कुल 81 विधानसभा सीटों में से 42 सीटों पर जेएमएम ने खुद लड़ने का ऐलान किया है. जबकि, 39 विधानसभा सीटें बाकी सहयोगी दलों के लिए छोड़ दी है. इसके तहत आरजेडी को सात सीटें  कांग्रेस और वामदलों को 32 सीटें देने का प्रस्ताव है. जेएमएम ने वामदलों को मनाने का जिम्मा कांग्रेस पर छोड़ दिया है.

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस झारखंड में 28 सीटों पर और आरजेडी 10 सीटों पर चुनाव लड़ने को लेकर अड़ी हुई है.ऐसे में वामदलों के हिस्से कोई भी सीट मिलती नहीं दिख रही है. जबकि, एमएसएस ने दो और सीपीआई माले ने पांच सीटों की डिमांड रखी है. महागठबंधन सीटों पर सहमति न बनते देख माले ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है.

मरांडी को साथ लाना चाहती है कांग्रेस

कांग्रेस अब भी जेवीएम प्रमुख बाबूलाल मरांडी को महागठबंधन में शामिल कराने के प्रयास में जुटी है. कांग्रेस पहले से तय फॉर्मूले के तहत जेवीएम के लिए सीट छोड़कर बंटवारा करना चाह रही है. जबकि जेएमएम बाबूलाल मरांडी से वार्ता होने तक कांग्रेस, जेएमएम, आरजेडी और वामदलों के बीच ही सीटों के बंटवारे के लिए राजी है.

आदिवासी इलाके की सीटों पर भी पेच

यही नहीं कांग्रेस और जेएमएम के बीच मुख्यरूप से आदिवासी समुदाय की 28 सुरक्षित सीटों के बंटवारे को लेकर पेच फंसा है. हेमंत सोरेन ने कांग्रेस को चार से अधिक आदिवासी सीटें नहीं देना चाहते हैं. जेएमएम आदिवासी सीटों में से लोहरदगा, खिजरी, मनिका और जगन्नाथपुर ही कांग्रेस को देना चाहती है.

जबकि, कांग्रेस छह सीटें मांग रही है, जिनमें हटिया, विश्रामपुर, मधुपुर, घाटशिला,बेरमो और गांडेय सीटें शामिल है. कांग्रेस अपने बड़े आदिवासी नेताओं को चुनावी मैदान में उतारना चाहती है, जिसके लिए आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटें मांग रही है.

आदिवासी जनाधार के कारण जेएमएम बाकी आदिवासी आरक्षित सीटों पर बेहतर स्थिति में है. 2014 के चुनाव में आदिवासी आरक्षित 28 सीटें में से जेएमएम 11 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. एजेएसएस के टिकट पर जीते विधायक विकास मुंडा ने भी अभी हाल ही में जेएमएम का दामन थामा है. जबकि, कांग्रेस 2014 के विधानसभा चुनाव में भी किसी भी आदिवासी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर पाई थी. उपचुनाव में लोहरदगा सीट से कांग्रेस के सुखदेव भगत और कोलेबिरा से नमन विक्सल कोंगारी ने जीत दर्ज किया था, लेकिन सुखदेव भगत हाल ही में बीजेपी में शामिल हो गए हैं.

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