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PNB घोटाले का असर, रिजर्व बैंक ने LoU और LoC पर लगाई रोक, महंगा होगा आयात

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी ने आयात के लिए उपलब्ध इस सुविधा का दुरुपयोग कर देश में बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया था. इसको देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

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aajtak.in [Edited by: राहुल मिश्र]नई दिल्ली, 14 March 2018
PNB घोटाले का असर, रिजर्व बैंक ने LoU और LoC पर लगाई रोक, महंगा होगा आयात पीएनबी घोटाले के बाद महंगा हुआ इंपोर्ट

रिजर्व बैंक( आरबीआई) ने पंजाब नेशनल बैंक( पीएनबी) घोटाले से सबक लेते हुए गारंटीपत्र (लेटर ऑफ अंडरटेकिंग) के जरिये बैंक गारंटी जारी करने की सुविधा पर रोक लगा दी.

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके चाचा मेहुल चोकसी ने आयात के लिए उपलब्ध इस सुविधा का दुरुपयोग कर देश में बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घोटाले को अंजाम दिया था. इसको देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

आरबीआई ने गारंटीपत्र के साथ ही आश्वस्ति पत्र (लेटर ऑफ कम्फर्ट) जारी करने पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी. आश्वस्ति पत्र भी गारंटी पत्र की तरह ही होता है. इन पत्रों का इस्तेमाल आयातकों द्वारा विदेशों में की जाने वाली खरीद के वित्तपोषण में किया जाता है.

इसे पढ़ें: 2015 की इस खुफिया रिपोर्ट पर कार्रवाई होती तो PNB घोटाला नहीं कर पाता नीरव मोदी

आरबीआई ने जारी बयान में कहा कि कुछ तय शर्तों के साथ साखपत्र तथा बैंक गारंटी जारी किया जाना बरकरार रहेगा. रिजर्व बैंक ने कहा कि गारंटीपत्र पर रोक लगाने का निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू है.

आरबीआई ने एक अधिसूचना में कहा, दिशानिर्देशों की समीक्षा के बाद आयात के लिए बैंकों द्वारा गारंटीपत्र जारी किये जाने की सुविधा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है.

इंपोर्ट-एक्सपोर्ट क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद देश में इंपोर्ट की लागत में लगभग आधे फीसदी की बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं. वहीं इस कदम के बाद कारोबारियों को इंपोर्ट के लिए डॉलर की व्यवस्था करने की चुनौती में भी बढ़ जाएगी. इसके साथ ही विदेशी बैंकों के सामने भारतीय बैंक की साख पर भी सवाल खड़ा होगा.

वहीं बैंकिग क्षेत्र का जानकारों का दावा है कि रिजर्व बैंक के इस फैसले के बाद विदेशी बैंकों को भारतीय बैंक के मुकाबले इंपोर्ट फाइनेंस में बढ़त मिल जाएगी. गौरतलब है कि भारतीय बैंकों से सस्ती फाइनेंस के चलते इंपोर्ट फाइनेंसिंग विदेशी बैंकों के लिए अभीतक कड़ी चुनौती थी.

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