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ब्रिटेन में पढ़ाई के साथ काम नहीं कर सकेंगे भारतीय छात्र

ब्रिटेन ने घोषणा की कि वह अगले महीने से देश में अध्ययन के दौरान यूरोपीय देशों से बाहर के छात्रों के काम करने पर रोक लगा देगा. इस घोषणा से ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय स्टूडेंट्स खासे प्रभावित होंगे.

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aajtak.in [Edited By: ऋचा मिश्रा]नई दिल्‍ली, 14 July 2015
ब्रिटेन में पढ़ाई के साथ काम नहीं कर सकेंगे भारतीय छात्र visa

ब्रिटेन ने घोषणा की कि वह अगले महीने से देश में अध्ययन के दौरान यूरोपीय देशों से बाहर के छात्रों के काम करने पर रोक लगा देगा. इस घोषणा से ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय स्टूडेंट्स खासे प्रभावित होंगे.

ब्रिटिश आव्रजन मंत्री जेम्स ब्रोकेनशाइर ने कहा कि अगले महीने से यूरोपीय देशों के बाहर के जो स्टूडेंट्स जन वित्त पोषित आगे की शिक्षा (पब्लिकली फंडेड फरदर एजुकेशन) के कॉलेजों में पढ़ने के लिए ब्रिटेन आते हैं वह एक सप्ताह में 10 घंटे काम करने का अधिकार खो देंगे. ब्रोकेनशाइर ने कहा कि आव्रजन नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग ब्रिटिश रोजगार बाजार में गैरकानूनी तरीके से पहुंच को बेचना चाहते हैं और बड़ी संख्या में लोग इसे खरीदने के इच्छुक भी हैं.

ब्रिटिश संसद में नए नियमों की शुरूआत के बाद ब्रोकेनशाइर ने कहा, 'हमारे सुधारों में अंग्रेजी भाषा की परीक्षा की शुरुआत, फर्जी कॉलेजों के सैकड़ों छात्रों से प्रायोजकता का अधिकार हटाना और रोजगार बाजार में स्टूडेंट्स की पहुंच पर रोक शामिल है. ये सभी सुधार ब्रिटेन के लाभ के लिए आव्रजन को नियंत्रित करने की हमारी योजना हैं.'

इस फैसले को उचित ठहराते हुए ब्रिटेन के गृह विभाग ने आधिकारिक आंकड़े बताए जिनके अनुसार, पिछले साल गैर यूरोपीय संघ के 121,000 छात्र ब्रिटेन आए लेकिन केवल 51,000 ही जा रहे हैं. गैर यूरोपीय संघ के स्टूडेंट्स पर अध्ययन के दौरान काम करने पर प्रतिबंध लगाया गया है. साथ ही ये स्टूडेंट्स अपना पाठ्यक्रम पूरा होने पर वीजा के लिए आवेदन भी नहीं कर पाएंगे.

नए नियमों के अनुसार, एफई कॉलेजों के लिए जारी होने वाले स्टूडेंट्स के लिए वीजा की अवधि भी तीन साल से घटा कर दो साल कर दी गई है और उसके बाद उन्हें देश छोड़ना होगा.

एफई कालेज ऐसे शैक्षिक संस्थान हैं जो पूर्णकालिक विश्वविद्यालय के क्षेत्र से बाहर संचालित होते हैं. इनमें कई व्यावसायिक कॉलेज शामिल हैं.

समझा जाता है कि नए नियम भारतीय स्टूडेंट्स के लिए अवरोधक साबित होंगे जो ब्रिटेन के लिए आवेदन करते हैं और अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे वैकल्पिक गंतव्य चुनते हैं.

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