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Literacy Day: 3.5 करोड़ बच्चे नहीं जा पाते स्कूल, इतना पढ़ा-लिखा है इंडिया

आज दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है... जानें- कितना पढ़ा- लिखा है इंडिया?

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 08 September 2019
Literacy Day: 3.5 करोड़ बच्चे नहीं जा पाते स्कूल, इतना पढ़ा-लिखा है इंडिया प्रतीकात्मक फोटो

वर्तमान युग में शिक्षा बहुत जरूरी है शिक्षा हमारे जीवन का आवश्यक अंग है. साल 1966 में यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) ने शिक्षा के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाने तथा विश्व भर के लोगों का इस तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रतिवर्ष 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय/ विश्व साक्षरता दिवस मनाने का निर्णय लिया था. जिसके बाद हर साल 8 सितंबर को दुनियाभर में ये दिन मनाने की परंपरा जारी है.

आइए जानते हैं विश्व साक्षरता दिवस से जुड़ी ये जरूरी बातें.

क्या है उद्देश्य

साक्षरता दिवस का प्रमुख उद्देश्य नव साक्षरों को उत्साहित करना है. अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस हमारे लिए अहम दिवस है, क्योंकि हमारे जीवन में शिक्षा का बहुत अधिक महत्त्व है. देश में पुरुषों की अपेक्षा महिला साक्षरता कम है. हमें आज के दिन यह संकल्प लेना होगा कि हर व्यक्ति साक्षर बनें, निरक्षर कोई न रहे. हमें अपने यहां से निरक्षता को भगाना होगा.

क्या है भारत का शैक्षिक इतिहास

भारत का शैक्षिक इतिहास अत्यधिक समृद्ध है प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों द्वारा मौखिक रूप में शिक्षा  दी जाती थी. जिसके बाद  शिक्षा का प्रसार वर्णमाला के विकास के बाद भोज पत्र और पेड़ों की छालों पर लिखित रूप में होने लगा.

इस कारण भारत में लिखित साहित्य का विकास तथा प्रसार होने लगा. देश में शिक्षा जन साधारण को बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ-साथ उपलब्ध होने लगी. नालंदा, विक्रमशिला और तक्षशिला जैसी विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थानों की स्थापना ने शिक्षा के प्रचार में अहम भूमिका निभाई. लोगों में व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए साक्षरता एक बड़ी जरूरत है.

क्या है भारत में साक्षरता दर

किसी भी देश का भविष्य उस देश के युवाओं पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर आज की पीढ़ी शिक्षा से वंचित रहती है तो इसका नुकसान भविष्य में भारत को ही उठाना होगा.

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की वयस्क साक्षरता दर 74-75 प्रतिशत है, जो दुनिया भर में औसत 86 प्रतिशत से नीचे है. यह इस सवाल का संकेत देता है कि केंद्र सरकार के 'बेटी पढाओ, बेटी बचाओ' अभियान सहित सभी योजनाओं का क्या हुआ? वहीं साल 2015 में भारत की ओवरऑल साक्षरता दर 71.96 प्रतिशत थी.

35 मिलियन बच्चे नहीं जाते स्कूल

सर्ड्स इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में शहरी जगहों पर अभी भी 35 मिलियन (करीब 3.5 करोड़) बच्चे  हैं जो अभी भी स्कूल नहीं जाते हैं, हालांकि शिक्षा का अधिकार कानून 14 साल की उम्र तक के बच्चों को स्कूल जाने के लिए अनिवार्य बनाता है.

बच्चों का स्कूल न जाने वजह स्कूल की अतिरिक्त फीस माना गया है. अच्छी शिक्षा के लिए कई छात्रों को काफी फीस देनी पड़ती है जो ज्यादातर परिवार के बजट से बाहर होती है. आंकड़े बताते हैं कि 80 से 90 मिलियन बच्चे स्कूल की फीस का भुगतान करने के लिए बाहरी वित्तीय सहायता जैसे लोन और स्कॉलरशिप पर निर्भर हैं.

बच्चों को कम उम्र में ही शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई जतन करने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार को सोचना चाहिए कि हर घर में कितनी सुलभ तरीके से शिक्षा का पहुंचाया जा सकता है. सरकार को इस प्रश्न पर गौर देना चाहिए कि हम शिक्षा को कैसे सुलभ बना सकते हैं?

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