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हरियाणा में किसी को बहुमत नहीं, दुष्यंत चौटाला के हाथ में सत्ता की चाबी

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं. किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने नारा दिया था, अबकी बार 75 के पार लेकिन नजीते के बाद भाजपा इससे काफी पीछे रह गई. हालांकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है और कांग्रेस दूसरे नंबर पर है. इस सबके बीच दुष्यंत चौटाला प्रदेश में नायक बनकर उभरे हैं. अब सत्ता की चाभी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के पास है.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 25 October 2019
हरियाणा में किसी को बहुमत नहीं, दुष्यंत चौटाला के हाथ में सत्ता की चाबी Haryana Assembly Election Results

  • भाजपा को 40 और कांग्रेस को 31 सीटों पर जीत
  • जेजेपी को 10 और अन्य के खाते में आईं 9 सीटें
  • बीजेपी अब भी बहुमत के आंकड़े से 6 सीट दूर
  • जेजेपी और अन्य के हाथ में आई सत्ता की चाबी

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं. किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने नारा दिया था, अबकी बार 75 के पार लेकिन नजीते के बाद भाजपा इससे काफी पीछे रह गई. हालांकि भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है और कांग्रेस दूसरे नंबर पर है. इस सबके बीच दुष्यंत चौटाला प्रदेश में नायक बनकर उभरे हैं. अब सत्ता की चाबी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के पास है.

हरियाणा में बीजेपी फिर से सरकार बनाने की बात कर रही है लेकिन सरकार बनाने के लिए कांग्रेस की कोशिशें भी जारी हैं. अब दोनों पार्टियों की निगाहें दुष्यंत चौटाला चौटाला पर टिकी है. विधानसभा की कुल 80 सीटों में से भाजपा 40 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, जबकि कांग्रेस को 31 सीटें मिली है. इसके अलावा जननायक जनता पार्टी को 10 सीटें और अन्य को 9 सीटें मिली है.

इन्हें भी पढ़ें: महाराष्ट्र में बनेगी सरकार तो हरियाणा में बीजेपी को दुष्यंत की 'चाबी' से आस

भारतीय जनता पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़ा 46 सीट से अब भी 6 सीट दूर है. अगर दुष्यंत चौटाला की जेजेपी उसे समर्थन देती है तो वह आसानी से बहुमत पा सकती है. इसके अलावा भाजपा 6 निर्दलीय विधायकों के समर्थन से भी सरकार बना सकती है. लिहाजा सरकार बनाने में निर्दलीयों का भी अहम रोल है. अगर बात करें कांग्रेस की तो वह भी सरकार बनाने की जुगत में है. कांग्रेस भी जेजेपी मुखिया दुष्यंत चौटाला पर नजरें लगाए है. जाहिर है कि मजबूत स्थिति में होने के कारण दुष्यंत चौटाला भी खूब सौदेबाजी करेंगे. यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस से दुष्यंत मुख्यमंत्री की कुर्सी भी मांग सकते हैं.

इस बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है. सूत्रों के मुताबिक वह सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. दोनों पार्टियां सत्ता की जुगत में लगी है. हरियाणा में कांग्रेस को संजीवनी दिलाने के लिए फिर से काम पर लगाए गए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ऐलान कर दिया है कि जनादेश बीजेपी के खिलाफ है लिहाजा सभी विपक्षी दल साथ आ जाएं.

हरियाणा में भाजपा अपने टार्गेट 75 प्लस से बहुत पीछे रह गई. बागी उम्मीदवारों ने बहुत नुकसान पहुंचाया है. साथ ही बहुमत से क्यों चूक गई. इसके पीछे कई अहम कारण हैं.

-जाट-दलित-मुस्लिम की नाराज़गी और ध्रुवीकरण बीजेपी के लिए भारी पड़ा

-जाट-दलित समुदाय से डिप्टी सीएम घोषित होता तो अंतर पड़ सकता था

-उम्मीदवारों के हिसाब से बीजेपी के खिलाफ जाट-दलित-मुस्लिम वोट गया

-INLD में बंटवारे की वजह से जाट वोटों का सीधा फायदा कांग्रेस को मिला

-जातिगत समीकरण को मैनेज ना कर पाने और टिकट बंटवारे से नुकसान हुआ

-13 से 16 सीटों पर बीजेपी को बागी उम्मीदवारों ने बहुत नुकसान पहुंचाया

-खट्टर सरकार के मंत्रियों के खिलाफ बड़ी नाराज़गी थी, छह मंत्री चुनाव हारे

अब बात करते हैं कि अगर हरियाणा में सरकार बनती है तो क्या-क्या संभावनाएं हैं. पहला विकल्प तो यही है कि जेजेपी और बीजेपी मिल जाएं. बीजेपी की सरकार बनाने की दूसरी सूरत तब बनती है जब बीजेपी निर्दलीयों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब हो जाए. जबकि कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए जेजेपी के साथ-साथ अन्यों का साथ भी लेना होगा.

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