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CSAT विवादः राज्‍यसभा में जमकर हंगामा, सदन के वेल में घुसे AIADMK सांसद

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के मसले पर हंगामा जारी है. इस मुद्दे पर आज राज्‍यसभा में जमकर हंगामा हुआ. एआईएडीएमके के सांसद तो सदन के वेल में घुस गए.

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Aajtak.in [Edited By: रंजीत सिंह]नई दिल्‍ली, 05 August 2014
CSAT विवादः राज्‍यसभा में जमकर हंगामा, सदन के वेल में घुसे AIADMK सांसद सीसैट के खिलाफ प्रदर्शन करते छात्र

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) के मसले पर हंगामा जारी है. इस मुद्दे पर आज राज्‍यसभा में जमकर हंगामा हुआ. एआईएडीएमके के सांसद तो सदन के वेल में घुस गए. जेडी(यू) अध्‍यक्ष शरद यादव ने कहा, 'हम अंग्रेजी के खिलाफ नहीं हैं लेकिन सीसैट खत्‍म किया जाना चाहिए.' बीजेपी नेता मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने पूर्व की यूपीए सरकार पर हमला बोला. उन्‍होंने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में सीसैट कांग्रेस ने ही लागू किया था.

इससे पहले, बीजेपी संसदीय दल की आज हुई बैठक में भी सीसैट का मुद्दा उठा. केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि सीसैट मसले पर सरकार ने कम से कम समय में बेहतर कदम उठाया है. उन्होंने भरोसा दिया कि यूपीएससी की परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी.

हालांकि, इस मसले पर सरकार द्वारा घोषित बदलावों से असंतुष्ट परीक्षार्थियों का प्रदर्शन जारी है. पिछले 25 दिनों से मुखर्जी नगर में प्रदर्शन कर रहे परीक्षार्थियों ने सीसैट प्रश्न-पत्र को पूरी तरह हटाए जाने तक जंतर-मंतर पर अपना प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है.

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे परीक्षार्थी पवन ने कहा, ‘सीसैट को लेकर कार्मिक राज्य मंत्री जीतेंद्र द्वारा लोकसभा में दिए गए बयान से हम बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. हम सीसैट को पूरी तरह खत्म करने की मांग करते हैं. हमने जंतर-मंतर पर अपना प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया है.’

पवन ने कहा, ‘सरकार ने सोमवार को जो घोषणा की, वह छात्रों की कभी मांग रही ही नहीं. हमने बीजेपी सरकार से कभी नहीं कहा था कि सीसैट पैटर्न में संशोधन किया जाए. इसकी बजाय, 'हमारी मांग थी कि हिंदी माध्यम में पढ़े लाखों छात्रों के हित में सीसैट को खत्म किया जाए.’

उन्होंने कहा, ‘चुनावों से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि वह सीसैट खत्म करेगी. बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने उन लाखों यूपीएससी परीक्षार्थियों को धोखा दिया है जिन्हें उम्मीद थी कि नई सरकार उनकी मांगें मानेगी.’

गौरतलब है कि कार्मिक मंत्री जीतेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में ऐलान किया कि सीसैट के प्रश्न-पत्र में पूछे जाने वाले अंग्रेजी के सवालों के अंक मेरिट में नहीं जोड़े जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि 2011 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल हुए छात्रों को 2015 की परीक्षा में शामिल होने का एक और मौका दिया जाएगा. साल 2011 में ही सीसैट लागू किया गया था.

इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारक के.एन. गोविंदाचार्य ने लोकसभा स्पीकर से अनुरोध किया है कि वह संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित ‘राजभाषा संकल्प’ के उल्लंघन के लिए यूपीएससी के अध्यक्ष और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव के खिलाफ कार्रवाई करें.

गोविंदाचार्य ने कहा कि 2011 में यूपीएससी ने बिना किसी जनादेश और ‘राजभाषा संकल्प का उल्लंघन’ करते हुए सिविल सेवा परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया था. उन्होंने मांग की कि यूपीएससी परीक्षा के प्रश्न-पत्र मूलत: हिंदी में तैयार किए जाएं और फिर उनका अनुवाद अंग्रेजी में किया जाए.

उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपे गए ज्ञापन पर कोई कार्रवाई न होने पर भी अपनी अप्रसन्नता जाहिर की. ये ज्ञापन गोविंदाचार्य ने प्रधानमंत्री को सौंपा था.

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